कुशीनगर में नारायणी नदी का बढ़ा कहर, बांध और ठोकरों पर बढ़ा दबाव; कई गांव पानी से घिरे, दियारा क्षेत्र में आवागमन प्रभावित

कुशीनगर में नारायणी नदी का बढ़ा कहर, बांध और ठोकरों पर बढ़ा दबाव; कई गांव पानी से घिरे, दियारा क्षेत्र में आवागमन प्रभावित

 मानसून के बीच कुशीनगर जिले में नारायणी नदी का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का खतरा एक बार फिर मंडराने लगा है। नदी की तेज धारा के कारण बांधों और सुरक्षा संरचनाओं पर दबाव बढ़ गया है। नदी किनारे बसे ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। कई गांवों में पानी घुसने की स्थिति बन गई है, जबकि दियारा क्षेत्र में रहने वाले लोगों का संपर्क प्रभावित हो रहा है।

नारायणी नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण एपी बांध, ठोकरों (स्पर) और संवेदनशील स्थानों पर कटाव का खतरा बढ़ गया है। प्रशासन और बाढ़ विभाग की टीमें लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

नारायणी की तेज धारा से बांध पर बढ़ा दबाव

कुशीनगर के तरयासुजान क्षेत्र में नारायणी नदी की तेज धारा ने बांधों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

बीरवट कोन्हवलिया के सामने एपी बांध के किनारे कट एंड टू ठोकर के पास नदी का दबाव बढ़ने की सूचना के बाद अभियंताओं की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति का निरीक्षण किया।

अधिकारियों ने नदी की तेज धारा और पानी के बढ़ते दबाव की जानकारी उच्च अधिकारियों को दी है।

बताया जा रहा है कि इस संवेदनशील क्षेत्र में पिछले वर्ष बनाया गया एप्रन (सुरक्षा संरचना) का करीब 50 मीटर हिस्सा नदी की तेज धारा में बह चुका है।

1.21 लाख क्यूसेक पानी बढ़ने से बढ़ी चिंता

जानकारी के अनुसार, शुक्रवार शाम करीब 5 बजे नारायणी नदी में पानी का बहाव बढ़ने के बाद बांध और स्पर पर दबाव महसूस किया गया।

करीब 1.21 लाख क्यूसेक पानी बढ़ने के बाद नदी की धारा ने सुरक्षा कार्यों को प्रभावित करना शुरू कर दिया।

कट एंड टू के पास बनाया गया एप्रन पानी में डूब गया है, जिससे कटाव की आशंका बढ़ गई है।

बाढ़ विभाग की टीम लगातार नदी के बहाव और बांध की स्थिति की निगरानी कर रही है।

ग्रामीणों में डर, कई बस्तियां पानी से घिरीं

नदी के बढ़ते जलस्तर का असर आसपास के गांवों पर दिखाई देने लगा है।

ग्रामीणों के अनुसार:

जवही दयाल की मुसहर टोली में पानी भरने की स्थिति बन रही है।
ततवा टोला भी पानी से घिर गया है।
अहिरौलीदान क्षेत्र के नोनिया टोला, कचहरी टोला और डीह टोला में भी खतरा बढ़ रहा है।
डाकुहवा टोला में भी पानी पहुंचने की जानकारी सामने आई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि समय रहते सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए तो स्थिति गंभीर हो सकती है।

बालू खनन को लेकर ग्रामीणों ने उठाए सवाल

ग्रामीणों ने नारायणी नदी के बदलते रुख के लिए बालू खनन को भी जिम्मेदार बताया है।

उनका आरोप है कि नदी की प्राकृतिक धारा में बदलाव के कारण पानी अब सीधे बांध की ओर दबाव बना रहा है।

हालांकि इस संबंध में प्रशासनिक स्तर पर जांच या आधिकारिक पुष्टि की जानकारी सामने नहीं आई है।

कई स्वीकृत परियोजनाएं अधूरी, ग्रामीणों की बढ़ी चिंता

ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ सुरक्षा से जुड़े कई कार्य अभी तक पूरे नहीं हो पाए हैं।

उनका आरोप है कि यदि समय पर बांध मरम्मत और सुरक्षा कार्य पूरे हो जाते तो खतरा कम किया जा सकता था।

अहिरौलीदान क्षेत्र में अधूरे पड़े कार्यों का असर अब दिखाई देने लगा है।

नरवाजोत क्षेत्र में भी पुराने स्पर के अप और डाउन स्ट्रीम हिस्से में स्लोप पिचिंग का कार्य अधूरा बताया जा रहा है।

अधिकारियों ने कहा- फिलहाल खतरे की स्थिति नहीं

बाढ़ विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के कारण कुछ संवेदनशील स्थानों पर दबाव जरूर बना है, लेकिन फिलहाल किसी बड़े खतरे की स्थिति नहीं है।

एसडीओ दीप रतन सिंह ने बताया कि विभाग की टीम लगातार निगरानी कर रही है।

उन्होंने कहा कि जर्जर और कमजोर स्थानों पर विशेष नजर रखी जा रही है और आवश्यकता पड़ने पर तुरंत कदम उठाए जाएंगे।

रोहुआ नाला उफनाया, आठ गांवों का संपर्क प्रभावित

नारायणी नदी के बढ़ते जलस्तर के बीच दियारा क्षेत्र में स्थित रोहुआ नाला भी उफान पर है।

नाले में तेज बहाव के कारण ग्रामीणों का आवागमन प्रभावित हो गया है।

कुशीनगर और महराजगंज जिले के कई गांवों के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

प्रभावित गांवों में शामिल हैं:

कुशीनगर क्षेत्र:
बसंतपुर
शिवपुर
हरिहरपुर
नरायनपुर
मरिचहवा
महराजगंज क्षेत्र:
शिकारपुर
भोथहा
बसही
सोहगीबरवा

इन क्षेत्रों के ग्रामीणों का कहना है कि पानी बढ़ने के बाद पैदल चलना और दोपहिया वाहनों से निकलना भी जोखिम भरा हो गया है।

किसानों, छात्रों और मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी

रोहुआ नाला में पानी बढ़ने से सबसे अधिक परेशानी रोजमर्रा के कामों से जुड़े लोगों को हो रही है।

ग्रामीणों के अनुसार:

किसानों को खेतों तक पहुंचने में परेशानी हो रही है।
छात्रों को स्कूल जाने में दिक्कत हो रही है।
मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने में समस्या आ रही है।
बाजार और तहसील जाने का रास्ता प्रभावित हुआ है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था करने और जरूरत पड़ने पर नाव या वैकल्पिक रास्ते उपलब्ध कराने की मांग की है।

प्रशासन ने दिए निगरानी के निर्देश

मामले को लेकर एडीएम वैभव मिश्र ने कहा कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

उन्होंने बताया कि संबंधित विभागों को सतर्क रहने और आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई जा रही है।

बाढ़ से निपटने की तैयारी तेज

नारायणी नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने बाढ़ चौकियों और राहत व्यवस्था की तैयारियों पर ध्यान केंद्रित किया है।

बाढ़ की स्थिति में:

राहत एवं बचाव दल को सक्रिय किया जा सकता है।
प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक सामग्री पहुंचाई जाएगी।
ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी।
नदी किनारे बसे लोगों में चिंता

हर साल मानसून के दौरान नारायणी नदी का बढ़ता जलस्तर कुशीनगर के सीमावर्ती इलाकों के लिए चुनौती बनता है।

इस बार भी नदी की तेज धारा, कटाव और अधूरे सुरक्षा कार्यों ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है।

फिलहाल प्रशासन का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन नदी के जलस्तर और बांधों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। आने वाले दिनों में बारिश और नदी के बहाव के आधार पर खतरे का स्तर तय होगा।