भोपाल में भाजपा सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरी एबीवीपी: एमएलबी गर्ल्स कॉलेज के पास शराब दुकान हटाने की मांग, 7 दिन का अल्टीमेटम

भोपाल में भाजपा सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरी एबीवीपी: एमएलबी गर्ल्स कॉलेज के पास शराब दुकान हटाने की मांग, 7 दिन का अल्टीमेटम

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मंगलवार को छात्र राजनीति का एक दिलचस्प और महत्वपूर्ण दृश्य देखने को मिला, जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने भाजपा सरकार और प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। संगठन ने महारानी लक्ष्मीबाई (एमएलबी) गर्ल्स कॉलेज के समीप संचालित शराब दुकान को हटाने की मांग को लेकर पॉलिटेक्निक चौराहे पर जोरदार प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने सड़कों पर उतरकर नारेबाजी की और छात्राओं की सुरक्षा को लेकर प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की।

प्रदर्शन के दौरान पूरे इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए 200 से अधिक पुलिसकर्मियों, वरिष्ठ अधिकारियों और वॉटर कैनन की तैनाती की गई थी।

छात्राओं की सुरक्षा को लेकर उठी आवाज

एबीवीपी कार्यकर्ताओं का कहना है कि एमएलबी गर्ल्स कॉलेज के ठीक पास शराब दुकान का संचालन छात्राओं की सुरक्षा और शैक्षणिक वातावरण के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहा है। प्रदर्शन में शामिल छात्र-छात्राओं ने हाथों में बैनर और पोस्टर लेकर विरोध जताया। पोस्टरों पर "शिक्षा के मंदिर के पास शराब की दुकान नहीं चलेगी" और "जहां ज्ञान की ज्योति जलती है, वहां शराब की दुकान नहीं चलती" जैसे संदेश लिखे हुए थे।

प्रदर्शन के दौरान कई छात्र बैरिकेड्स पर चढ़ गए और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। छात्रों का आरोप था कि लंबे समय से शिकायतों और ज्ञापनों के बावजूद इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

कलेक्टर ने दिया सात दिन में फैसला करने का आश्वासन

स्थिति को देखते हुए भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा स्वयं प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे और छात्रों से बातचीत की। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को आश्वस्त किया कि मामले की सभी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की समीक्षा की जा रही है तथा सात दिनों के भीतर उचित निर्णय लिया जाएगा।

कलेक्टर के आश्वासन के बाद विद्यार्थियों ने अपना प्रदर्शन समाप्त कर दिया, लेकिन एबीवीपी ने साफ कर दिया कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर शराब दुकान को हटाने या मामले में स्पष्ट निर्णय नहीं लिया गया तो आठवें दिन से आंदोलन दोबारा शुरू किया जाएगा।

हाईकोर्ट के निर्देशों के तहत चल रही प्रक्रिया

कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने बताया कि पदभार संभालने के बाद उन्हें इस विवाद की जानकारी मिली थी। पूर्व में प्राप्त शिकायतों और ज्ञापनों के आधार पर 3 जून को संबंधित पक्ष को नोटिस जारी किया गया था। इसके बाद मामला न्यायालय तक पहुंचा और अब जिला स्तरीय समिति को सभी तथ्यों की जांच कर निर्णय लेने के निर्देश मिले हैं।

उन्होंने कहा कि कॉलेज और शराब दुकान के बीच की दूरी, लाइसेंस संबंधी नियमों और अन्य कानूनी पहलुओं की जांच की जा रही है। समिति की रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार निर्णय लिया जाएगा।

एक साल से जारी है विरोध

एबीवीपी नेताओं का कहना है कि यह कोई नया मुद्दा नहीं है। संगठन पिछले लगभग एक वर्ष से लगातार इस विषय को उठा रहा है। कई बार प्रशासन को ज्ञापन सौंपे गए, अधिकारियों से मुलाकात की गई और छात्राओं की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई गई, लेकिन अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।

एबीवीपी के प्रांत संयोजक शिवम जाट ने कहा कि संगठन ने हमेशा लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखी है, लेकिन जब लगातार मांगों की अनदेखी हुई तो छात्रों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सात दिन के भीतर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।

केवल शराब दुकान नहीं, सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठाए सवाल

प्रदर्शन के दौरान विद्यार्थियों ने क्षेत्र की समग्र सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया। उनका कहना था कि कॉलेज के आसपास स्थित फ्लाईओवर और सुनसान हिस्सों में कई बार असामाजिक तत्व सक्रिय रहते हैं, जिससे छात्राओं को असुरक्षा महसूस होती है।

एबीवीपी ने प्रशासन के सामने कई मांगें रखीं, जिनमें प्रमुख रूप से—

एमएलबी गर्ल्स कॉलेज के पास से शराब दुकान को हटाना।
पूरे क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता वाले सीसीटीवी कैमरे लगाना।
छात्राओं के सुरक्षित आवागमन के लिए ओवरब्रिज का निर्माण।
शैक्षणिक संस्थानों के आसपास शराब दुकानों के संचालन पर सख्ती।
संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस गश्त बढ़ाना।
राजनीतिक और सामाजिक रूप से महत्वपूर्ण मामला

यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि एबीवीपी को आमतौर पर भाजपा और संघ विचारधारा के निकट माना जाता है, लेकिन इस मुद्दे पर संगठन ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ खुलकर प्रदर्शन किया है। इससे यह स्पष्ट संकेत गया है कि छात्र संगठन इस मुद्दे को छात्राओं की सुरक्षा और सामाजिक सरोकारों से जोड़कर देख रहा है।

अब सभी की नजरें जिला प्रशासन और जिला स्तरीय समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं। यदि सात दिनों के भीतर कोई ठोस निर्णय नहीं आता है तो राजधानी भोपाल में यह आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है, जिससे राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव भी बढ़ने की संभावना है।