अतीक के बेटे अली और उमर पैरोल पर: अबान के जनाजे में होंगे शामिल, हाईकोर्ट ने 4 शर्तें लगाईं; कड़ी सुरक्षा में प्रयागराज लाए जा रहे

अतीक के बेटे अली और उमर पैरोल पर: अबान के जनाजे में होंगे शामिल, हाईकोर्ट ने 4 शर्तें लगाईं; कड़ी सुरक्षा में प्रयागराज लाए जा रहे

माफिया-राजनेता अतीक अहमद के छोटे बेटे अबान अहमद की मौत के बाद जेल में बंद उसके दोनों भाई अली अहमद और उमर अहमद को अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए पैरोल मिल गई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शुक्रवार को अली और उमर को अबान के अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति दी। दोनों अलग-अलग जेलों में बंद हैं। अली अहमद झांसी जेल में और उमर अहमद लखनऊ जेल में है।

कोर्ट के आदेश के मुताबिक दोनों भाइयों को पुलिस सुरक्षा में प्रयागराज लाया जाएगा। अंतिम संस्कार के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने और अदालत की ओर से तय शर्तों का पालन कराने की जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

अली को झांसी जेल से प्रयागराज लाया गया

शनिवार सुबह अली अहमद को झांसी जेल से बाहर निकाला गया। उसे कड़ी सुरक्षा के बीच प्रयागराज ले जाया जा रहा है। उसके साथ पुलिस बल तैनात किया गया है और रास्ते में भी सुरक्षा व्यवस्था रखने की तैयारी की गई है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अली को जेल से बाहर निकालते समय पुलिस ने सुरक्षा के मद्देनजर वैन को जेल गेट के पास रखा। वैन को इस तरह कवर किया गया था कि उसका चेहरा बाहर से दिखाई न दे। जेल के बाहर भी पुलिस की तैनाती की गई थी।

अली को झांसी से प्रयागराज की दूरी तय करने में कई घंटे लग सकते हैं। रास्ते में संबंधित थाना क्षेत्रों की पुलिस को भी सुरक्षा व्यवस्था के लिए अलर्ट रखा गया है।

उमर भी लखनऊ जेल से प्रयागराज आएगा

अली के साथ उसका बड़ा भाई उमर अहमद भी पैरोल पर बाहर आएगा। उमर लखनऊ जेल में बंद है। हाईकोर्ट ने दोनों को उनके छोटे भाई अबान के अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति दी है।

कोर्ट ने दोनों भाइयों को परिवार के सदस्यों के साथ सीमित समय बिताने की भी अनुमति दी है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, दोनों अपने भाई और परिवार के सदस्यों से पुलिस की मौजूदगी में करीब एक घंटे तक मिल सकेंगे। इसके बाद उन्हें सुरक्षित वापस जेल पहुंचाने की जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

हाईकोर्ट ने पैरोल के साथ लगाईं शर्तें

अली और उमर को पैरोल देते समय इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कई शर्तें तय की हैं। इनका उद्देश्य अंतिम संस्कार के दौरान सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखना है।

पैरोल के दौरान दोनों:

मीडिया से बातचीत नहीं करेंगे।
सोशल मीडिया पर कोई गतिविधि नहीं करेंगे।
किसी सार्वजनिक सभा को संबोधित नहीं करेंगे।
किसी अन्य कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे।

कोर्ट ने प्रशासन को यह भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि सुरक्षा में किसी तरह की चूक न हो और निर्धारित सभी शर्तों का पालन कराया जाए।

अबान की सड़क हादसे में हुई मौत

अतीक अहमद के छोटे बेटे अबान अहमद की गुरुवार को झांसी में सड़क हादसे में मौत हुई थी। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, वह झांसी जेल में बंद अपने बड़े भाई अली अहमद से मिलने के लिए प्रयागराज से झांसी जा रहा था।

झांसी के पूंछ थाना क्षेत्र के खिल्ली गांव के पास कार अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गई। हादसे में अबान और उसके एक साथी की मौत हुई, जबकि कार में सवार तीन अन्य लोग घायल हुए। पुलिस के अनुसार दुर्घटना की सूचना सुबह करीब 10:30 बजे मिली थी।

पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक कार चालक ने नियंत्रण खो दिया था और वाहन डिवाइडर से जा टकराया। हादसे के बाद घायलों को इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज ले जाया गया था।

पोस्टमार्टम में 23 चोटें मिलीं

अबान के शव का झांसी मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों के पैनल ने पोस्टमार्टम किया। रिपोर्ट के मुताबिक उसके शरीर पर 23 चोटें मिलीं। डॉक्टरों ने अत्यधिक आंतरिक रक्तस्राव को मौत का कारण बताया।

रिपोर्ट के अनुसार तेज टक्कर से उसके लिवर और फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचा था, तिल्ली भी क्षतिग्रस्त हुई और पसलियां टूट गई थीं। इन गंभीर चोटों के कारण शरीर के अंदर काफी रक्तस्राव हुआ। अबान के साथ हादसे में मारे गए उसके साथी सोनू उर्फ साकिर का भी पोस्टमार्टम किया गया था।

अबान के शव को प्रयागराज ले जाया गया

पोस्टमार्टम के बाद अबान के शव को परिजन प्रयागराज ले गए। उसका अंतिम संस्कार प्रयागराज में परिवार के कब्रिस्तान में किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसी अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए जेल में बंद अली और उमर ने अदालत से अनुमति मांगी थी।

अली और उमर की पैरोल के लिए उनकी बुआ परवीन कुरैशी की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति अजय भनोट और न्यायमूर्ति दिवेश चंद्र सामंत की पीठ ने दोनों को अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति दी।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश हुए दोनों भाई

पैरोल की सुनवाई के दौरान अली और उमर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत के सामने पेश किया गया। सुनवाई के दौरान उमर ने अली से हिम्मत रखने और अंतिम संस्कार के दौरान मीडिया से बातचीत न करने की बात कही।

अदालत ने मानवीय आधार पर दोनों भाइयों को अपने छोटे भाई के अंतिम संस्कार में शामिल होने का अवसर दिया, लेकिन इसके साथ सुरक्षा और आचरण से जुड़ी शर्तें भी निर्धारित कीं।

अली की पैरोल पर कड़ी सुरक्षा

अली को झांसी जेल से बाहर लाते समय सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। पुलिस बल के साथ उसे प्रयागराज रवाना किया गया। रास्ते में आने वाले थाना क्षेत्रों में भी पुलिस को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

सुरक्षा व्यवस्था इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अतीक अहमद के परिवार से जुड़े मामले में पहले भी पुलिस और प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाता रहा है। इस बार भी अदालत ने स्पष्ट किया है कि पैरोल के दौरान सुरक्षा में कोई लापरवाही नहीं होनी चाहिए।

अबान की मौत के बाद परिवार पर फिर संकट

अबान की मौत अतीक अहमद के परिवार के लिए एक और बड़ा झटका है। अतीक अहमद की 2023 में हत्या कर दी गई थी। उसी साल उसके बेटे असद की पुलिस मुठभेड़ में मौत हुई थी। अबान की सड़क दुर्घटना में मौत के बाद परिवार के सदस्यों के अंतिम संस्कार और जेल में बंद भाइयों की पैरोल का मामला सामने आया है।

अली और उमर फिलहाल अलग-अलग जेलों में बंद हैं। हाईकोर्ट की अनुमति के बाद दोनों को सीमित अवधि के लिए जेल से बाहर लाकर अंतिम संस्कार में शामिल कराया जा रहा है। इसके बाद दोनों को वापस संबंधित जेलों में भेजा जाएगा।

एक नजर में पूरा मामला

क्या हुआ?
अतीक अहमद के छोटे बेटे अबान अहमद की झांसी में सड़क हादसे में मौत हुई।

कब हुआ हादसा?
गुरुवार सुबह करीब 10:30 बजे झांसी के पूंछ थाना क्षेत्र में कार डिवाइडर से टकराई।

कितने लोगों की मौत हुई?
अबान और उसके साथी सोनू की मौत हुई, जबकि तीन अन्य लोग घायल हुए।

अली और उमर को पैरोल क्यों मिली?
छोटे भाई अबान के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए।

अली कहां बंद है?
झांसी जेल।

उमर कहां बंद है?
लखनऊ जेल।

पैरोल पर मुख्य शर्तें क्या हैं?
मीडिया से बातचीत, सोशल मीडिया गतिविधि, सार्वजनिक सभा और किसी अन्य कार्यक्रम में शामिल होने पर रोक है।

अंतिम संस्कार के बाद क्या होगा?
दोनों भाइयों को पुलिस सुरक्षा में वापस संबंधित जेलों में पहुंचाया जाएगा।