शिवसेना में फिर बढ़ा टकराव उद्धव गुट के 6 सांसदों के शिंदे खेमे में जाने की चर्चा, दिल्ली बैठक में भी नहीं पहुंचे नेता
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। शिवसेना के दोनों धड़ों—उद्धव ठाकरे गुट और एकनाथ शिंदे गुट—के बीच चल रही खींचतान एक नए राजनीतिक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है।
सूत्रों के अनुसार, उद्धव ठाकरे गुट के करीब 6 सांसदों के किसी भी समय शिंदे खेमे में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि इस पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे लेकर चर्चाएं तेज हैं।
दिल्ली बैठक से दूरी ने बढ़ाई अटकलें
सूचना के अनुसार, हाल ही में दिल्ली में उद्धव ठाकरे गुट की एक अहम बैठक बुलाई गई थी, जिसका उद्देश्य इन सांसदों को एकजुट रखना था। लेकिन चर्चा में रहे ये सांसद बैठक में शामिल नहीं हुए, जिससे राजनीतिक अटकलों को और बल मिला है।
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि यह अनुपस्थिति संगठन के भीतर बढ़ती असहमति और अस्थिरता का संकेत हो सकती है।
60 साल के जश्न के बीच बढ़ा टकराव
शिवसेना की स्थापना के 60 वर्ष पूरे होने के अवसर पर दोनों गुटों ने अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए। इस दौरान राजनीतिक बयानबाजी भी तेज रही और दोनों खेमों के बीच तनाव खुलकर सामने आया।
इसी बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कोल्हापुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा कि “अब कोई अलग गुट नहीं बचा है,” जिससे राजनीतिक हलकों में नई बहस शुरू हो गई है।
शिंदे गुट का बढ़ता प्रभाव
2022 में हुए बड़े राजनीतिक विभाजन के बाद शिवसेना दो हिस्सों में बंट गई थी, जिसके बाद चुनाव आयोग की मान्यता भी शिंदे गुट के पक्ष में गई थी।
इसके बाद से एकनाथ शिंदे गुट राज्य की सत्ता में मजबूत स्थिति में है, जबकि उद्धव ठाकरे गुट लगातार अपने विधायकों और सांसदों को बनाए रखने की चुनौती का सामना कर रहा है।
उद्धव गुट पर दबाव बढ़ा
उद्धव गुट के वरिष्ठ नेता संजय राउत लगातार शिंदे गुट पर तीखे हमले कर रहे हैं। उन्होंने पहले भी बागी नेताओं को “गद्दार” करार दिया था।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा हालात में दोनों गुटों के बीच टकराव और गहराता जा सकता है, खासकर जब लोकसभा और राज्य स्तर पर शक्ति संतुलन बदल रहा है।
आगे क्या
अगर 6 सांसदों के शिंदे गुट में जाने की बात सही साबित होती है, तो यह उद्धव ठाकरे खेमे के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका होगा। वहीं शिंदे गुट की स्थिति और मजबूत हो सकती है।
हालांकि फिलहाल यह पूरा मामला चर्चाओं और अटकलों के स्तर पर है और किसी भी पक्ष ने आधिकारिक बयान नहीं दिया है।
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