560 करोड़ बैंक घोटाला: IAS पंकज अग्रवाल को राहत नहीं, CBI कोर्ट ने खारिज की जमानत याचिका
सरकारी खातों से जुड़े फंड डायवर्जन मामले में जांच जारी, CBI ने बताई अहम भूमिका; अदालत ने फिलहाल जमानत देने से किया इनकार
हरियाणा के चर्चित 560 करोड़ रुपये के बैंक घोटाला मामले में गिरफ्तार वरिष्ठ आईएएस अधिकारी पंकज अग्रवाल को पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत से राहत नहीं मिली है। अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। अब पंकज अग्रवाल को फिलहाल जेल में ही रहना होगा।
मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की ओर से कई दलीलें पेश की गईं। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद जमानत देने से इनकार कर दिया।
पंकज अग्रवाल ने दी थी प्रशासनिक मंजूरी की दलील
सुनवाई के दौरान आईएएस अधिकारी पंकज अग्रवाल की ओर से अदालत में कहा गया कि उनकी भूमिका केवल प्रशासनिक स्तर तक सीमित थी।
बचाव पक्ष ने दलील दी कि उन्होंने सरकारी खातों को एक बैंक से दूसरे बैंक में ट्रांसफर करने की प्रक्रिया को मंजूरी दी थी। उनके अनुसार, इस फैसले में उनका कोई व्यक्तिगत लाभ नहीं था और उनके खिलाफ कोई प्रत्यक्ष आपराधिक साक्ष्य नहीं है।
बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि जांच में सहयोग किया जा रहा है और ऐसे में उन्हें जमानत दी जानी चाहिए।
CBI ने जमानत का किया विरोध
वहीं, सीबीआई ने पंकज अग्रवाल की जमानत याचिका का विरोध किया।
जांच एजेंसी ने अदालत में कहा कि यह मामला केवल बैंक बदलने की प्रशासनिक मंजूरी तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी धन के कथित गलत इस्तेमाल और फंड डायवर्जन से जुड़ा हुआ है।
सीबीआई के अनुसार, जांच में सामने आया है कि पंकज अग्रवाल की मंजूरी के बाद सरकारी विभागों के खातों को नियमों की अनदेखी करते हुए IDFC First Bank में खोला गया।
जांच एजेंसी का आरोप है कि इसके बाद सरकारी धन से जुड़े खातों में संदिग्ध लेनदेन हुए और रकम को अलग-अलग माध्यमों से ट्रांसफर किया गया।
CBI का दावा- साजिश में महत्वपूर्ण भूमिका
सीबीआई ने अदालत को बताया कि मामले की जांच के दौरान ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिनसे पंकज अग्रवाल की भूमिका की जांच जरूरी है।
जांच एजेंसी का दावा है कि वह इस पूरे मामले में शामिल मुख्य आरोपियों के संपर्क में थे और सरकारी धन के डायवर्जन की जानकारी होने के बावजूद जरूरी कार्रवाई नहीं की गई।
सीबीआई ने अदालत में यह भी कहा कि मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है और कई वित्तीय लेनदेन, दस्तावेजों और अन्य पहलुओं की जांच जारी है।
560 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच में कई पहलू शामिल
यह मामला सरकारी धन से जुड़े कथित अनियमित लेनदेन और बैंक खातों के संचालन से जुड़ा हुआ है।
सीबीआई इस मामले में यह पता लगाने में जुटी है कि सरकारी विभागों के खातों से रकम का इस्तेमाल किस तरह किया गया और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।
जांच एजेंसी वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक लेनदेन और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच कर रही है।
पंकज अग्रवाल रह चुके हैं कई महत्वपूर्ण पदों पर
आईएएस अधिकारी पंकज अग्रवाल हरियाणा सरकार में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं।
वह राज्य सरकार में स्कूल शिक्षा विभाग और कृषि विभाग के प्रधान सचिव जैसे अहम पदों पर रह चुके हैं।
प्रशासनिक सेवा में लंबे अनुभव के कारण उनकी गिरफ्तारी के बाद यह मामला चर्चा में आया था।
अदालत ने माना- जांच जारी, इसलिए जमानत नहीं
विशेष सीबीआई अदालत ने मामले की गंभीरता और जांच की स्थिति को देखते हुए जमानत याचिका खारिज कर दी।
अदालत के फैसले के बाद अब सीबीआई आगे की जांच जारी रखेगी। जांच एजेंसी इस मामले में अन्य आरोपियों की भूमिका, वित्तीय लेनदेन और दस्तावेजों की भी पड़ताल कर रही है।
आगे क्या होगा?
जमानत याचिका खारिज होने के बाद पंकज अग्रवाल को न्यायिक हिरासत में रहना होगा। हालांकि, उनके पास आगे उच्च अदालत में जमानत के लिए अपील करने का विकल्प मौजूद रहेगा।
वहीं सीबीआई की जांच पूरी होने के बाद ही मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई और आरोपों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
news desk MPcg