दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर हादसों का सिलसिला: 8 महीने में 18 मौतें, नूंह में सुरक्षा पर सवाल
नूंह (हरियाणा) | 22 जुलाई 2026
देश के सबसे महत्वाकांक्षी सड़क प्रोजेक्ट्स में शामिल दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे (DME) का हरियाणा के नूंह क्षेत्र में सफर लगातार हादसों के कारण चिंता का विषय बनता जा रहा है। तेज रफ्तार वाहनों के लिए बनाए गए इस हाईस्पीड एक्सप्रेसवे पर पिछले आठ महीनों में हुए आठ बड़े सड़क हादसों में 18 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 51 लोग घायल हुए हैं।
लगातार हो रही दुर्घटनाओं के बाद एक्सप्रेसवे की सुरक्षा व्यवस्था, ट्रैफिक निगरानी और नियमों के पालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों और वाहन चालकों का कहना है कि एक्सप्रेसवे पर कई जगह अवैध रूप से खड़े ट्रक, तेज गति से चलने वाले वाहन और रात के समय कम निगरानी हादसों की बड़ी वजह बन रहे हैं।
नूंह क्षेत्र में बढ़ रहे सड़क हादसे
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे हरियाणा के नूंह जिले से होकर गुजरता है। जिले में एक्सप्रेसवे का करीब 59 किलोमीटर का हिस्सा आता है, जहां पिछले कुछ समय में कई गंभीर दुर्घटनाएं सामने आई हैं।
प्रशासनिक और पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, पिछले आठ महीनों में कई छोटी-बड़ी दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें आठ हादसे बेहद गंभीर रहे। इन घटनाओं में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई और कई परिवार प्रभावित हुए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि एक्सप्रेसवे पर वाहन तेज रफ्तार से चलते हैं, ऐसे में अचानक सामने आने वाली बाधाएं बड़े हादसे का कारण बन जाती हैं।
अवैध पार्किंग बनी दुर्घटनाओं की बड़ी वजह
हादसों के पीछे सबसे बड़ी समस्या एक्सप्रेसवे के किनारे खड़े भारी वाहनों को माना जा रहा है।
कई बार ट्रक चालक लंबे समय तक सड़क किनारे वाहन खड़ा कर देते हैं। रात के समय कम रोशनी और तेज गति के कारण पीछे से आने वाले वाहन इनसे टकरा जाते हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार:
एक्सप्रेसवे किनारे ट्रकों की अवैध पार्किंग जारी है।
कई स्थानों पर वाहन चालक सुरक्षा नियमों की अनदेखी करते हैं।
कार्रवाई के बाद कुछ समय के लिए सुधार दिखता है, लेकिन स्थिति फिर पहले जैसी हो जाती है।
तेज रफ्तार और चालक की लापरवाही भी कारण
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, हाईस्पीड एक्सप्रेसवे पर वाहन चलाते समय छोटी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है।
नूंह क्षेत्र में हुए हादसों में तेज गति, अचानक ब्रेक लगाना, चालक की थकान और नींद की झपकी जैसे कारण सामने आए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि एक्सप्रेसवे पर गति सीमा का पालन, पर्याप्त आराम के बाद वाहन चलाना और लेन अनुशासन बेहद जरूरी है।
हालिया हादसे में तीन लोगों की मौत
हाल ही में नूंह क्षेत्र में हुए एक सड़क हादसे में राजस्थान के जयपुर जिले के तीन लोगों की मौत हो गई थी, जबकि तीन अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह दुर्घटना एक वाहन के अचानक ब्रेक लगाने के बाद हुई टक्कर से हुई। इस घटना के बाद एक बार फिर एक्सप्रेसवे की सुरक्षा व्यवस्था पर चर्चा शुरू हो गई।
प्रशासन ने कार्रवाई का किया दावा
हादसों को रोकने के लिए प्रशासन और पुलिस विभाग की ओर से कार्रवाई किए जाने की बात कही गई है।
प्रशासन के अनुसार:
अवैध रूप से वाहन खड़े करने वालों के चालान किए गए हैं।
नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों पर कार्रवाई की गई है।
सड़क किनारे बने अवैध ढाबों और अस्थायी अतिक्रमण हटाए गए हैं।
एक्सप्रेसवे पर निगरानी बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
हालांकि, लगातार हो रहे हादसे बताते हैं कि केवल कार्रवाई से समस्या पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो पा रही है।
निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की मांग
स्थानीय लोग और वाहन चालक एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग कर रहे हैं।
उनकी मांग है कि:
एक्सप्रेसवे पर लगातार पेट्रोलिंग की जाए।
अवैध पार्किंग के खिलाफ स्थायी कार्रवाई हो।
भारी वाहनों के लिए सुरक्षित पार्किंग क्षेत्र बनाए जाएं।
स्पीड लिमिट उल्लंघन करने वालों पर सख्ती की जाए।
दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान कर सुरक्षा उपाय बढ़ाए जाएं।
आधुनिक एक्सप्रेसवे, लेकिन सुरक्षा चुनौती
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे को देश की सड़क कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने वाला बड़ा प्रोजेक्ट माना जाता है। इस एक्सप्रेसवे से दिल्ली और मुंबई के बीच यात्रा समय कम करने का लक्ष्य रखा गया है।
लेकिन नूंह क्षेत्र में लगातार हो रहे हादसे यह सवाल खड़ा कर रहे हैं कि आधुनिक सड़क ढांचे के साथ सुरक्षा व्यवस्था कितनी प्रभावी है।
सड़क विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ अनुशासन, निगरानी और नियमों का सख्ती से पालन ही हादसों को कम कर सकता है।
फिलहाल नूंह क्षेत्र में एक्सप्रेसवे की सुरक्षा व्यवस्था प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। अब निगाह इस बात पर है कि हादसों पर रोक लगाने के लिए क्या नए कदम उठाए जाते हैं।
news desk MPcg