बिहार-बंगाल सीमा पर अवैध शराब कारोबार पर शिकंजा, लाइसेंसी दुकानों तक सीमित हुई बिक्री

बिहार-बंगाल सीमा पर अवैध शराब कारोबार पर शिकंजा, लाइसेंसी दुकानों तक सीमित हुई बिक्री

बिहार और पश्चिम बंगाल की सीमा पर वर्षों से सक्रिय अवैध शराब कारोबार पर अब प्रशासन का शिकंजा कसता नजर आ रहा है। सीमावर्ती क्षेत्रों में पुलिस और उत्पाद विभाग द्वारा चलाए जा रहे विशेष अभियान के चलते खुलेआम होने वाली शराब बिक्री पर काफी हद तक रोक लग गई है। अधिकारियों के अनुसार अब केवल लाइसेंसी बार और अधिकृत दुकानों से ही शराब की बिक्री की अनुमति दी जा रही है।

सीमावर्ती इलाकों में पिछले एक महीने से चल रही लगातार कार्रवाई का असर जमीनी स्तर पर दिखाई देने लगा है। होटल, ढाबों और छोटी दुकानों के माध्यम से होने वाला अवैध कारोबार लगभग ठप पड़ गया है, जिससे बिहार में शराब की तस्करी पर भी प्रभाव पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

सीमावर्ती बाजारों में था समानांतर नेटवर्क

जानकारों के अनुसार, बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू होने के बाद पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाकों में शराब की मांग बढ़ी थी। इसका फायदा उठाकर सीमा से सटे कई बाजारों, ढाबों और होटलों में शराब बिक्री का एक समानांतर नेटवर्क विकसित हो गया था।

किशनगंज जिले से लगे रामपुर, फरिंगगोला, बालूचुका और आसपास के क्षेत्रों में स्थित कई प्रतिष्ठान शराब खरीदने वालों के लिए प्रमुख केंद्र बन गए थे। यहां बिहार से आने वाले लोगों की भी नियमित आवाजाही रहती थी।

पुलिस और उत्पाद विभाग की संयुक्त कार्रवाई

हाल के दिनों में पश्चिम बंगाल सरकार के निर्देश पर सीमा क्षेत्र में निगरानी और सख्त कर दी गई है। पुलिस और उत्पाद विभाग की संयुक्त टीमों द्वारा लगातार छापेमारी, वाहनों की जांच और संदिग्ध प्रतिष्ठानों की निगरानी की जा रही है।

अधिकारियों का कहना है कि अवैध शराब बिक्री और तस्करी को रोकने के लिए सीमा क्षेत्र में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। नियमित कार्रवाई के कारण कई अवैध कारोबारियों ने अपनी गतिविधियां बंद कर दी हैं या उन्हें सीमित करना पड़ा है।

होटल और दुकानदारों को सख्त चेतावनी

स्थानीय प्रशासन ने होटल संचालकों, ढाबा मालिकों और दुकानदारों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बिना वैध लाइसेंस के शराब की बिक्री किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

प्रशासन का मानना है कि सख्त निगरानी और नियमित जांच से अवैध कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो पाया है।

बिहार में तस्करी पर पड़ सकता है असर

विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा क्षेत्र में अवैध शराब बिक्री पर अंकुश लगने से बिहार में शराब की तस्करी के नेटवर्क पर भी असर पड़ सकता है। अब तक सीमावर्ती बाजारों से शराब खरीदकर बिहार में पहुंचाने के कई मामले सामने आते रहे हैं।

यदि अभियान इसी तरह जारी रहा तो सीमा पार होने वाली अवैध आपूर्ति पर भी काफी हद तक रोक लग सकती है। इससे बिहार की शराबबंदी नीति को लागू करने में भी प्रशासन को मदद मिलेगी।

निगरानी और बढ़ाने की तैयारी

सूत्रों के अनुसार, सीमा क्षेत्र में आगे भी विशेष निगरानी अभियान जारी रहेगा। पुलिस और उत्पाद विभाग संयुक्त रूप से संवेदनशील इलाकों की पहचान कर रहे हैं, जहां अवैध कारोबार की संभावना अधिक रहती है।

अधिकारियों का कहना है कि सीमा पर कानून व्यवस्था बनाए रखने और अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए आवश्यक सभी कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल चल रही कार्रवाई के कारण बिहार-बंगाल सीमा पर अवैध शराब कारोबार को बड़ा झटका लगा है और केवल लाइसेंसी प्रतिष्ठानों तक ही बिक्री सीमित रह गई है।