सासाराम सदर अस्पताल में मोबाइल की रोशनी में मरीजों का इलाज, बिजली कटते ही खुली स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल

सासाराम सदर अस्पताल में मोबाइल की रोशनी में मरीजों का इलाज, बिजली कटते ही खुली स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल

बारिश के बाद बिजली गुल, जनरेटर होने के बावजूद इमरजेंसी वार्ड में छाया अंधेरा; डॉक्टरों को मोबाइल की फ्लैश लाइट का लेना पड़ा सहारा

सासाराम, बिहार। बिहार के रोहतास जिले से सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई है। सासाराम सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में बिजली गुल होने के बाद डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को मोबाइल की रोशनी में मरीजों का इलाज करना पड़ा। घटना के बाद अस्पताल की बिजली व्यवस्था और बैकअप सिस्टम को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

बताया गया कि बारिश के बाद अस्पताल में बिजली आपूर्ति बाधित हुई और कुछ समय के लिए इमरजेंसी वार्ड अंधेरे में चला गया। इस दौरान मरीजों के इलाज के लिए मोबाइल फोन की फ्लैश लाइट का इस्तेमाल किया गया।

अस्पताल में जनरेटर होने के बावजूद परेशानी

इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि अस्पताल में जनरेटर की व्यवस्था मौजूद होने के बावजूद बिजली जाने पर तत्काल बैकअप क्यों नहीं मिला। इमरजेंसी वार्ड में बिजली की निर्बाध व्यवस्था बेहद जरूरी होती है, क्योंकि यहां गंभीर मरीजों का इलाज किया जाता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, बिजली कटने के बाद अस्पताल कर्मियों को वैकल्पिक रोशनी के लिए मोबाइल का सहारा लेना पड़ा। इससे मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

पहले भी सामने आ चुकी है ऐसी तस्वीर

सासाराम सदर अस्पताल में मोबाइल या टॉर्च की रोशनी में इलाज का मामला नया नहीं है। जून 2025 में भी इसी अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में बिजली कटने के बाद करीब 20 से 30 मिनट तक मोबाइल की रोशनी में मरीजों का इलाज किए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। उस समय भी अस्पताल में जनरेटर होने के बावजूद उसके समय पर चालू नहीं होने पर सवाल उठे थे।

इससे पहले 2021 और 2022 में भी सासाराम सदर अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर से ऐसी ही तस्वीरें सामने आई थीं।

इमरजेंसी वार्ड की व्यवस्था पर सवाल

अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में बिजली की कमी सिर्फ असुविधा का मामला नहीं है। गंभीर मरीजों के इलाज के दौरान रोशनी और बिजली की लगातार उपलब्धता जरूरी होती है। ऐसे में बिजली जाने के बाद बैकअप व्यवस्था तुरंत काम नहीं करने पर मरीजों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

फिलहाल इस ताजा घटना के बाद अस्पताल प्रशासन की ओर से विस्तृत स्पष्टीकरण सामने आने का इंतजार है। सवाल यही है कि जब अस्पताल में जनरेटर की व्यवस्था मौजूद है, तो बिजली कटने के दौरान मरीजों को मोबाइल की रोशनी में इलाज कराने की नौबत क्यों आई?