मध्य प्रदेश विधानसभा में तीसरे दिन विपक्ष का जोरदार प्रदर्शन: काली पट्टी बांधकर पहुंचे कांग्रेस विधायक, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग; मुआवजा, सिंचाई, ई-अटेंडेंस और आदिवासी जमीन जैसे मुद्दों पर सरकार से तीखे सवाल
भोपाल | 22 जुलाई 2026
मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन सदन के भीतर और बाहर राजनीतिक हलचल चरम पर रही। विपक्ष ने शिक्षा व्यवस्था, किसानों, आदिवासियों और सरकारी योजनाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति अपनाई। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार सहित कांग्रेस के कई विधायक हाथों में काली पट्टी बांधकर विधानसभा पहुंचे और NEET पेपर लीक, दिल्ली में छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई।
विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही प्रश्नकाल संपन्न हुआ और उसके बाद शून्यकाल की सूचनाओं को पढ़ा हुआ मान लिया गया। इसी दौरान विपक्ष ने दिल्ली में छात्रों के साथ कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाने की कोशिश की, जिस पर सत्ता पक्ष ने नियमों का हवाला देते हुए चर्चा कराने से इनकार कर दिया। इस दौरान सदन में कई बार तीखी नोकझोंक देखने को मिली।
काली पट्टी बांधकर विधानसभा पहुंचे कांग्रेस विधायक
सत्र शुरू होने से पहले विधानसभा परिसर में कांग्रेस विधायकों ने विरोध का प्रतीक स्वरूप हाथों में काली पट्टी बांधी। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि देशभर के लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित करने वाले NEET पेपर लीक मामले में केंद्र सरकार जवाबदेही से बच रही है।
विधायकों ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठे हैं और नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए। कांग्रेस का कहना था कि छात्रों की मांगों को राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय सरकार को उनकी बात सुननी चाहिए।
दिल्ली में छात्रों पर कार्रवाई का मुद्दा सदन में उठा
शून्यकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने दिल्ली में छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई और कांग्रेस नेताओं की गिरफ्तारी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में छात्रों को अपनी बात रखने का अधिकार है और यदि उनके साथ बल प्रयोग हुआ है तो इस पर चर्चा होनी चाहिए।
हालांकि लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने स्पष्ट किया कि यह विषय मध्य प्रदेश विधानसभा के अधिकार क्षेत्र से बाहर का है। उन्होंने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि दूसरे राज्य या केंद्र के विषय पर विधानसभा में चर्चा नहीं कराई जा सकती। इसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई।
सदन में प्रश्नकाल के दौरान सरकार से कई महत्वपूर्ण सवाल
प्रश्नकाल के दौरान विधायकों ने राज्य से जुड़े कई अहम विषयों पर सरकार से जवाब मांगा। इनमें शिक्षकों की ई-अटेंडेंस व्यवस्था, किसानों का लंबित मुआवजा, केन-बेतवा लिंक परियोजना, आदिवासी भूमि हस्तांतरण, भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड, वसीयत के आधार पर नामांतरण और चंबल सूक्ष्म सिंचाई परियोजना जैसे विषय प्रमुख रहे।
इन मुद्दों पर कई मंत्रियों ने सदन में जवाब दिया, जबकि विपक्ष ने सरकारी दावों पर सवाल उठाते हुए विस्तृत जांच और जवाबदेही की मांग की।
केन-बेतवा परियोजना पर फिर गरमाई राजनीति
केन-बेतवा लिंक परियोजना एक बार फिर विधानसभा में चर्चा का केंद्र रही। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि परियोजना से प्रभावित अनेक परिवारों को अभी भी उचित मुआवजा और पुनर्वास का लाभ नहीं मिला है।
उन्होंने दावा किया कि कई पात्र परिवार पुनर्वास सूची से बाहर हैं और मुआवजा वितरण में गंभीर विसंगतियां हुई हैं। साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ मामलों में ऐसे लोगों को भारी मुआवजा मिला जो प्रभावित क्षेत्र में स्थायी रूप से नहीं रहते थे, जबकि वास्तविक पात्र परिवार अब भी भुगतान का इंतजार कर रहे हैं।
जवाब में राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि अधिकांश प्रभावित परिवारों को पुनर्वास पैकेज का लाभ दिया जा चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी कहा कि यदि किसी प्रकार की गड़बड़ी सामने आती है तो सरकार पूरे मामले की दोबारा जांच कराने के लिए तैयार है।
किसानों के लंबित मुआवजे पर विपक्ष का हमला
प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों के लंबित मुआवजे का मुद्दा भी सदन में जोर-शोर से उठा। कांग्रेस विधायक विपिन जैन ने कहा कि मंदसौर जिले के हजारों किसानों को स्वीकृत मुआवजा राशि का भुगतान अब तक नहीं हुआ है।
उन्होंने सरकार से पूछा कि जिन किसानों के भुगतान लंबित हैं, उन्हें राशि कब तक मिलेगी। राजस्व मंत्री ने स्वीकार किया कि कुछ भुगतान लंबित हैं, लेकिन उन्होंने कोई निश्चित समय-सीमा नहीं बताई। सरकार के इस जवाब से असंतुष्ट कांग्रेस विधायक सोहनलाल वाल्मीकि ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
चंबल सूक्ष्म सिंचाई परियोजना पर भ्रष्टाचार के आरोप
कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल ने शिवपुरी की चंबल सूक्ष्म सिंचाई परियोजना में भारी अनियमितताओं का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि लगभग 167 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद किसानों तक अपेक्षित सिंचाई सुविधा नहीं पहुंची।
उन्होंने परियोजना की स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की तथा संबंधित एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की बात कही।
इस पर मंत्री कृष्णा गौर ने बताया कि परियोजना का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और हजारों हेक्टेयर भूमि तक सिंचाई सुविधा पहुंचाई गई है। उन्होंने कहा कि जहां तकनीकी खामियां हैं, वहां एजेंसी गारंटी अवधि के भीतर मरम्मत कर रही है। विधानसभा अध्यक्ष ने भी परियोजना का पुनः निरीक्षण कराने और आवश्यक सुधार सुनिश्चित करने का सुझाव दिया।
ई-अटेंडेंस और डेटा सुरक्षा पर भी उठे सवाल
प्रश्नकाल के दौरान विधायक सुनील उइके ने शिक्षकों और कर्मचारियों की ई-अटेंडेंस प्रणाली पर सवाल उठाते हुए पूछा कि यदि डेटा लीक होता है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी।
स्कूल शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने जवाब दिया कि प्रदेश के लगभग 95.9 प्रतिशत शिक्षक नियमित रूप से ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी प्रकार का अतिरिक्त व्यक्तिगत डेटा नहीं लिया जा रहा है और साइबर सुरक्षा के सभी आवश्यक उपाय किए गए हैं। जिन क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या है, वहां ऑफलाइन उपस्थिति की व्यवस्था जारी है।
आदिवासियों की जमीन का मुद्दा भी सदन में गूंजा
विधायक हीरालाल अलावा ने आरोप लगाया कि कई जिलों में आदिवासी समुदाय की जमीन नियमों के विपरीत गैर-आदिवासियों के नाम दर्ज कर दी गई है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच कर प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाया जाए।
राजस्व मंत्री ने आश्वासन दिया कि यदि किसी मामले में अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित नामांतरण निरस्त कर जमीन वापस दिलाई जाएगी। विधानसभा अध्यक्ष ने भी बिना वैधानिक अनुमति हुए भूमि हस्तांतरण की जांच कराने के निर्देश दिए।
भोपाल सिटी लिंक और नामांतरण के मुद्दे पर भी बहस
भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड (BCLL) में बस ऑपरेटर पर कथित रूप से बिना नोटिस पेनल्टी लगाए जाने का मामला भी सदन में उठा। विपक्ष ने इस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच की मांग की।
इसके अलावा भाजपा विधायक मोहन सिंह राठौड़ ने ग्वालियर और शिवपुरी में वसीयत के आधार पर लंबित नामांतरण मामलों की जानकारी मांगी। सरकार ने कहा कि सभी मामलों में नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा रही है।
7,765 करोड़ रुपये के अनुपूरक बजट पर भी चर्चा
राजनीतिक बहस के बीच सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के पहले अनुपूरक बजट पर भी चर्चा की तैयारी की। लगभग 7,765.76 करोड़ रुपये के इस अनुपूरक बजट में सबसे बड़ा प्रावधान नर्मदा घाटी विकास विभाग के लिए किया गया है।
सरकार के अनुसार यह राशि सिंचाई परियोजनाओं, भूमि अधिग्रहण और विकास कार्यों पर खर्च की जाएगी। इसके अलावा अन्य विभागों के लिए भी अतिरिक्त वित्तीय प्रावधान किए गए हैं।
विधानसभा में राजनीतिक माहौल रहा गर्म
पूरे दिन सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर तीखी बहस होती रही। कांग्रेस ने शिक्षा, किसानों, आदिवासियों और सिंचाई परियोजनाओं को लेकर सरकार को घेरने का प्रयास किया, जबकि सरकार ने अधिकांश मामलों में अपनी योजनाओं और प्रशासनिक कार्रवाई का बचाव किया।
विशेष रूप से दिल्ली की घटना को लेकर सदन में हुई बहस ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया। हालांकि विधानसभा के नियमों का हवाला देते हुए उस विषय पर औपचारिक चर्चा नहीं कराई गई।
मुख्य बिंदु
कांग्रेस विधायक काली पट्टी बांधकर विधानसभा पहुंचे और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की।
दिल्ली में छात्रों पर पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाने पर सदन में तीखी नोकझोंक हुई।
केन-बेतवा परियोजना और किसानों के मुआवजे पर सरकार विपक्ष के निशाने पर रही।
चंबल सूक्ष्म सिंचाई परियोजना में अनियमितताओं के आरोपों पर विस्तृत चर्चा हुई।
ई-अटेंडेंस, डेटा सुरक्षा और आदिवासी भूमि हस्तांतरण जैसे मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगा गया।
7,765.76 करोड़ रुपये के अनुपूरक बजट पर भी सदन में चर्चा प्रस्तावित रही।
मुख्यमंत्री ने मुआवजा वितरण में गड़बड़ी की शिकायत मिलने पर पुनः जांच कराने का आश्वासन दिया।
news desk MPcg