एमपी में विकास की रफ्तार दोगुनी: 32 लाख करोड़ के निवेश प्रस्तावों से बदले हालात | मध्यप्रदेश सरकार के दो साल: विकास की कहानी
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मध्यप्रदेश सरकार के दो साल: विकास की कहानी
मध्यप्रदेश सरकार ने अपने कार्यकाल के पहले दो वर्षों में विकास और कल्याण के हर मोर्चे पर उल्लेखनीय उपलब्धियाँ दर्ज की हैं। औद्योगिक निवेश से लेकर कृषि उत्पादन, शिक्षा तथा स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार तक राज्यभर में तेजी से काम हुआ है। इन दो वर्षों में निवेशकों के भरोसे को मजबूत करते हुए सरकार ने आईआईएम निवेशक सम्मेलन में ₹32 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव जुटाए, जिससे लगभग 23 लाख नए रोजगार संबंधी प्रस्ताव आए। इसी दौरान करोड़ों गरीब परिवारों को लाभ देने के लिए 1.33 करोड़ से अधिक परिवारों को मुफ्त खाद्यान्न वितरित किया गया और प्रधानमंत्री जन-मन कार्यक्रम के तहत 50 हजार से ज्यादा आवास पूरे किए गए। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, शिक्षा एवं स्वास्थ्य क्षेत्रों में भी सुधार हुआ है और जनजातीय, महिला तथा अन्य कल्याणकारी योजनाओं से समाज के कमजोर वर्गों को विशेष लाभ मिला है।
औद्योगिक विकास और निवेश
मध्यप्रदेश ने वर्ष 2025 को ‘उद्योग एवं रोजगार वर्ष’ घोषित किया है। इस दिशा में 18 नई नीति स्वीकृत कर नई औद्योगिक ईकोसिस्टम बनाया गया। निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए ऑटोमैटेड निवेशक सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें ₹32 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव सामने आए। एमपी इन्वेस्टर पोर्टल 3.0 लॉंच कर निवेश प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी एवं तेज बनाया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने धार में देश का पहला पीएम-लिमिटेड पार्क का भूमिपूजन किया, जिससे 3 लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा और 6 लाख कपास उत्पादकों को लाभ होगा। प्रदेश में अब तक 881 औद्योगिक इकाइयों को भूमि आवंटित की जा चुकी है, 281 इकाइयों का भूमि पूजन हो चुका है और 141 इकाइयों का शुभारंभ हो गया है। इसके अलावा 26 नए औद्योगिक पार्क/क्लस्टर स्वीकृत किए गए और 33 मौजूदा औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए गए हैं। पिछले वर्ष मध्यप्रदेश स्वच्छंद निवेश प्रस्ताव लाने में देश का तीसरा राज्य बना, और इसी मेले में 23 लाख से अधिक रोजगार सृजन के प्रस्ताव सामने आए।
कृषि और किसान कल्याण
कृषि क्षेत्र में मध्यप्रदेश को उल्लेखनीय सफलता मिली है। राज्य दलहन, तिलहन, मक्का और टमाटर उत्पादन में देश में प्रथम स्थान पर है, जबकि गेहूं, धान और अन्य अन्न उत्पादन में दूसरे स्थान पर रहा है। किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए भावान्तर भुगतान योजना के तहत सोयाबीन उत्पादकों के 2.67 लाख खातों में ₹482 करोड़ पहुंचाए गए। मूंग-उड़द की समर्थन मूल्य पर खरीद जारी है, और कोदो-कुटकी की उपज के लिए क्रमशः ₹2,500 और ₹3,500 प्रति क्विंटल कीमत तय की गई है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि एवं मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के तहत 48 हजार करोड़ रुपये से अधिक सीधे किसानों के खातों में भेजे गए हैं। वर्ष 2024-25 में 35.03 लाख किसानों को 21,232 करोड़ रुपये का फसल ऋण वितरित किया गया, जो पिछले वर्ष से लगभग 1,286 करोड़ रुपये अधिक है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में भी बड़ी राहत दी गई: वित्तीय वर्ष 2023-24 में 961.68 करोड़ और 2024-25 में 1,275.86 करोड़ रुपये बीमा दावे के भुगतान किए गए। प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित 24.14 लाख से अधिक किसानों को 2,106.64 करोड़ रुपये की राहत राशि दी गई है। गेहूं के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,425 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया और किसानों को 175 रुपये बोनस प्रति क्विंटल दिया गया। धान उत्पादकों के लिए प्रति हेक्टेयर 4,000 रुपये अनुदान वृद्धि की गई, जिससे 6.69 लाख से अधिक किसानों के खातों में कुल 337 करोड़ रुपये से अधिक अदा किए गए हैं।
शिक्षा क्षेत्र में सुधार
शिक्षा के क्षेत्र में मध्यप्रदेश ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। राज्य देश का पहला ऐसा राज्य बना जिसने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को पूर्ण रूप से लागू किया। जिसके परिणामस्वरूप स्कूलों में नामांकन दर ऐतिहासिक रूप से बढ़ी है – जैसे कि कक्षा 1 में नामांकन 120% और कक्षा 9-12 में 104% तक पहुँच गया, साथ ही ड्रॉपआउट दर में भी तेज गिरावट आई है। पिछले दो वर्षों में लगभग 76,000 अतिथि शिक्षकों की भर्ती की गई और 24,000 से अधिक शिक्षकों को उच्च पदों पर पदोन्नत किया गया, जिससे विद्यालयों में प्रशासनिक मजबूती आई है। ‘हमारे शिक्षक’ मोबाइल ऐप के माध्यम से ई-उपस्थिति प्रणाली लागू की गई है जिससे विद्यालय प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ी है। प्रधानमंत्री विद्यालय (मॉडल स्कूल) नेटवर्क का विस्तार हुआ है; वर्तमान में 799 मॉडल स्कूलों में 4.8 लाख से अधिक विद्यार्थियों का नामांकन हो चुका है। इनमें से 52 संदीपन विद्यालयों में रोबोटिक्स लैब स्थापित की गई है और 458 पीएम स्कूली (मॉडल) स्कूलों में अटल टिंकरिंग लैब (ATAL Tinkering Lab) लगाए गए हैं। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी प्रगति हुई है। प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (पीएम-उषा) के अंतर्गत आठ विश्वविद्यालयों को कुल 400 करोड़ रुपये की विकास राशि स्वीकृत की गई है। प्रदेश के प्रत्येक 55 जिलों में प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस बनाने की योजना के अंतर्गत 55 स्थानों का चयन हुआ है। उच्च शिक्षा संस्थानों में 2,000 से अधिक नए पद सृजित किए गए हैं और कुल एमबीबीएस, इंजीनियरिंग व अन्य पाठ्यक्रमों की सीटें बढ़ाई गई हैं। बोर्ड परीक्षा परिणाम में सुधार के तहत 12वीं में 75% से अधिक अंक लाने वाले छात्रों को पुरस्कार स्वरूप लैपटॉप दिए जा रहे हैं। अधिक से अधिक छात्रों को लाभान्वित करने के लिए सरकारी पहल में निजी विद्यालयों में पढ़ने वाले 8.5 लाख से अधिक विद्यार्थियों की फीस चुकाने के लिए सहायता प्रदान की गई। स्कूली शिक्षा को और मज़बूत करने के लिए नि:शुल्क पुस्तक वितरण, साइंस एडुकेशन कार्यक्रम और मासिक स्वास्थ्य शिविर जैसे कई अभियान चलाए गए हैं। शिक्षा विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दो वर्षों में स्कूलों में लगभग 22 लाख बच्चों को स्वास्थ्य सेवाएँ और भोजन उपलब्ध कराया गया, और 6.18 लाख छात्र दोबारा स्कूलों से जोड़े गए हैं।
स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार
स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए भी कई पहलें की गई हैं। पूरे प्रदेश में 12,655 आयुष्मान आरोग्य मंदिर (स्वास्थ्य केंद्र), 448 मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक और 72 मोबाइल मेडिकल यूनिट संचालित की जा रही हैं। आयुष्मान भारत योजना में अब तक लगभग 84 लाख लाभार्थियों को स्वास्थ्य कार्ड जारी किए गए हैं, जिनमें 34 लाख से अधिक लाभार्थियों ने नि:शुल्क इलाज कराया है। उज्जैन में प्रदेश की पहली मेडिकल सिटी और मेडिकल कॉलेज का भूमिपूजन किया गया है। मई 2024 में ‘पीएम-शिफा एयर एंबुलेंस सेवा’ शुरू की गई, जिसने अब तक 109 जटिल रोगियों को विदेश के अस्पतालों में उपचार के लिए एयरलिफ्ट किया है। चिकित्सा शिक्षा में वृद्धि की दिशा में 6 नए सरकारी मेडिकल कॉलेज खोले जा चुके हैं और आने वाले तीन वर्षों में 6 और खोलने की योजना है, जिससे कुल सरकारी मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़कर 19 और निजी कॉलेजों की संख्या 14 हो जाएगी। इस विस्तार से एमबीबीएस सीटें कुल 5,550 तक पहुँच गई हैं। कटनी, धार, पन्ना एवं बेतूल जिलों में सार्वजनिक-निजी साझेदारी (PPP) मोड में नए मेडिकल कॉलेज बनेंगे। इसके अलावा सागर, शहडोल, बालाघाट व नीमच में नए आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज खोलने और 12 जिलों में आयुष अस्पताल खोलने की योजना चल रही है। जन-रोग नियंत्रण के लिए जिला स्तर पर एकीकृत उपचार केंद्र खोले जाएंगे और भोपाल-इंदौर में अत्याधुनिक टीबी अस्पताल स्थापित किए जाएंगे। प्रदेश में 38 माताओं के देहदान पर उन्हें सरकार की ओर से गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया है, जिससे लोगों में स्वास्थ्य संदेश की sensitization बढ़ी है।
महिला सशक्तिकरण
महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं। ‘लाडली बहना’ योजना के तहत गर्भवती महिलाओं को प्रति माह ₹1,500 की आर्थिक सहायता दी जा रही है (पूर्व में ₹1,250)। सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए आरक्षण 35% किया गया है। मातृ वंदना योजना के अंतर्गत 9.70 लाख से अधिक गर्भवती महिलाओं को ₹512 करोड़ से अधिक की सहायता राशि प्रदान की गई है, जो देश में सबसे अधिक है। चयन पोर्टल के माध्यम से आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की पहली बार ऑनलाइन भर्ती की गई है, जिसमें 2,027 कार्यकर्ताओं और 17,477 सहायिकाओं की नियुक्ति हो चुकी है। आंगनवाड़ी केंद्रों को मजबूत करने के लिए 12,670 मिनी आंगनवाड़ी केंद्रों का मुख्य केंद्र में विलय किया गया और 747 नए केंद्र स्वीकृत किए गए हैं। छात्राओं की स्वास्थ्य जरूरतों के लिए 20 लाख से अधिक लड़कियों के खातों में सैनेटरी पैड योजना के तहत ₹61.12 करोड़ से अधिक की राशि स्थानांतरित की गई है। मुख्यमंत्री वत्सल्य योजना के अंतर्गत संकटग्रस्त महिलाओं को आर्थिक सहायता दी गई है और ‘सुमन सखी’ चैटबॉट जैसी डिजिटल पहल शुरू की गई है ताकि महिलाएं सुरक्षित मातृत्व के दौरान मार्गदर्शन पा सकें। लगभग 5 लाख महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से 62 लाख ग्रामीण बहनों को आत्मनिर्भर बनाया गया है। महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए 850 महिला उद्यमियों को 275 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी गई है। रेडीमेड गारमेंट उद्योग में 5,000 महिलाओं को प्रोत्साहन राशि देने का निर्णय लिया गया है। इसके अतिरिक्त ‘प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान’ की शुरूआत करते हुए ‘सुमन सखी’ चैटबॉट सेवा आरंभ की गई है, जिससे गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी जानकारी डिजिटल रूप से उपलब्ध हो सकेगी।
अनुसूचित जनजाति कल्याण
आदिवासी वर्ग के सर्वांगीण विकास पर विशेष जोर दिया गया है। 2024-25 के बजट में जनजातीय विकास के लिए कुल ₹40,804 करोड़ का प्रावधान किया गया, जो पिछले वर्ष से 23.4% अधिक है। प्रधानमंत्री वन-धन योजना के तहत 20 जिलों में 126 वन-धन केंद्र स्थापित किए गए हैं। प्रधानमंत्री जन-मन कार्यक्रम से जुड़े 98.30 करोड़ रुपये और धरती आबा योजना के तहत 401.56 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का उद्घाटन/शिलान्यास किया गया है। आदिवासी आदर्श ग्राम योजना के अंतर्गत 7,300 से अधिक आदिवासी बहुल गांवों में विकास कार्य चल रहे हैं। वर्ष 2023-24 में अनुसूचित जनजाति वर्ग के मेधावी विद्यार्थियों को 505.66 करोड़ रुपये से अधिक का पोस्ट-मेट्रिक छात्रवृत्ति के रूप में वितरित किया गया है। प्रदेश में सांस्कृतिक-सांस्कृतिक परंपरा को सहेजने के लिए कई पहलें हुई हैं: पचमढ़ी वन्यजीव अभयारण्य का नामकरण राजा भभूत सिंह के नाम पर किया गया, वहीं जबलपुर हवाई अड्डा और इंदौर के मदनमहल फ्लाईओवर का नाम वीरांगना रानी दुर्गावती के नाम पर रखा गया है। विशेष पिछड़ी आदिवासी वर्ग के युवाओं को पुलिस एवं सेना में भर्ती कराने के लिए बैगा-भैरिया-सहिरा बटालियन का गठन किया गया है। चिंदवाड़ा व जबलपुर में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के नाम पर संग्रहालय खोले गए और भगोईया उत्सव को राज्य दिवस घोषित किया गया है। आगे की योजनाओं में सीधी-सिंगरौली में बैगा विकास प्राधिकरण का गठन और खंडवा के खालवा में देश का पहला आदिवासी छात्रावास स्थापित करना शामिल है।
अवसंरचना एवं शहरी विकास
सड़कों, रेलवे, हवाई मार्ग और शहरी परिवहन सहित बुनियादी ढांचे का विकास रफ्तार पकड़ा है। वर्ष 2025-26 में 4,078 किमी सड़क निर्माण का लक्ष्य रखा गया है और अगले पाँच वर्षों में 1,00,000 किमी नई सड़कें बनने की योजना है। मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 8,565 गांवों को जोड़ने के लिए 19,378 किमी सड़क निर्माण की स्वीकृति दी गई है। अप्रैल 2025 में केंद्र सरकार ने मध्यप्रदेश के चार प्रमुख सड़क परियोजनाओं के लिए ₹4,300 करोड़ से अधिक की मंजूरी दी है। उज्जैन-जावरा 4-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे (₹5,017 करोड़) और उज्जैन-इंदौर 4-लेन सड़कों (₹1,692 करोड़) का भूमिपूजन किया गया। भोपाल-खंडवा आर्थिक गलियारा 4-लेन सड़क हेतु ₹3,589 करोड़ स्वीकृत हुए और आगरा-ग्वालियर हाई-स्पीड 6-लेन कॉरिडोर का प्रस्तावित काम चल रहा है। पिछले वर्ष NHAI ने प्रदेश में ₹15,000 करोड़ की 850 किमी सड़कों की स्वीकृति दी, जिनमें से 520 किमी निर्माण पूरा हुआ है, जो देश में सर्वाधिक है। वर्तमान में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में ₹48,178 करोड़ की 73 परियोजनाएँ (कुल 2,514 किमी) निर्माणाधीन हैं। रेल परिवहन में मेट्रो सेवा भी शुरू हो चुकी है: इंदौर में मेट्रो का वाणिज्यिक परिचालन मई 2025 में और भोपाल में 21 दिसंबर 2025 से होगा। हवाई यात्रा के क्षेत्र में रीवा-दतिया-सतना के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों के बाद प्रदेश में कुल 8 एयरपोर्ट हो गए हैं। हाल ही में रीवा-दिल्ली एवं रीवा-इंदौर हवाई सेवाएं शुरू हुई हैं और उज्जैन एयरपोर्ट के विकास अनुबंध पर हस्ताक्षर हो गए हैं। शहरी विकास के लिए मध्यप्रदेश महानगर नियोजन अधिनियम-2025 पारित हुआ है, जिसके तहत इंदौर-उज्जैन-देवास-धार और भोपाल-सीहोर-रायसेन-विदिशा को दो महा-नगर क्षेत्र बनाया जाएगा। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 में 10 लाख से अधिक आवास बन रहे हैं; पिछले दो वर्षों में 2.65 लाख लाभार्थियों को ₹1,749 करोड़ से अधिक सीधे उनके बैंक खातों में भेजे गए हैं। 'दीनदयाल रसोई केंद्रों' की संख्या 56 से बढ़ाकर 191 की गई है, जिससे 10,000 से अधिक महिला स्वयं सहायता समूह गठित हुए और एक लाख से अधिक गरीब परिवारों को सहायता मिली है। प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के अंतर्गत 2.9 लाख से अधिक लघु उद्यमियों को ₹1,122 करोड़ से अधिक का ऋण उपलब्ध कराया गया है। इनमें से कई सुधार योजनाएं जैसे 'किचन गार्डन' पहलें, शहरी नवाचार कार्यक्रम आदि भी शुरू की गई हैं।

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