होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ा खतरा: भारत ने भारतीय नाविकों की नई तैनाती पर लगाई रोक, हमलों में 14 सीफेयरर्स की मौत के बाद बड़ा फैसला
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच भारत का एहतियाती कदम
मध्य-पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव और होर्मुज स्ट्रेट के आसपास लगातार बढ़ रहे सुरक्षा खतरे को देखते हुए भारत सरकार ने बड़ा एहतियाती कदम उठाया है। भारत ने अगले आदेश तक होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर भारतीय नाविकों (Indian Seafarers) की नई तैनाती पर रोक लगा दी है।
यह निर्देश डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग (DGS) की ओर से जारी किया गया है। आदेश के तहत जहाज मालिकों, शिप मैनेजमेंट कंपनियों और नाविकों की भर्ती करने वाली RPSL (Recruitment and Placement Services License) कंपनियों को खाड़ी क्षेत्र में अतिरिक्त सतर्कता बरतने को कहा गया है।
सरकार का कहना है कि यह फैसला भारतीय नाविकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। हालात सामान्य होने तक यह रोक जारी रहेगी।
होर्मुज स्ट्रेट क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है।
दुनिया के कुल तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी संकरे समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है। सऊदी अरब, ईरान, इराक, कुवैत, यूएई और कतर जैसे ऊर्जा उत्पादक देशों से निकलने वाला कच्चा तेल और गैस इसी रूट के जरिए दुनिया के बाजारों तक पहुंचती है।
किसी भी सैन्य तनाव या हमले का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, तेल कीमतों और समुद्री व्यापार पर पड़ता है।
भारतीय नाविकों की मौत के बाद लिया गया फैसला
भारत सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है जब होर्मुज स्ट्रेट और आसपास के समुद्री क्षेत्र में हमलों का खतरा बढ़ गया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस क्षेत्र में पिछले कुछ समय में हुए हमलों में कई भारतीय नाविकों की मौत हुई है। इनमें हाल के दिनों में हुए हमलों में मारे गए भारतीय सीफेयरर्स भी शामिल हैं।
बताया गया है कि 28 फरवरी से अब तक होर्मुज स्ट्रेट और आसपास के इलाकों में हुए हमलों में करीब 14 भारतीय नाविकों की जान जा चुकी है।
सरकार ने समुद्री कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे भारतीय नागरिकों को जोखिम वाले इलाकों में भेजने से पहले सुरक्षा स्थिति का गंभीर मूल्यांकन करें।
किन कंपनियों पर लागू होगा आदेश?
डायरेक्टर जनरल ऑफ शिपिंग के निर्देश मुख्य रूप से इन पर लागू होंगे:
जहाज मालिक कंपनियां
शिप मैनेजमेंट कंपनियां
भारतीय नाविकों की भर्ती करने वाली RPSL एजेंसियां
समुद्री संचालन से जुड़ी अन्य संस्थाएं
हालांकि, अगर कोई विदेशी कंपनी भारत के बाहर से नाविकों की भर्ती करती है, तो यह आदेश सीधे तौर पर उस पर लागू नहीं होगा।
कंपनियों को सुरक्षा नियमों के पालन के निर्देश
भारत सरकार ने समुद्री कंपनियों को कई सुरक्षा निर्देश जारी किए हैं।
इनमें शामिल हैं:
अरब की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट क्षेत्र में अतिरिक्त सतर्कता रखना।
अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा चेतावनियों पर लगातार नजर रखना।
जहाजों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना।
International Ship and Port Facility Security (ISPS) Code का पूरी तरह पालन करना।
किसी भी जोखिम की स्थिति में तुरंत संबंधित अधिकारियों को जानकारी देना।
सरकार ने कहा है कि नाविकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भारी कमी
तनाव बढ़ने के बाद इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में गिरावट देखी गई है।
समुद्री डेटा कंपनी केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, बुधवार को होर्मुज स्ट्रेट से केवल 9 जहाज गुजरे, जबकि इससे पहले यह संख्या 13 थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान बड़े कच्चे तेल टैंकर और LNG जहाजों की आवाजाही बेहद सीमित रही।
कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां भी सुरक्षा कारणों से इस रूट का इस्तेमाल करने से बच रही हैं।
अमेरिका-ईरान तनाव से बिगड़े हालात
होर्मुज संकट की मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव है।
हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच हमले और जवाबी कार्रवाई तेज हुई है।
अमेरिका ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है, जबकि ईरान ने भी अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों का दावा किया है।
ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर उसके खिलाफ हमले जारी रहे तो वह मध्य-पूर्व के रणनीतिक ठिकानों को निशाना बना सकता है।
ईरान की चेतावनी- मिडिल ईस्ट के इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाएंगे
ईरानी सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल इब्राहिम जोल्फाघरी ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ईरान के महत्वपूर्ण ढांचों पर हमला करता है तो जवाबी कार्रवाई में मध्य-पूर्व के रणनीतिक इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया जा सकता है।
ईरान का कहना है कि वह अपनी सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए हर विकल्प खुला रखेगा।
हालांकि, ईरानी अधिकारियों ने यह भी कहा है कि उनका अपने पड़ोसी देशों से टकराव का कोई इरादा नहीं है।
अमेरिका ने ईरान पर एयरस्ट्राइक का किया दावा
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने दावा किया है कि उसने ईरान के खिलाफ नए दौर की एयरस्ट्राइक की है।
अमेरिका के अनुसार, हमलों में:
कमांड सेंटर
एयर डिफेंस सिस्टम
मिसाइल क्षमता
ड्रोन ठिकाने
तटीय निगरानी केंद्र
को निशाना बनाया गया।
अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करने के उद्देश्य से की गई।
ईरान ने अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन हमले का दावा किया
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने दावा किया है कि उसने कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।
ईरानी सेना के मुताबिक, ड्रोन और मिसाइल हमलों के जरिए अमेरिकी सैन्य सुविधाओं को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई।
हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
पाकिस्तान ने बातचीत की पेशकश की
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच बातचीत शुरू कराने की इच्छा जताई है।
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि सैन्य टकराव के बजाय कूटनीतिक समाधान की दिशा में प्रयास किए जाने चाहिए।
इससे पहले भी कई देश दोनों पक्षों के बीच तनाव कम करने की कोशिश कर चुके हैं।
वैश्विक व्यापार और भारत पर क्या असर?
होर्मुज स्ट्रेट में तनाव का असर भारत समेत पूरी दुनिया पर पड़ सकता है।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी देशों से बड़े पैमाने पर तेल आयात करता है। यदि यह समुद्री मार्ग लंबे समय तक प्रभावित होता है तो:
कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं।
परिवहन लागत बढ़ सकती है।
वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है।
समुद्री बीमा खर्च बढ़ सकता है।
इसके अलावा बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक समुद्री क्षेत्र में काम करते हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा भी बड़ी चिंता बनी हुई है।
भारत ने अपनाया सतर्क रुख
भारत सरकार ने फिलहाल सीधे किसी पक्ष का समर्थन करने के बजाय अपने नागरिकों और आर्थिक हितों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है।
भारतीय नाविकों की नई तैनाती पर रोक इसी सुरक्षा रणनीति का हिस्सा है।
सरकार लगातार क्षेत्रीय हालात पर नजर बनाए हुए है और स्थिति सामान्य होने के बाद ही आगे के फैसले लिए जाएंगे।
news desk MPcg