नोएडा में ‘ओजी’ गांजा तस्करी रैकेट का खुलासा: थाईलैंड से मंगाया जाता था नशा, चार युवक गिरफ्तार, कॉलेज छात्रों को बनाया जा रहा था निशाना

नोएडा में ‘ओजी’ गांजा तस्करी रैकेट का खुलासा: थाईलैंड से मंगाया जाता था नशा, चार युवक गिरफ्तार, कॉलेज छात्रों को बनाया जा रहा था निशाना

गौतमबुद्ध नगर पुलिस और एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने एक बड़े मादक पदार्थ तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए चार युवकों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि यह गिरोह विदेशी मूल के उच्च गुणवत्ता वाले गांजे, जिसे आमतौर पर ‘ओजी’ (OG Cannabis) कहा जाता है, की तस्करी कर उसे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में बेच रहा था। जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह कथित रूप से कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को अपना प्रमुख ग्राहक बना रहा था।

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 3.65 किलोग्राम गांजा, दो लग्जरी वाहन और चार लाख रुपये नकद बरामद किए हैं। मामले की जांच जारी है और पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश कर रही है।

खुफिया सूचना के आधार पर हुई कार्रवाई

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स को सूचना मिली थी कि गोरखपुर के रहने वाले कुछ युवक नोएडा में अपने सहयोगी को गांजे की बड़ी खेप पहुंचाने आने वाले हैं। सूचना मिलने के बाद ANTF और नॉलेज पार्क थाना पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाया।

यमुना एक्सप्रेसवे के जीरो प्वाइंट के पास बैरिकेडिंग लगाकर निगरानी शुरू की गई। इसी दौरान एक थार और बाद में एक स्कॉर्पियो वाहन मौके पर पहुंचे। पुलिस ने संदिग्ध गतिविधि देखते हुए दोनों वाहनों को घेर लिया और कार्रवाई करते हुए चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

कौन हैं गिरफ्तार आरोपी?

गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई है:

प्रणय पुष्प (21) – पटना, बिहार
युवराज चौधरी उर्फ नवीन (21) – गोरखपुर, उत्तर प्रदेश
शशांक शाही (19) – गोरखपुर, उत्तर प्रदेश
रोहन चौधरी (20) – उत्तर प्रदेश

पुलिस के अनुसार सभी आरोपी युवा हैं और कुछ आरोपी उच्च शिक्षा से भी जुड़े हुए बताए जा रहे हैं।

थाईलैंड कनेक्शन की जांच

प्रारंभिक पूछताछ में पुलिस को एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन का सुराग मिला है। जांच में सामने आया है कि आरोपी शशांक के परिवार के कुछ सदस्य थाईलैंड में रहते हैं और उनका वहां नियमित आना-जाना है।

पुलिस का दावा है कि इसी नेटवर्क का इस्तेमाल कर कथित रूप से विदेशी गुणवत्ता वाला गांजा भारत मंगाया जाता था। इसके बाद उसे एनसीआर क्षेत्र में ऊंचे दामों पर बेचा जाता था। फिलहाल जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि मादक पदार्थ भारत में किस माध्यम से पहुंच रहा था और इसमें कितने लोग शामिल हैं।

छात्रों को बनाया जा रहा था ग्राहक

जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली है कि गिरोह का मुख्य फोकस कॉलेज और विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले युवा छात्र थे। पुलिस का मानना है कि सोशल मीडिया, निजी संपर्कों और छात्र नेटवर्क के जरिए ग्राहकों तक पहुंच बनाई जा रही थी।

नशे के कारोबार में विदेशी या प्रीमियम गुणवत्ता वाले गांजे की मांग बढ़ने के कारण आरोपी इसे अधिक कीमत पर बेचकर भारी मुनाफा कमा रहे थे।

बरामदगी और आर्थिक पहलू

पुलिस ने आरोपियों के पास से:

3.65 किलोग्राम कथित ओजी गांजा
दो चार पहिया वाहन
4 लाख रुपये नकद

बरामद किए हैं।

अधिकारियों का मानना है कि नकदी नशे की बिक्री से अर्जित रकम हो सकती है। हालांकि इस संबंध में वित्तीय लेनदेन और बैंक खातों की भी जांच की जा रही है।

नेटवर्क के विस्तार की जांच

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि क्या यह गिरोह केवल नोएडा और दिल्ली-एनसीआर तक सीमित था या फिर इसका नेटवर्क अन्य राज्यों तक भी फैला हुआ है। मोबाइल फोन, डिजिटल रिकॉर्ड, सोशल मीडिया गतिविधियों और वित्तीय लेनदेन की जांच की जा रही है।

साथ ही यह भी जांच हो रही है कि क्या इस नेटवर्क के तार किसी बड़े अंतरराज्यीय या अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट से जुड़े हैं।

नशे के खिलाफ अभियान तेज

पिछले कुछ वर्षों में दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में सिंथेटिक ड्रग्स, गांजा और अन्य मादक पदार्थों की तस्करी के मामलों में वृद्धि देखी गई है। इसी को देखते हुए पुलिस और नारकोटिक्स एजेंसियां लगातार संयुक्त अभियान चला रही हैं।

अधिकारियों का कहना है कि युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने और ड्रग नेटवर्क को खत्म करने के लिए ऐसे अभियानों को आगे भी जारी रखा जाएगा। फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।