किन्नौर में बड़ा हादसा: सतलुज नदी में गिरा 190 फीट लंबा बैली ब्रिज, ओवरलोड डंपर सहित ढांचा धंसा; ड्राइवर बाल-बाल बचा

किन्नौर में बड़ा हादसा: सतलुज नदी में गिरा 190 फीट लंबा बैली ब्रिज, ओवरलोड डंपर सहित ढांचा धंसा; ड्राइवर बाल-बाल बचा

हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में मंगलवार सुबह एक बड़ा हादसा हो गया। सतलुज नदी पर बना लगभग 190 फीट लंबा बैली ब्रिज अचानक टूटकर नदी में गिर गया। इस दौरान पुल पर से गुजर रहा एक ओवरलोड डंपर भी सीधे नदी में समा गया। हालांकि, राहत की बात यह रही कि डंपर चालक को स्थानीय लोगों ने समय रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया और उसे मामूली चोटें आईं।

यह घटना सुबह करीब 11 बजे उर्नी क्षेत्र में हुई, जो भूस्खलन के लिए संवेदनशील माना जाता है। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और कुछ समय के लिए आवाजाही प्रभावित हो गई।

ओवरलोड डंपर को बताया जा रहा कारण

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि डंपर में क्षमता से अधिक भारी माल, संभवतः रेत, लोड था। इसी ओवरलोडिंग के कारण पुल पर अत्यधिक दबाव पड़ा और संरचना अचानक टूट गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जैसे ही डंपर पुल के बीच पहुंचा, पुल के एक हिस्से में कंपन महसूस हुआ और कुछ ही सेकंड में पूरा ढांचा धंसकर सतलुज नदी में गिर गया।

रेस्क्यू ऑपरेशन और प्रशासन की कार्रवाई

हादसे की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोग तुरंत मौके पर पहुंचे और डंपर चालक को सुरक्षित बाहर निकाला। इसके बाद पुलिस, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और लोक निर्माण विभाग (PWD) की टीमें भी मौके पर पहुंच गईं।

अधिकारियों ने घटनास्थल को घेरकर जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाया जा रहा है कि पुल की संरचना में कोई तकनीकी खराबी थी या फिर ओवरलोडिंग ही मुख्य कारण बनी।

रणनीतिक रूप से अहम था यह पुल

यह बैली ब्रिज उर्नी ढांक क्षेत्र में स्थित था, जो अक्सर भूस्खलन की घटनाओं के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग-5 पर बाधित रहता है। इसी कारण यह पुल एक वैकल्पिक मार्ग के रूप में उपयोग किया जा रहा था।

स्थानीय प्रशासन के अनुसार, इस पुल के टूटने के बावजूद राष्ट्रीय राजमार्ग-5 पर वाहनों की आवाजाही पर बड़ा असर नहीं पड़ा है। शिमला, रामपुर, रिकांग पिओ, काजा और सांगला घाटी की ओर जाने वाला ट्रैफिक सामान्य रूप से जारी है।

जांच के आदेश, तकनीकी खामियों की भी जांच संभव

प्रशासन ने पुल गिरने की घटना को गंभीरता से लिया है। NHAI और PWD के अधिकारी संयुक्त रूप से यह जांच कर रहे हैं कि क्या पुल के रखरखाव में कोई लापरवाही हुई थी या यह पूरी तरह से ओवरलोड वाहन के कारण हुआ हादसा है।

विशेषज्ञ टीम पुल के अवशेषों का अध्ययन कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि संरचना में किसी प्रकार की कमजोरी पहले से मौजूद थी या नहीं।

स्थानीय लोगों में चिंता

इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई है, क्योंकि पहाड़ी क्षेत्रों में ऐसे अस्थायी पुलों पर निर्भरता काफी अधिक होती है। ग्रामीणों का कहना है कि भारी वाहनों की आवाजाही पर सख्ती जरूरी है ताकि भविष्य में ऐसे हादसे न हों।

निष्कर्ष

किन्नौर में हुआ यह हादसा एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में यातायात सुरक्षा और ओवरलोडिंग नियंत्रण की गंभीरता को उजागर करता है। हालांकि बड़ा नुकसान टल गया, लेकिन पुल का टूटना प्रशासन के लिए एक चेतावनी माना जा रहा है कि संवेदनशील क्षेत्रों में संरचनात्मक सुरक्षा मानकों को और मजबूत करने की आवश्यकता है।