होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ा तनाव: ईरान का UAE के तेल टैंकरों पर मिसाइल हमला, एक भारतीय की मौत; अमेरिका ने 5 घंटे तक की जवाबी बमबारी

होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ा तनाव: ईरान का UAE के तेल टैंकरों पर मिसाइल हमला, एक भारतीय की मौत; अमेरिका ने 5 घंटे तक की जवाबी बमबारी


मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। होर्मुज स्ट्रेट में कथित तौर पर ईरान द्वारा संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के दो तेल टैंकरों पर मिसाइल हमला किए जाने के बाद हालात और गंभीर हो गए हैं। इस हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत होने तथा कई अन्य भारतीयों के घायल होने की खबर सामने आई है। इसके जवाब में अमेरिका ने ईरान के कई सैन्य और नौसैनिक ठिकानों पर लगभग पांच घंटे तक व्यापक सैन्य कार्रवाई करने का दावा किया है।

हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में कई दावों की स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। विभिन्न पक्षों की ओर से जारी बयानों और दावों की जांच जारी है।

होर्मुज स्ट्रेट में UAE के टैंकरों पर हमला

यूएई के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, 'मोंबासा' और 'अल बहिया' नामक दो तेल टैंकरों को होर्मुज स्ट्रेट में क्रूज मिसाइलों से निशाना बनाया गया। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक हमले में एक भारतीय नाविक की मौत हो गई, जबकि 6 भारतीयों सहित कुल 8 लोग घायल हुए हैं।

हमले के बाद समुद्री सुरक्षा एजेंसियों ने क्षेत्र में अलर्ट बढ़ा दिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय भी पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है।

भारत ने ईरान के उप राजदूत को किया तलब

भारतीय नाविक की मौत के बाद भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए ईरान के उप राजदूत को विदेश मंत्रालय (MEA) में तलब किया। सरकार ने भारतीय नागरिक की मौत पर गंभीर चिंता जताते हुए पूरे घटनाक्रम पर स्पष्टीकरण मांगा है।

विदेश मंत्रालय भारतीय दूतावासों के माध्यम से घायल भारतीय नागरिकों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने में जुटा है।

ईरान का दावा- बहरीन और जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर हमला

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने जवाबी कार्रवाई के तहत बहरीन और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।

IRGC के अनुसार—

बहरीन के अल-जुफैर नौसैनिक अड्डे और अमेरिकी फिफ्थ फ्लीट के ठिकाने पर मिसाइल एवं ड्रोन हमला किया गया।
जॉर्डन स्थित अमेरिकी एयरबेस पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं।
अभियान को "नस्र-2" नाम दिया गया है।

इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।

अमेरिका की बड़ी सैन्य कार्रवाई

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि उसने ईरान के कई सामरिक ठिकानों पर करीब पांच घंटे तक सैन्य अभियान चलाया।

अमेरिका के अनुसार जिन स्थानों को निशाना बनाया गया उनमें शामिल हैं—

बुशहर
चाबहार
जास्क
कोनार्क
अबू मूसा द्वीप
बंदर अब्बास

CENTCOM का दावा है कि इन हमलों में ईरान की—

तटीय रक्षा प्रणाली
मिसाइल लॉन्च साइट्स
ड्रोन बेस
नौसैनिक सुविधाएं
सैन्य लॉजिस्टिक्स नेटवर्क

को सटीक हथियारों से निशाना बनाया गया।

अमेरिका का कहना है कि उसका उद्देश्य होर्मुज क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय नौवहन की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

ट्रम्प का नया ऐलान- होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर 20% शुल्क

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने घोषणा की कि अमेरिका अब होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा करेगा और इसके बदले इस मार्ग से गुजरने वाले कार्गो जहाजों से 20 प्रतिशत सुरक्षा शुल्क लिया जाएगा।

ट्रम्प ने कहा कि—

अमेरिका वर्षों से इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा पर भारी खर्च कर रहा है।
अब सुरक्षा लागत की भरपाई जहाजों से वसूले जाने वाले शुल्क से की जाएगी।
ईरानी जहाजों और उनसे जुड़े व्यापार पर नई पाबंदियां लागू होंगी।
क्या अमेरिका कानूनी रूप से शुल्क वसूल सकता है?

अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका का प्रस्ताव कई कानूनी सवाल खड़े करता है।

मुख्य कारण—

संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून (UNCLOS) के तहत होर्मुज जैसे अंतरराष्ट्रीय जलडमरूमध्य में सभी देशों को निर्बाध आवाजाही का अधिकार प्राप्त है।
इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गेनाइजेशन (IMO) पहले भी ऐसे मार्गों पर एकतरफा टोल लगाने का विरोध कर चुका है।
कई अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा कदम अमेरिका की वर्षों पुरानी Freedom of Navigation नीति के विपरीत माना जा सकता है।
ब्राजील ने अमेरिका की योजना की आलोचना की

ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने ट्रम्प की योजना की आलोचना करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग पर एकतरफा शुल्क लगाना "समुद्री डकैती जैसा" कदम प्रतीत होता है।

उन्होंने कहा कि समुद्री सुरक्षा के नाम पर वैश्विक व्यापार पर अतिरिक्त बोझ डालना उचित नहीं है।

जॉर्डन का दावा- चार मिसाइलें मार गिराईं

जॉर्डन की सेना ने कहा कि उसने ईरान की ओर से दागी गई चार मिसाइलों को अपने हवाई क्षेत्र में ही इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया।

सेना के अनुसार किसी प्रकार के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली।

ईरान का दावा- अमेरिकी ड्रोन गिराया

ईरान के सरकारी प्रसारक IRIB के अनुसार IRGC ने होर्मुज स्ट्रेट के ऊपर उड़ रहे अमेरिकी MQ-1 ड्रोन को मार गिराया है।

हालांकि अमेरिकी रक्षा विभाग या व्हाइट हाउस ने इस दावे की पुष्टि नहीं की है।

ट्रम्प का दावा- ईरान की सैन्य क्षमता को भारी नुकसान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया कि हालिया हमलों में—

ईरान के 159 सैन्य जहाज नष्ट हुए।
लगभग 200 सैन्य विमान और रडार सिस्टम निष्क्रिय कर दिए गए।
हथियार निर्माण क्षमता का लगभग 84 प्रतिशत हिस्सा प्रभावित हुआ।

इन दावों की भी स्वतंत्र पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है।

रूस की गतिविधियों पर भी नजर

रिपोर्टों के अनुसार रूस का विशेष कमांड एयरक्राफ्ट Tu-214PU तेहरान पहुंचा है। यह विमान युद्ध अथवा परमाणु संकट के दौरान उच्च स्तरीय सैन्य कमांड और राष्ट्रपति के लिए मोबाइल कमांड सेंटर के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि रूस ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही घटी

शिप ट्रैकिंग एजेंसियों के अनुसार—

पिछले 24 घंटों में होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की संख्या पिछले लगभग दो महीनों में सबसे कम दर्ज की गई।
वैश्विक शिपिंग कंपनियां क्षेत्र में सुरक्षा जोखिम का पुनर्मूल्यांकन कर रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल

अमेरिका-ईरान तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई।

ब्रेंट क्रूड लगभग 3 प्रतिशत बढ़कर करीब 78 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया।
ऊर्जा बाजार में अस्थिरता के कारण वैश्विक महंगाई पर भी दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
वैश्विक चिंता बढ़ी

विश्लेषकों का कहना है कि यदि दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई का दायरा और बढ़ता है तो इसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा। होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया के बड़े हिस्से की तेल आपूर्ति गुजरती है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का सैन्य टकराव वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है।