आसाराम को 20 दिन की पैरोल मंजूर, राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य समिति के फैसले पर उठाए सवाल; 13 साल से ज्यादा समय से जेल में बंद
नाबालिग से दुष्कर्म मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम को राजस्थान हाईकोर्ट ने 20 दिन की पैरोल मंजूर कर दी है। हाईकोर्ट ने पैरोल याचिका खारिज करने वाली जिला कलेक्टर की अध्यक्षता वाली समिति के फैसले पर भी कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि समिति की ओर से दिए गए कई तर्क "भ्रामक और बिना ठोस आधार के" नजर आते हैं।
राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने आसाराम की उम्र और जेल में बिताए गए लंबे समय को देखते हुए यह राहत दी। अदालत ने कहा कि आसाराम अब तक करीब 13 साल, 1 महीने और 24 दिन जेल में रह चुके हैं। इससे पहले भी उन्हें अंतरिम जमानत मिल चुकी है और उस दौरान उनके द्वारा किसी शर्त के उल्लंघन का कोई मामला सामने नहीं आया।
पैरोल याचिका खारिज करने वाली समिति के तर्कों पर कोर्ट की टिप्पणी
आसाराम की 20 दिन की पैरोल याचिका पर फैसला लेने के लिए जोधपुर जिला कलेक्टर की अध्यक्षता वाली समिति ने बैठक की थी। समिति ने पुलिस रिपोर्ट और अन्य कारणों का हवाला देते हुए पैरोल देने से इनकार कर दिया था।
समिति की ओर से कहा गया था कि पुलिस को आशंका है कि पैरोल मिलने के बाद आसाराम फरार हो सकते हैं। इसके अलावा समिति ने राजस्थान के बाहर दर्ज एक आपराधिक मामले और गुजरात के गांधीनगर में हुई सजा का भी उल्लेख किया था।
समिति ने यह भी कहा था कि आसाराम का इलाज चल रहा है और मेडिकल अधिकारी की ओर से उन्हें पैरोल पर रिहा करने के लिए फिट घोषित करने का प्रमाण पत्र नहीं दिया गया है। इसके अलावा शिकायतकर्ता परिवार की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई गई थी।
हालांकि हाईकोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि ये तर्क "कल्पना पर आधारित और बिना किसी ठोस घटना के बताए गए हैं।"
कोर्ट ने कहा- पैरोल रोकने के लिए बार-बार दिए जाते हैं समान कारण
हाईकोर्ट ने कहा कि कई मामलों में पैरोल देने से इनकार करने वाली समितियां एक जैसे कारणों का इस्तेमाल करती हैं, लेकिन उनके समर्थन में वास्तविक घटनाएं या ठोस आधार पेश नहीं किए जाते।
अदालत ने यह भी कहा कि आसाराम के खिलाफ ऐसा कोई उदाहरण नहीं है, जिससे यह साबित हो कि उन्होंने पहले मिली राहत का दुरुपयोग किया हो या समाज अथवा गवाहों के लिए कोई खतरा पैदा किया हो।
उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए मिली राहत
आसाराम की उम्र वर्तमान में करीब 85 वर्ष है। हाईकोर्ट ने उम्र और लंबे समय से चल रही कैद को ध्यान में रखते हुए उन्हें सीमित अवधि की पैरोल देने का आदेश दिया।
अदालत ने पैरोल के लिए शर्तें भी तय की हैं। आसाराम को 50 हजार रुपये का निजी मुचलका भरना होगा। इसके साथ ही उन्हें 25-25 हजार रुपये की दो जमानतें भी देनी होंगी। हाईकोर्ट ने जोधपुर सेंट्रल जेल अधीक्षक को अन्य जरूरी और उचित शर्तें लगाने की स्वतंत्रता भी दी है।
मई में हाईकोर्ट ने बरकरार रखी थी उम्रकैद की सजा
इससे पहले मई 2026 में राजस्थान हाईकोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म मामले में आसाराम की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी थी। हालांकि अदालत ने गैंगरेप के आरोप से उन्हें बरी कर दिया था।
उस समय हाईकोर्ट ने उनकी जमानत रद्द करते हुए उन्हें दोबारा जेल भेजने का आदेश दिया था। अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि उम्र और बीमारी के आधार पर दोषी को राहत नहीं दी जा सकती, क्योंकि इससे पीड़िता के अधिकार और न्याय व्यवस्था पर असर पड़ सकता है।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि किसी आरोपी की उम्र या स्वास्थ्य की स्थिति अपराध की गंभीरता को कम नहीं कर सकती और न्याय व्यवस्था को पीड़िता की आवाज को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
गुजरात में भी चल चुका है मामला
आसाराम को राजस्थान के अलावा गुजरात में भी एक नाबालिग से दुष्कर्म मामले में दोषी ठहराया जा चुका है। गांधीनगर की अदालत ने उन्हें इस मामले में दोषी करार दिया था।
राजस्थान हाईकोर्ट में पैरोल सुनवाई के दौरान गुजरात मामले और अन्य कानूनी पहलुओं का भी उल्लेख किया गया था, लेकिन अदालत ने कहा कि केवल आशंकाओं के आधार पर पैरोल से इनकार नहीं किया जा सकता।
अब जेल से बाहर आने के लिए पूरी करनी होंगी शर्तें
हाईकोर्ट के आदेश के बाद आसाराम को पैरोल पर रिहाई मिल सकेगी, लेकिन उन्हें अदालत द्वारा तय सभी शर्तों का पालन करना होगा। जेल प्रशासन सुरक्षा और अन्य परिस्थितियों को देखते हुए अतिरिक्त नियम भी लागू कर सकता है।
फिलहाल यह राहत केवल 20 दिनों की पैरोल के रूप में दी गई है। पैरोल अवधि पूरी होने के बाद उन्हें वापस जेल लौटना होगा।
news desk MPcg