प्रयागराज में शास्त्री पुल की सड़क तीन दिन में उखड़ी, करोड़ों के मरम्मत कार्य पर उठे सवाल; PWD ने शुरू कराई दोबारा पैचिंग, गुणवत्ता जांच की मांग तेज
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में गंगा नदी पर बने ऐतिहासिक और अत्यंत व्यस्त शास्त्री पुल की हालिया मरम्मत एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा लगभग डेढ़ महीने तक चले मरम्मत अभियान के बाद जिस पुल को बड़ी उम्मीदों के साथ यातायात के लिए खोला गया था, उसकी सड़क महज तीन दिन के भीतर ही कई स्थानों पर उखड़ने लगी। सड़क की ऊपरी डामर परत के टूटने और विशेष रूप से एक्सपेंशन जॉइंट (Expansion Joint) के पास पैचिंग के उखड़ने की घटनाओं ने विभागीय कार्यप्रणाली और निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों, वाहन चालकों और विशेषज्ञों का कहना है कि जिस पुल पर लाखों रुपये खर्च कर मरम्मत कराई गई, उसका इतने कम समय में खराब होना सामान्य नहीं माना जा सकता। इस बीच लोक निर्माण विभाग ने प्रभावित हिस्सों की दोबारा मरम्मत शुरू कर दी है और पूरे मामले की तकनीकी समीक्षा भी की जा रही है।
शास्त्री पुल का महत्व
शास्त्री पुल प्रयागराज शहर की सबसे महत्वपूर्ण यातायात लाइनों में से एक है। यह पुल गंगा नदी के ऊपर दारागंज को झूंसी और पूर्वी प्रयागराज क्षेत्र से जोड़ता है। इसके माध्यम से प्रतिदिन हजारों निजी वाहन, बसें, एंबुलेंस, स्कूल वाहन और आवश्यक सेवाओं से जुड़े वाहन गुजरते हैं।
यह पुल न केवल शहर के भीतर आवागमन का प्रमुख मार्ग है, बल्कि वाराणसी, मिर्जापुर, भदोही, प्रतापगढ़ और पूर्वांचल के कई जिलों की ओर जाने वाले यातायात के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में पुल की सड़क खराब होने का असर सीधे हजारों यात्रियों पर पड़ता है।
क्यों कराई गई थी मरम्मत?
पिछले कई महीनों से पुल की सड़क जगह-जगह टूट चुकी थी। भारी वाहनों के दबाव और लगातार उपयोग के कारण बड़े-बड़े गड्ढे बन गए थे, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया था।
स्थानीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और वाहन चालकों की लगातार शिकायतों के बाद लोक निर्माण विभाग ने पुल के व्यापक मरम्मत कार्य की योजना तैयार की। इसके तहत सड़क की ऊपरी परत हटाकर नई बिटुमिनस लेयर बिछाई गई, क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत की गई और कई स्थानों पर नई पैचिंग की गई।
3 जून से 15 जुलाई तक चला मरम्मत अभियान
लोक निर्माण विभाग ने 3 जून 2026 से मरम्मत कार्य शुरू किया। इस दौरान पुल पर भारी वाहनों का आवागमन पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया ताकि निर्माण कार्य सुरक्षित और बेहतर तरीके से पूरा किया जा सके।
करीब 42 दिनों तक लगातार मरम्मत चलती रही। विभाग ने दावा किया कि सड़क की सतह को पूरी तरह नया बनाया गया है और पुल पर यात्रा पहले से अधिक सुरक्षित होगी।
15 जुलाई को कार्य पूरा घोषित किया गया और 16 जुलाई से पुल आम वाहनों के लिए खोल दिया गया।
लेकिन विभाग के दावों की उम्र केवल तीन दिन ही साबित हुई।
तीन दिन बाद ही उखड़ने लगी सड़क
यातायात शुरू होने के कुछ ही समय बाद पुल के कई हिस्सों में डामर की नई परत उखड़ने लगी। सबसे अधिक नुकसान एक्सपेंशन जॉइंट के आसपास देखा गया, जहां नई पैचिंग टूट गई।
कुछ स्थानों पर सड़क की ऊपरी परत निकल गई, जबकि कई जगह छोटे-छोटे गड्ढे बनने लगे। वाहन चालकों ने इसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए, जिसके बाद मामला तेजी से चर्चा में आ गया।
क्या होता है एक्सपेंशन जॉइंट?
विशेषज्ञों के अनुसार पुलों पर Expansion Joint वह हिस्सा होता है जहां तापमान, कंपन और भार के कारण पुल का ढांचा थोड़ा फैलता और सिकुड़ता है।
इसी कारण इन स्थानों पर विशेष प्रकार की सामग्री, मजबूत बाइंडिंग और उच्च गुणवत्ता वाली इंजीनियरिंग की आवश्यकता होती है। यदि निर्माण मानकों का सही तरीके से पालन न किया जाए या सामग्री की गुणवत्ता कमजोर हो तो सबसे पहले यही हिस्सा खराब होता है।
दो चरणों में होना था पूरा काम
करीब 2200 मीटर लंबे चार लेन वाले शास्त्री पुल की मरम्मत दो चरणों में प्रस्तावित थी।
पहले चरण में दारागंज से झूंसी जाने वाली लेन की मरम्मत की गई। यह वही हिस्सा है जहां ओवरलोड ट्रकों और भारी वाहनों की आवाजाही सबसे अधिक रहती है।
दूसरे चरण में दूसरी लेन की मरम्मत प्रस्तावित है, लेकिन पहले चरण की गुणवत्ता पर सवाल उठने के बाद आगे के कार्य को लेकर भी निगरानी बढ़ सकती है।
पहले भी निरीक्षण में मिली थीं कमियां
लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि मरम्मत कार्य के दौरान निरीक्षण में कुछ तकनीकी खामियां सामने आई थीं। अब सड़क के जल्दी खराब होने के बाद इन खामियों को गंभीरता से देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सड़क निर्माण के दौरान तापमान, बिटुमिन की गुणवत्ता, रोलर कम्पैक्शन, सतह की सफाई या मिश्रण के अनुपात में गड़बड़ी हो तो सड़क की उम्र काफी कम हो सकती है।
विभाग ने शुरू की दोबारा पैचिंग
मामला सामने आने के बाद लोक निर्माण विभाग ने प्रभावित हिस्सों की तत्काल मरम्मत शुरू करा दी है।
लोक निर्माण विभाग निर्माण खंड-3 के अधिशासी अभियंता नवीन कुमार शर्मा ने बताया कि:
एक्सपेंशन जॉइंट के पास कुछ स्थानों पर पैच उखड़ गया है।
मरम्मत कार्य शुरू करा दिया गया है।
जहां-जहां सड़क क्षतिग्रस्त हुई है, वहां दोबारा पैचिंग की जाएगी।
निर्माण के दौरान मिली तकनीकी कमियों की भी समीक्षा की जा रही है।
वाहन चालकों को फिर बढ़ी परेशानी
पुल की सड़क उखड़ने के कारण दोपहिया वाहन चालकों को सबसे अधिक परेशानी हो रही है। तेज रफ्तार में अचानक गड्ढा आने से दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है।
बारिश के मौसम में यदि गड्ढों में पानी भर जाए तो स्थिति और अधिक खतरनाक हो सकती है क्योंकि वाहन चालकों को सड़क की वास्तविक स्थिति दिखाई नहीं देती।
स्थानीय लोगों ने उठाए सवाल
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि:
यदि सड़क तीन दिन में उखड़ रही है तो करोड़ों रुपये के खर्च का क्या औचित्य है?
निर्माण एजेंसी की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
गुणवत्ता जांच स्वतंत्र एजेंसी से कराई जानी चाहिए।
दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
विशेषज्ञों की राय
सिविल इंजीनियरिंग विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी पुल की सड़क की सामान्य आयु कई वर्षों की होती है। यदि नई बनी सड़क कुछ दिनों में ही टूटने लगे तो इसके पीछे कई संभावित कारण हो सकते हैं, जैसे—
निम्न गुणवत्ता की निर्माण सामग्री
बिटुमिन का सही अनुपात न होना
पर्याप्त रोलर कम्पैक्शन न होना
सतह की उचित तैयारी न होना
बारिश या नमी के दौरान निर्माण
गुणवत्ता नियंत्रण में लापरवाही
हालांकि वास्तविक कारण केवल तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
गुणवत्ता जांच की मांग तेज
घटना के बाद सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने पूरे मरम्मत कार्य की तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि सार्वजनिक धन से बने महत्वपूर्ण ढांचे की मरम्मत कुछ ही दिनों में खराब हो जाए तो जिम्मेदारी तय होना जरूरी है।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए निर्माण कार्यों की थर्ड-पार्टी क्वालिटी ऑडिट, नियमित निरीक्षण और जवाबदेही तय करने की व्यवस्था को और मजबूत किया जाना चाहिए।
फिलहाल क्या स्थिति है?
फिलहाल पुल पर यातायात जारी है और लोक निर्माण विभाग क्षतिग्रस्त हिस्सों की दोबारा मरम्मत करा रहा है। विभाग का कहना है कि सड़क को जल्द पूरी तरह दुरुस्त कर दिया जाएगा ताकि आम लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
हालांकि सड़क के महज तीन दिन में उखड़ने की घटना ने एक बार फिर सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, निगरानी व्यवस्था और सार्वजनिक धन के उपयोग को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि तकनीकी जांच में क्या निष्कर्ष सामने आते हैं और जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है।
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