लखनऊ कोचिंग अग्निकांड: 15 मौतों के बाद योगी सरकार का बड़ा एक्शन, 3 गिरफ्तार, 4 अधिकारी सस्पेंड; SIT करेगी जांच

लखनऊ कोचिंग अग्निकांड: 15 मौतों के बाद योगी सरकार का बड़ा एक्शन, 3 गिरफ्तार, 4 अधिकारी सस्पेंड; SIT करेगी जांच

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में स्थित एक कोचिंग संस्थान में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इस दर्दनाक हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए। घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तत्काल कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों की गिरफ्तारी, चार अधिकारियों के निलंबन और उच्चस्तरीय एसआईटी जांच के आदेश दिए हैं।

हादसे के बाद मुख्यमंत्री स्वयं घटनास्थल पर पहुंचे, राहत एवं बचाव कार्यों का जायजा लिया और बाद में केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर जाकर घायलों से मुलाकात की। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर सख्त कार्रवाई की जाए।

15 लोगों की मौत, कई घायल

रविवार को अलीगंज स्थित एक बहुमंजिला इमारत में संचालित कोचिंग संस्थान में अचानक आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि भवन के अंदर मौजूद कई लोग बाहर नहीं निकल सके। बचाव दल ने मौके पर पहुंचकर लोगों को निकालने का प्रयास किया, लेकिन तब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी थी।

घायलों को तत्काल किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया। ट्रॉमा सेंटर प्रशासन के अनुसार कुल 22 लोगों को अस्पताल लाया गया था, जिनमें 15 को मृत घोषित किया गया जबकि अन्य का इलाज जारी है।

मुख्यमंत्री योगी ने रद्द किए सभी कार्यक्रम

हादसे की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपना निर्धारित आगरा, हाथरस और अलीगढ़ दौरा रद्द कर दिया और सीधे लखनऊ पहुंचे। घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस हादसे की जिम्मेदारी तय की जाएगी और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने पुलिस महानिदेशक और गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

तीन आरोपी गिरफ्तार

सरकार की प्रारंभिक कार्रवाई के तहत तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों में शामिल हैं:

रामकृष्ण उपाध्याय
वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला
तुषॉक कृष्णा जायसवाल

पुलिस ने इनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि भवन के संचालन, सुरक्षा व्यवस्था और अग्नि सुरक्षा मानकों के पालन में किस स्तर पर लापरवाही हुई।

चार अधिकारियों पर गिरी गाज

मुख्यमंत्री के निर्देश पर चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

निलंबित अधिकारियों में शामिल हैं:

गौरव कुमार, अधिशासी अभियंता (एक्सईएन), जानकीपुरम, बिजली विभाग
कमलेंद्र कुमार सिंह, अग्निशमन अधिकारी, इंदिरा नगर
अनिल कुमार, सहायक अभियंता (एई), लखनऊ विकास प्राधिकरण
प्रमोद पांडे, कनिष्ठ अभियंता (जेई), लखनऊ विकास प्राधिकरण

सरकार का मानना है कि प्रारंभिक स्तर पर प्रशासनिक लापरवाही की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

सात दिन में रिपोर्ट देगी एसआईटी

मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। इस जांच टीम में:

अमृत प्रमुख, अपर मुख्य सचिव
प्रवीण कुमार, अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी), लखनऊ जोन

को शामिल किया गया है।

एसआईटी को सात दिनों के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। जांच में भवन निर्माण, संचालन अनुमति, सुरक्षा मानकों और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे सभी पहलुओं को शामिल किया जाएगा।

इमरजेंसी एग्जिट नहीं होने का आरोप

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि भवन में पर्याप्त आपातकालीन निकास (इमरजेंसी एग्जिट) की व्यवस्था नहीं थी। प्रत्यक्षदर्शियों और सूत्रों के अनुसार आग लगने के बाद कई लोग भवन के भीतर फंस गए और बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिल सका।

एक पीड़ित के परिजनों ने बताया कि भवन के कुछ कार्यालयों में बायोमेट्रिक और ऑटोमैटिक लॉकिंग सिस्टम लगे हुए थे, जिससे आग लगने के बाद लोगों को बाहर निकलने में भारी कठिनाई हुई।

भवन अनुमति और सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल

हादसे के बाद कई गंभीर सवाल सामने आए हैं:

क्या भवन को व्यावसायिक उपयोग की अनुमति प्राप्त थी?
क्या लखनऊ विकास प्राधिकरण ने भवन का नियमित निरीक्षण किया था?
क्या भवन में अग्नि सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम थे?
क्या किसी विभाग ने पूर्व में नोटिस जारी किया था?
यदि अनियमितताएं थीं तो भवन को सील क्यों नहीं किया गया?

इन सवालों के जवाब अब एसआईटी जांच के जरिए सामने आने की उम्मीद है।

फायर एनओसी को लेकर भी विवाद

उत्तर प्रदेश अग्निशमन विभाग का कहना है कि संबंधित इमारत तीन मंजिला थी और वर्तमान नियमों के अनुसार 15 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाली इमारतों को फायर विभाग की एनओसी की आवश्यकता होती है।

ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि यदि फायर एनओसी आवश्यक नहीं थी, तो क्या भवन के व्यावसायिक उपयोग और सुरक्षा मानकों की जांच अन्य संबंधित विभागों ने की थी।

मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे में जान गंवाने वाले प्रत्येक मृतक के परिजनों को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। वहीं घायलों को 50 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाएगी।

इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शोक व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (पीएमएनआरएफ) से मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये और घायलों को आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।

पूरे प्रदेश में सुरक्षा मानकों की समीक्षा के संकेत

लखनऊ अग्निकांड के बाद प्रदेश सरकार अब कोचिंग संस्थानों, शैक्षणिक परिसरों और व्यावसायिक भवनों की सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा कर सकती है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार आने वाले दिनों में बड़े स्तर पर निरीक्षण अभियान चलाए जाने की संभावना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह हादसा केवल एक इमारत की लापरवाही नहीं, बल्कि शहरी क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों के अनुपालन की बड़ी चुनौती को भी उजागर करता है। एसआईटी की रिपोर्ट आने के बाद इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना है।

फिलहाल पूरे प्रदेश की निगाहें एसआईटी जांच और सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।