पेपर लीक और बेरोजगारी पर मायावती का सरकार पर हमला, बोलीं- उच्च अधिकारियों की तय हो जिम्मेदारी; युवाओं के आक्रोश को गंभीरता से ले सरकार
संसद के मानसून सत्र के पहले दिन बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने देश में बढ़ते पेपर लीक मामलों, भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं और युवाओं में बढ़ती नाराजगी को लेकर सरकारों पर सवाल उठाए हैं। मायावती ने कहा कि परीक्षा व्यवस्था में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों के कारण लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है और इसके लिए जिम्मेदारी तय करते हुए उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों पर भी सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
बसपा प्रमुख ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि पेपर लीक और परीक्षा संबंधी अनियमितताओं के कारण युवाओं में असुरक्षा और आक्रोश बढ़ रहा है। उन्होंने सरकार से इस गंभीर स्थिति पर तुरंत प्रभावी कदम उठाने की मांग की।
'जिम्मेदारी तय हो, दोषियों पर हो कड़ी कार्रवाई'
मायावती ने कहा कि परीक्षाओं के रद्द होने, परिणामों में देरी और भर्ती प्रक्रियाओं में अनिश्चितता से युवा लंबे समय से परेशान हैं। उन्होंने कहा कि केवल छोटे स्तर के कर्मचारियों या एजेंसियों पर कार्रवाई करने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि परीक्षा व्यवस्था से जुड़े बड़े अधिकारियों और जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरकारों को ऐसी व्यवस्था बनानी होगी, जिससे प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बनी रहे और युवाओं का विश्वास दोबारा बहाल हो सके।
CJP आंदोलन का जिक्र कर सरकार को दी सलाह
बसपा प्रमुख ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि संसद सत्र शुरू होने के समय सदन के अंदर और बाहर कई मुद्दों को लेकर तनाव की स्थिति बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों को गंभीरता से समझने की जरूरत है। सरकार को संवाद और संवेदनशील रवैये के साथ समस्याओं का समाधान निकालना चाहिए, ताकि युवाओं को सड़क पर उतरने के लिए मजबूर न होना पड़े।
'सरकारी शिक्षा व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत'
मायावती ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी सरकारों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अच्छे सरकारी स्कूलों और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अभाव के कारण निजी स्कूलों और कोचिंग संस्थानों का विस्तार हुआ है।
उन्होंने कहा कि आर्थिक चुनौतियों के बावजूद युवा और उनके परिवार बेहतर भविष्य के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। ऐसे में जब परीक्षाओं में गड़बड़ी होती है तो इसका असर केवल एक उम्मीदवार पर नहीं बल्कि पूरे परिवार पर पड़ता है।
बसपा प्रमुख ने कहा कि युवाओं को अस्थायी और कम वेतन वाली नौकरियों के बजाय स्थायी और सम्मानजनक रोजगार की जरूरत है।
कोचिंग संस्थानों पर निगरानी की मांग
मायावती ने सरकार से कोचिंग संस्थानों की कार्यप्रणाली पर भी निगरानी बढ़ाने की मांग की। उन्होंने कहा कि शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार को रोकने के लिए सख्त नियम बनाए जाने चाहिए।
उन्होंने प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक सरकारी संस्थानों की गुणवत्ता सुधारने पर जोर दिया। मायावती ने कहा कि अगर शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दों का समय रहते समाधान किया गया होता, तो युवाओं में इतना आक्रोश देखने को नहीं मिलता।
युवाओं के मुद्दों पर राजनीति तेज
मायावती का यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में भर्ती परीक्षाओं, पेपर लीक और रोजगार के मुद्दों को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। विपक्षी दल लगातार सरकार से परीक्षा प्रणाली में सुधार और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।
वहीं, सरकार की ओर से कई बार परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए नए सुरक्षा उपाय लागू करने की बात कही गई है।
मायावती की प्रमुख मांगें
पेपर लीक और परीक्षा गड़बड़ी के मामलों में जिम्मेदारी तय की जाए।
उच्च पदों पर बैठे जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो।
परीक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और सुरक्षित बनाया जाए।
सरकारी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए।
कोचिंग संस्थानों की निगरानी बढ़ाई जाए।
युवाओं की समस्याओं का संवाद के जरिए समाधान निकाला जाए।
मायावती ने कहा कि युवाओं की समस्याओं को नजरअंदाज करने के बजाय सरकारों को संवेदनशीलता के साथ कदम उठाने चाहिए, ताकि देश की युवा शक्ति का भरोसा लोकतांत्रिक संस्थाओं में बना रहे।
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