ममता बनर्जी को एक और बड़ा झटका! टीएमसी की राज्यसभा सांसद कोयल मल्लिक ने दिया इस्तीफा, बंगाल की राजनीति में बढ़ी हलचल
पश्चिम बंगाल की राजनीति में गुरुवार को एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जिसने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की राजनीतिक चुनौतियों को और बढ़ा दिया है। पार्टी की राज्यसभा सांसद और प्रसिद्ध अभिनेत्री कोयल मल्लिक (रूक्मिणी मल्लिक) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने नई दिल्ली में उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन से मुलाकात कर औपचारिक रूप से अपना इस्तीफा सौंपा। इस घटनाक्रम के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
कोयल मल्लिक का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब हालिया विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को सत्ता से बाहर होना पड़ा है। चुनावी हार के बाद पार्टी के भीतर असंतोष, नेताओं की नाराजगी और लगातार हो रहे इस्तीफों ने संगठन के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। पिछले दो महीनों में यह चौथा मौका है जब टीएमसी का कोई राज्यसभा सांसद पार्टी छोड़ चुका है।
राज्यसभा की सदस्यता से दिया इस्तीफा
जानकारी के अनुसार, कोयल मल्लिक गुरुवार को संसद भवन पहुंचीं, जहां उन्होंने उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन से मुलाकात की। उन्होंने अपने हस्ताक्षरित इस्तीफे को सभापति को सौंप दिया। अब संवैधानिक प्रक्रिया के तहत इस्तीफे की जांच और स्वीकार किए जाने के बाद राज्यसभा की यह सीट रिक्त घोषित की जाएगी।
फिलहाल कोयल मल्लिक ने सार्वजनिक रूप से अपने इस्तीफे के पीछे की वजह नहीं बताई है। उन्होंने न तो मीडिया से बातचीत की और न ही सोशल मीडिया पर कोई विस्तृत बयान जारी किया। यही वजह है कि उनके इस फैसले को लेकर कई तरह की राजनीतिक अटकलें लगाई जा रही हैं।
इस्तीफे के तुरंत बाद भूपेंद्र यादव से मुलाकात
राजनीतिक हलकों में सबसे ज्यादा चर्चा उस मुलाकात की हो रही है, जो इस्तीफा देने के तुरंत बाद कोयल मल्लिक ने केंद्रीय मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता भूपेंद्र यादव से की।
सूत्रों के अनुसार, कोयल मल्लिक दिल्ली स्थित भूपेंद्र यादव के आवास पर पहुंचीं और दोनों नेताओं के बीच काफी देर तक बातचीत हुई। हालांकि इस मुलाकात के विषय में किसी भी पक्ष की ओर से आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है, लेकिन इससे यह अटकलें तेज हो गई हैं कि कोयल मल्लिक जल्द भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो सकती हैं।
यदि ऐसा होता है तो यह बंगाल की राजनीति में भाजपा के लिए एक और बड़ी सफलता मानी जाएगी।
दो महीने में चौथा बड़ा झटका
कोयल मल्लिक का इस्तीफा कोई अकेली घटना नहीं है। इससे पहले भी पिछले दो महीनों में तृणमूल कांग्रेस के तीन अन्य राज्यसभा सांसद पार्टी छोड़ चुके हैं।
इनमें प्रमुख नाम हैं—
सुखेंदु शेखर राय
सुष्मिता देव
प्रकाश चिक बराइक
इन तीनों नेताओं ने पहले राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा दिया और बाद में भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली। इसके बाद भाजपा ने इन्हें राज्यसभा की रिक्त सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए उम्मीदवार भी बनाया।
बंगाल विधानसभा में मौजूदा राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए माना जा रहा है कि इन उम्मीदवारों की जीत लगभग तय है।
ऐसे में कोयल मल्लिक का इस्तीफा टीएमसी के लिए संगठनात्मक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चिंता बढ़ाने वाला माना जा रहा है।
चुनावी हार के बाद संगठन में बढ़ी बेचैनी
हालिया विधानसभा चुनाव में सत्ता गंवाने के बाद तृणमूल कांग्रेस लगातार आंतरिक चुनौतियों का सामना कर रही है। पार्टी के कई वरिष्ठ नेता भविष्य की राजनीति को लेकर नए विकल्प तलाशते दिखाई दे रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सत्ता से बाहर होने के बाद किसी भी दल में असंतोष बढ़ना स्वाभाविक होता है। लेकिन लगातार हो रहे इस्तीफे यह संकेत भी दे रहे हैं कि टीएमसी को अपने संगठन को दोबारा मजबूत करने के लिए गंभीर रणनीति अपनानी होगी।
पार्टी नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती वरिष्ठ नेताओं और जनप्रतिनिधियों को एकजुट बनाए रखने की होगी।
अभिनेत्री से सांसद तक का सफर
कोयल मल्लिक बंगाली फिल्म उद्योग की चर्चित अभिनेत्री रही हैं। अभिनय के क्षेत्र में लोकप्रियता हासिल करने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और तृणमूल कांग्रेस ने उन्हें राज्यसभा भेजा।
राज्यसभा में उन्होंने विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और महिला सशक्तिकरण से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी। हालांकि उनका राजनीतिक कार्यकाल अपेक्षाकृत छोटा रहा, लेकिन उनके इस्तीफे ने राष्ट्रीय राजनीति का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
भाजपा की रणनीति को मिल सकती है मजबूती
यदि कोयल मल्लिक भाजपा में शामिल होती हैं, तो इससे पार्टी को पश्चिम बंगाल में एक लोकप्रिय महिला चेहरा मिलेगा। भाजपा लंबे समय से बंगाल में अपने संगठन का विस्तार करने और प्रभावशाली नेताओं को साथ जोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि फिल्म जगत से जुड़े लोकप्रिय चेहरों का चुनावी राजनीति में प्रभाव पड़ता है, खासकर शहरी और युवा मतदाताओं के बीच।
क्या कहती है संवैधानिक प्रक्रिया?
राज्यसभा सदस्य के इस्तीफे के बाद सबसे पहले सभापति यह सुनिश्चित करते हैं कि इस्तीफा स्वेच्छा से दिया गया है और उस पर किसी प्रकार का दबाव नहीं है। इसके बाद इस्तीफा स्वीकार किया जाता है।
यदि इस्तीफा स्वीकार हो जाता है, तो सीट रिक्त घोषित होती है और निर्वाचन आयोग निर्धारित समय के भीतर उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू करता है।
टीएमसी के सामने बढ़ती राजनीतिक चुनौती
लगातार हो रहे इस्तीफों ने तृणमूल कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति को कठिन बना दिया है। विपक्ष इन घटनाओं को पार्टी में बढ़ती असंतुष्टि का प्रमाण बता रहा है, जबकि टीएमसी नेतृत्व अभी तक इन इस्तीफों पर विस्तृत प्रतिक्रिया देने से बचता रहा है।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या कोयल मल्लिक भाजपा में शामिल होती हैं या किसी अन्य राजनीतिक भूमिका में नजर आती हैं। साथ ही यह भी देखने वाली बात होगी कि ममता बनर्जी इस राजनीतिक संकट से निपटने के लिए संगठनात्मक स्तर पर क्या कदम उठाती हैं।
प्रमुख बिंदु
टीएमसी की राज्यसभा सांसद कोयल मल्लिक ने अपने पद से इस्तीफा दिया।
उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा सभापति सी.पी. राधाकृष्णन को सौंपा इस्तीफा।
इस्तीफे के बाद केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात ने राजनीतिक अटकलें तेज कर दीं।
दो महीने में टीएमसी के चार राज्यसभा सांसद पार्टी छोड़ चुके हैं।
पहले इस्तीफा देने वाले तीन सांसद भाजपा में शामिल हो चुके हैं।
बंगाल विधानसभा चुनाव में सत्ता गंवाने के बाद टीएमसी के सामने संगठनात्मक चुनौतियां बढ़ी हैं।
फिलहाल कोयल मल्लिक ने अपने इस्तीफे के कारणों या भविष्य की राजनीतिक रणनीति पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
राज्यसभा की सीट रिक्त होने के बाद निर्वाचन आयोग आगे की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी करेगा।
news desk MPcg