TMC के 12 और बैंक खाते फ्रीज, 1000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि पर रोक; कलकत्ता हाई कोर्ट से राहत के बीच बढ़ीं मुश्किलें

TMC के 12 और बैंक खाते फ्रीज, 1000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि पर रोक; कलकत्ता हाई कोर्ट से राहत के बीच बढ़ीं मुश्किलें

पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) की वित्तीय मुश्किलें और बढ़ गई हैं। कलकत्ता हाई कोर्ट से पार्टी को दैनिक खर्चों के संचालन के लिए आंशिक राहत मिलने के एक दिन बाद ही बिधाननगर साइबर थाना पुलिस ने विभिन्न सरकारी और निजी बैंकों में मौजूद 12 और बैंक खातों को फ्रीज करने का निर्देश जारी कर दिया। पुलिस सूत्रों के अनुसार, पहले फ्रीज किए गए खातों को मिलाकर अब जिन खातों पर रोक लगी है, उनमें कुल 1000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा है।

यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब पार्टी पहले से ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) और राज्य पुलिस की जांच का सामना कर रही है। तृणमूल कांग्रेस ने इस कार्रवाई को अदालत में चुनौती दी है और मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह होने की संभावना है।

हाई कोर्ट से राहत के बाद बढ़ी परेशानी

गुरुवार को कलकत्ता हाई कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस को सीमित राहत देते हुए पार्टी के दैनिक खर्चों के संचालन के लिए एक विशेष अधिकारी (Special Officer) नियुक्त करने का निर्देश दिया था। अदालत ने कहा था कि अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं द्वारा जारी चेक विशेष अधिकारी के प्रति-हस्ताक्षर (Countersign) के बाद ही बैंक से भुगतान के लिए स्वीकार किए जाएंगे।

हालांकि, इस राहत के तुरंत बाद शुक्रवार को बिधाननगर साइबर पुलिस ने 12 अतिरिक्त बैंक खातों को भी फ्रीज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी, जिससे पार्टी की वित्तीय गतिविधियां और प्रभावित हो गई हैं।

कितनी राशि पर लगी रोक?

पुलिस सूत्रों के अनुसार, पहले चरण में फ्रीज किए गए तीन खातों और अब फ्रीज किए गए 12 खातों को मिलाकर 15 बैंक खातों में जमा राशि 1000 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है।

जांच एजेंसियों का कहना है कि शुरुआती खातों के लेनदेन की जांच के दौरान मिले सुरागों के आधार पर अन्य खातों की भी जांच शुरू की गई, जिसके बाद एहतियात के तौर पर इन खातों से लेनदेन पर रोक लगा दी गई।

किस शिकायत के आधार पर हुई कार्रवाई?

पूरी कार्रवाई की शुरुआत तृणमूल कांग्रेस के बागी विधायक विश्वनाथ दास द्वारा दर्ज कराई गई एक एफआईआर से हुई। इसी शिकायत के आधार पर बिधाननगर साइबर थाना पुलिस ने जांच शुरू की थी।

जांच के दौरान पुलिस ने शिकायतकर्ता विधायक सहित ऋतब्रत बनर्जी खेमे के सात से अधिक विधायकों के बयान दर्ज किए हैं। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि पार्टी के बैंक खातों में कथित अनियमित या अवैध वित्तीय लेनदेन के संदेह का आधार क्या था।

पहले तीन खाते भी किए गए थे फ्रीज

जांच के शुरुआती चरण में पुलिस ने तृणमूल कांग्रेस के तीन बैंक खातों को फ्रीज किया था। बाद में इन्हीं खातों को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत फ्रीज कर दिया।

ईडी ने हाल ही में कोलकाता और आसपास के पांच ठिकानों पर छापेमारी के बाद दावा किया था कि एक निजी बैंक में मौजूद पार्टी के तीन खातों में 440 करोड़ 42 लाख रुपये जमा हैं। एजेंसी ने PMLA की धारा 17(1A) के तहत इन खातों में लेनदेन पर रोक लगा दी।

तीन वरिष्ठ नेताओं से पूछताछ की तैयारी

ईडी सूत्रों के अनुसार, जिन तीन खातों को एजेंसी ने फ्रीज किया है, उनमें से एक खाते के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता तृणमूल कांग्रेस के दो सांसद हैं। अन्य दो खातों के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं में एक पूर्व सांसद और एक पूर्व मंत्री शामिल हैं।

जांच एजेंसी इन तीनों नेताओं को जल्द पूछताछ के लिए समन भेज सकती है। हालांकि, अभी तक ईडी की ओर से आधिकारिक रूप से किसी तिथि की घोषणा नहीं की गई है।

हाई कोर्ट पहुंची तृणमूल कांग्रेस

बैंक खाते फ्रीज किए जाने के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस ने एक बार फिर कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

शुक्रवार को न्यायमूर्ति कृष्णा राव की अदालत में पार्टी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता किशोर दत्ता ने मामले का उल्लेख करते हुए तत्काल सुनवाई की अनुमति मांगी। अदालत ने याचिका दाखिल करने की अनुमति दे दी। मामले की सुनवाई सोमवार को होने की संभावना है।

पार्टी ने अदालत को बताया कि जिन तीन खातों को राज्य पुलिस ने फ्रीज किया था, उन्हें लेकर हाई कोर्ट पहले ही अंतरिम राहत दे चुका है। इसके बावजूद ईडी ने उन्हीं खातों को PMLA के तहत फ्रीज कर दिया, जिससे पार्टी के नियमित वित्तीय कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

पहले क्या आदेश दिया था हाई कोर्ट ने?

गुरुवार को न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की पीठ ने आदेश दिया था कि फ्रीज किए गए तीन खातों का संचालन पूरी तरह बंद नहीं रहेगा।

अदालत ने निर्देश दिया कि खातों से भुगतान तभी किया जा सकेगा जब अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं में से किसी भी दो के हस्ताक्षर वाले चेक पर अदालत द्वारा नियुक्त विशेष अधिकारी भी प्रति-हस्ताक्षर करेंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य पार्टी के दैनिक प्रशासनिक और संगठनात्मक खर्चों को जारी रखना था।

जांच का दायरा बढ़ा

बिधाननगर साइबर पुलिस अब शुरुआती तीन खातों से जुड़े वित्तीय लेनदेन के आधार पर अन्य बैंक खातों की भी जांच कर रही है। इसी कारण 12 अतिरिक्त खातों को फ्रीज किया गया है। जांच एजेंसियां बैंकिंग रिकॉर्ड, धन के स्रोत, लेनदेन के पैटर्न और संबंधित दस्तावेजों की जांच कर रही हैं।

राजनीतिक और कानूनी असर

यह मामला पश्चिम बंगाल की राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह सीधे राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी के वित्तीय संचालन से जुड़ा है। एक ओर पुलिस और ईडी जांच को आगे बढ़ा रही हैं, वहीं दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस अदालत में राहत की मांग कर रही है।

फिलहाल, 1000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वाले कई बैंक खातों पर रोक जारी है। अब सभी की नजरें कलकत्ता हाई कोर्ट की अगली सुनवाई और जांच एजेंसियों की आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।