"क्या पूरी बिहार पुलिस इन्हीं की सुरक्षा में लगा दें?" लालू परिवार पर CM सम्राट का तीखा हमला, सुरक्षा और सरकारी बंगलों को लेकर उठाए सवाल

"क्या पूरी बिहार पुलिस इन्हीं की सुरक्षा में लगा दें?" लालू परिवार पर CM सम्राट का तीखा हमला, सुरक्षा और सरकारी बंगलों को लेकर उठाए सवाल

 बिहार की राजनीति में सोमवार को उस समय सियासी तापमान बढ़ गया, जब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में आयोजित भाजपा के अति पिछड़ा महासम्मेलन के मंच से राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार पर तीखा हमला बोला। मुख्यमंत्री ने सुरक्षा व्यवस्था, सरकारी आवास और संपत्तियों के मुद्दे को लेकर विपक्ष को घेरते हुए कहा कि आखिर लालू परिवार को और कितनी सुविधाएं चाहिए। उन्होंने तंज भरे अंदाज में सवाल किया कि क्या पूरी बिहार पुलिस को सिर्फ उनकी सुरक्षा में ही लगा दिया जाए।

अति पिछड़ा समाज के सम्मान और अभिनंदन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता केवल कुछ नेताओं की सुरक्षा नहीं, बल्कि बिहार के 13 करोड़ लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि राज्य की पुलिस जनता की सुरक्षा के लिए है और उसका संतुलित उपयोग जरूरी है।

सुरक्षा को लेकर विपक्ष पर निशाना

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की सुरक्षा में आज भी बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात हैं। उन्होंने दावा किया कि उनके आवासों पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध है, साथ ही बुलेटप्रूफ वाहन और अन्य आवश्यक सुविधाएं भी सरकार की ओर से दी गई हैं।

सम्राट चौधरी ने कहा, "आज भी बड़ी संख्या में पुलिस बल उनकी सुरक्षा में तैनात है। अगर पूरी पुलिस फोर्स को वहीं लगा दिया जाए तो बाकी बिहार के लोगों की सुरक्षा कौन करेगा?" मुख्यमंत्री का यह बयान सम्मेलन में मौजूद कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा का विषय बन गया।

सरकारी बंगले और संपत्तियों का भी किया जिक्र

मुख्यमंत्री ने लालू परिवार को सरकारी आवासों के मुद्दे पर भी घेरने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि विपक्ष के कुछ नेता सरकारी बंगलों को लेकर लगातार राजनीति कर रहे हैं, जबकि उनके पास पहले से कई निजी संपत्तियां मौजूद हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि परिवार के अलग-अलग सदस्यों के लिए अलग-अलग सरकारी आवास की मांग की जाती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता जानना चाहती है कि जिन लोगों के पास निजी मकान और अन्य संसाधन उपलब्ध हैं, वे सरकारी सुविधाओं को लेकर इतना विवाद क्यों खड़ा कर रहे हैं।

हालांकि मुख्यमंत्री ने अपने आरोपों के समर्थन में कोई आधिकारिक दस्तावेज सार्वजनिक मंच से प्रस्तुत नहीं किया, लेकिन उनके बयान ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।

'इतिहास का हिसाब होगा' बयान से बढ़ी राजनीतिक चर्चा

अपने भाषण के दौरान सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार के राजनीतिक इतिहास का मूल्यांकन किया जा रहा है और जनता अब पहले की तुलना में अधिक जागरूक है। उन्होंने कहा कि राज्य में किस दौर में क्या हुआ, जनता सब जानती है और समय आने पर हर बात का हिसाब होगा।

मुख्यमंत्री के इस बयान को विपक्ष के खिलाफ राजनीतिक हमले के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता विकास, सुशासन और कानून-व्यवस्था के आधार पर सरकारों का आकलन कर रही है।

अपराध मुक्त बिहार सरकार की प्राथमिकता

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार अपराध और भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही है। राज्य में कानून का राज स्थापित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

उन्होंने कहा कि अपराधियों के खिलाफ विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं और किसी भी स्तर पर अपराध के प्रति नरमी नहीं बरती जाएगी। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि सरकार युवाओं, महिलाओं और कमजोर वर्गों की सुरक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है।

अति पिछड़ा समाज को लेकर भाजपा का संदेश

अति पिछड़ा महासम्मेलन में मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा सरकार अति पिछड़ा वर्ग के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक विकास के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने दावा किया कि केंद्र और राज्य सरकार की कई योजनाओं का लाभ इस वर्ग तक पहुंचा है।

समारोह में नवनिर्वाचित विधान परिषद सदस्यों का सम्मान भी किया गया। कार्यक्रम में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय, केंद्रीय मंत्री राजभूषण निषाद, पूर्व केंद्रीय मंत्री राधामोहन सिंह समेत भाजपा के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।

चुनावी माहौल में तेज हुई बयानबाजी

बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है। अति पिछड़ा महासम्मेलन में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का लालू परिवार पर किया गया हमला इसी सियासी संघर्ष का हिस्सा माना जा रहा है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अति पिछड़ा वर्ग बिहार की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाता है। ऐसे में इस वर्ग को साधने के लिए भाजपा और विपक्षी दलों के बीच बयानबाजी और राजनीतिक गतिविधियां आने वाले महीनों में और तेज हो सकती हैं। अब सबकी नजर राजद और लालू परिवार की प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है।