जिम्स ग्रेटर नोएडा में आउटसोर्स कर्मचारियों की हड़ताल आठवें दिन भी जारी, वैकल्पिक व्यवस्था से संभाली गई ओपीडी; समाधान की राह अब भी दूर

जिम्स ग्रेटर नोएडा में आउटसोर्स कर्मचारियों की हड़ताल आठवें दिन भी जारी, वैकल्पिक व्यवस्था से संभाली गई ओपीडी; समाधान की राह अब भी दूर

उत्तर प्रदेश के प्रमुख सरकारी चिकित्सा संस्थानों में शामिल राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स), ग्रेटर नोएडा में आउटसोर्स कर्मचारियों की हड़ताल आठवें दिन भी जारी रही। कर्मचारियों और अस्पताल प्रशासन के बीच जारी गतिरोध का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है, हालांकि अस्पताल प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्थाओं के जरिए मरीजों को राहत देने का प्रयास किया है।

सोमवार को अस्पताल में दूसरे सरकारी अस्पतालों से नर्सिंग स्टाफ बुलाकर तथा नर्सिंग कॉलेज के विद्यार्थियों की सहायता से ओपीडी सेवाओं को सामान्य बनाए रखने की कोशिश की गई। इसके बावजूद कर्मचारियों और प्रबंधन के बीच विवाद का कोई स्थायी समाधान अभी तक सामने नहीं आया है।

15 जून से जारी है हड़ताल

जिम्स में आउटसोर्स कर्मचारियों ने 15 जून से हड़ताल शुरू की थी। कर्मचारियों का आरोप है कि उनकी विभिन्न मांगों पर लंबे समय से ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उनका कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

हड़ताल के चलते पिछले एक सप्ताह से अस्पताल की कई सेवाएं प्रभावित हुई हैं। विशेष रूप से नर्सिंग, तकनीकी और सहायक सेवाओं पर इसका असर देखने को मिला है।

ओपीडी सेवाओं को सामान्य रखने की कोशिश

अस्पताल प्रशासन के अनुसार मरीजों को परेशानी से बचाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। जिम्स के निदेशक डॉ. ब्रिगेडियर राकेश गुप्ता ने बताया कि पीजीआई और जिला अस्पताल से सहयोग लिया जा रहा है। बाहरी नर्सिंग स्टाफ और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की मदद से अस्पताल की सेवाओं को सुचारु रखने का प्रयास किया जा रहा है।

सोमवार को नर्सिंग कॉलेज के विद्यार्थियों को भी विभिन्न जिम्मेदारियां सौंपी गईं, जिसके चलते ओपीडी में मरीजों की संख्या फिर से बढ़ी। अस्पताल प्रशासन के अनुसार लगभग 1500 मरीजों का ओपीडी में परीक्षण किया गया, जो पिछले कुछ दिनों की तुलना में बेहतर स्थिति मानी जा रही है।

आईसीयू और सर्जरी सेवाएं बहाल करने की तैयारी

निदेशक डॉ. राकेश गुप्ता ने कहा कि अस्पताल को पहले की तरह पूरी क्षमता से संचालित करने के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि दूसरे सरकारी अस्पतालों से मिलने वाले सहयोग के आधार पर आईसीयू और सर्जरी सेवाओं को भी पूर्ण रूप से संचालित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।

अस्पताल प्रशासन का दावा है कि मरीजों की जान से जुड़े महत्वपूर्ण विभागों को प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा।

कर्मचारियों के आरोप और प्रशासन का पक्ष

हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें आंदोलन समाप्त करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। कुछ कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें नौकरी से हटाए जाने की चेतावनी भी दी जा रही है, जबकि सार्वजनिक रूप से यह कहा जा रहा है कि किसी को नहीं निकाला जाएगा।

हड़ताली कर्मचारियों का कहना है कि कई दौर की वार्ताओं के बावजूद उनकी मांगों पर ठोस सहमति नहीं बन सकी है।

वहीं अस्पताल प्रशासन का कहना है कि अधिकांश मांगों को मानने के लिए वह तैयार है। हालांकि कर्मचारियों की नियमित नियुक्ति या संविदा में समायोजन जैसी मांगें सीधे संस्थान के अधिकार क्षेत्र में नहीं आतीं और इसके लिए शासन स्तर पर निर्णय आवश्यक है।

2023 के आश्वासन का भी उठा मुद्दा

हड़ताली कर्मचारियों ने वर्ष 2023 में हुए आंदोलन का भी उल्लेख किया है। उनका कहना है कि उस समय भी कर्मचारियों को नौकरी सुरक्षा और अन्य मांगों को लेकर आश्वासन दिया गया था।

जिम्स प्रशासन का कहना है कि कर्मचारियों को आश्वस्त किया गया है कि उनकी मांगों का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जाएगा और उनके हितों की रक्षा के लिए प्रयास किए जाएंगे।

सुरक्षाकर्मियों की सुविधाओं की भी होगी जांच

हड़ताल के बीच अस्पताल के सुरक्षाकर्मियों की कार्य परिस्थितियों का मुद्दा भी सामने आया है। निदेशक डॉ. राकेश गुप्ता ने कहा कि मीडिया रिपोर्टों के माध्यम से जानकारी मिली है कि कुछ सुरक्षाकर्मियों को साप्ताहिक अवकाश नहीं मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि संबंधित एजेंसी से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी कर्मचारियों को नए श्रम कानूनों के तहत मिलने वाली सुविधाएं उपलब्ध हों।

एमआरआई सेवा फिर होगी शुरू

अस्पताल प्रशासन ने मरीजों के लिए राहत भरी जानकारी देते हुए बताया कि मंगलवार से एमआरआई मशीन दोबारा संचालित होने लगेगी। इससे मरीजों को जांच के लिए अन्य अस्पतालों का रुख नहीं करना पड़ेगा।

साथ ही प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ऑपरेशन या अन्य चिकित्सा प्रक्रियाओं के नाम पर यदि कोई शुल्क लिया जाता है तो उसकी वैध रसीद देना अनिवार्य होगा। बाहरी उपकरणों की खरीद पर भी पूरी पारदर्शिता रखी जाएगी।

राजनीतिक और किसान संगठनों के प्रवेश पर रोक

हड़ताल के दौरान राजनीतिक दलों और किसान संगठनों की सक्रियता भी देखने को मिली। सोमवार को समाजवादी पार्टी के नेता राहुल अवाना, छात्र सभा के जिलाध्यक्ष मोहित नागर और अन्य कार्यकर्ता कर्मचारियों से मिलने पहुंचे, लेकिन पुलिस ने उन्हें अस्पताल परिसर के प्रवेश द्वार पर ही रोक दिया।

बाद में उन्होंने हड़ताली कर्मचारियों से गेट पर ही बातचीत कर समर्थन का आश्वासन दिया।

इसी तरह भारतीय किसान यूनियन (सर छोटू राम) के पदाधिकारी भी कर्मचारियों से मिलने पहुंचे, लेकिन उन्हें भी अस्पताल परिसर में प्रवेश नहीं दिया गया। इस दौरान पुलिस और संगठन के पदाधिकारियों के बीच तीखी बहस हुई, जिसे बाद में सदर एसडीएम आशुतोष गुप्ता के हस्तक्षेप से शांत कराया गया।

प्रशासन को जल्द समाधान की उम्मीद

सदर एसडीएम आशुतोष गुप्ता ने कहा कि प्रशासन लगातार दोनों पक्षों से संवाद बनाए हुए है और समाधान निकालने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही वार्ता के माध्यम से विवाद समाप्त हो सकता है।

हालांकि कर्मचारियों का कहना है कि केवल आश्वासन से बात नहीं बनेगी और उन्हें लिखित तथा ठोस निर्णय चाहिए।

स्वास्थ्य सेवाओं पर बना हुआ है दबाव

जिम्स पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण सरकारी चिकित्सा संस्थानों में से एक है, जहां ग्रेटर नोएडा, नोएडा, बुलंदशहर, अलीगढ़, हाथरस और आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं।

ऐसे में यदि हड़ताल लंबी खिंचती है तो स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव और बढ़ सकता है। फिलहाल प्रशासन वैकल्पिक व्यवस्था के सहारे सेवाएं जारी रखे हुए है, लेकिन कर्मचारियों और प्रबंधन के बीच समझौता होने तक स्थिति पूरी तरह सामान्य होने की संभावना कम दिखाई दे रही है।