लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर 18 दिन में 84 जगह मरम्मत, सड़क धंसने को लेकर उठे सवाल
63 किमी लंबे एक्सप्रेसवे पर कई हिस्सों में आई खराबी; NHAI ने जांच के लिए IIT खड़गपुर की टीम को जिम्मेदारी दी
लखनऊ/कानपुर। उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, एक्सप्रेसवे शुरू होने के कुछ ही दिनों बाद सड़क के कई हिस्सों में धंसाव और दरारें सामने आईं। 63 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे पर 18 दिनों के भीतर 84 स्थानों पर मरम्मत कार्य किए जाने की जानकारी सामने आई है।
मामले के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने निर्माण कंपनी PNC इंफ्राटेक लिमिटेड को नॉन-परफॉर्मर घोषित किया और कंपनी के तीन अधिकारियों पर कार्रवाई की गई। अब एक्सप्रेसवे की तकनीकी जांच के लिए IIT खड़गपुर की टीम को लगाया गया है।
कई जगह सड़क में दिखी दरार और धंसाव
रिपोर्ट के अनुसार, एक्सप्रेसवे की कानपुर और लखनऊ दोनों लेन पर कई जगह सड़क की सतह खराब हुई है। कानपुर लेन पर करीब 39 स्थानों पर पैचवर्क किया गया, जबकि लखनऊ लेन पर 45 जगह मरम्मत की गई।
मरम्मत के बावजूद कुछ हिस्सों में दोबारा दरारें आने की बात सामने आई है। लखनऊ से उन्नाव की ओर जाने वाली लेन पर इजरायल खेड़ा क्षेत्र में करीब 200 मीटर हिस्से में फिर से मरम्मत करनी पड़ी।
इसके अलावा कुछ स्थानों पर सड़क के हिस्सों को उखाड़कर दोबारा बनाया गया। कुछ जगहों पर सड़क की ऊपरी परत में दरारें और गड्ढे दिखाई दिए।
ट्रक धंसने की घटना के बाद बढ़ी चिंता
रिपोर्ट के मुताबिक, 30 जुलाई को एक्सप्रेसवे पर गिट्टी से लदा एक ट्रक सड़क के हिस्से में धंस गया था। ट्रक को निकालने के दौरान वह पलट गया, जिससे वाहन मालिक को नुकसान हुआ।
स्थानीय स्तर पर मौजूद कर्मचारियों ने सड़क निर्माण और मरम्मत कार्य को लेकर सवाल उठाए। हालांकि, निर्माण गुणवत्ता से जुड़े अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होंगे।
विशेषज्ञों ने जताई निर्माण प्रक्रिया पर चिंता
सड़क निर्माण विशेषज्ञों ने शुरुआती निरीक्षण के आधार पर मिट्टी की परत और फाउंडेशन की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, एक्सप्रेसवे जैसी बड़ी परियोजनाओं में मिट्टी की परतों को निर्धारित मानकों के अनुसार बिछाकर रोलर से दबाना जरूरी होता है। यदि बेस लेयर में कमी रह जाती है तो बारिश और भारी वाहनों के दबाव से सड़क धंसने की समस्या आ सकती है।
कुछ इंजीनियरों ने आशंका जताई कि सड़क के नीचे की परतों में तकनीकी कमी होने के कारण यह समस्या सामने आ रही हो सकती है। हालांकि इसकी पुष्टि जांच के बाद ही होगी।
बारिश के बाद बढ़ी समस्या
एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्सों में बारिश के बाद सड़क के किनारे बने शोल्डर और जल निकासी व्यवस्था को लेकर भी समस्याएं सामने आईं।
सड़क किनारे बने शोल्डर का उद्देश्य बारिश के पानी से मुख्य सड़क को नुकसान से बचाना होता है, लेकिन कुछ स्थानों पर इसके क्षतिग्रस्त होने की बात सामने आई है।
इसके अलावा कुछ जगहों पर नालियों को भी नुकसान पहुंचने की जानकारी दी गई।
100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पर सवाल
NHAI ने एक्सप्रेसवे पर अधिकतम गति सीमा 100 किलोमीटर प्रति घंटे तय की है। लेकिन रिपोर्ट में कुछ हिस्सों पर सड़क की सतह असमान होने और वाहन चलाने में परेशानी होने का दावा किया गया है।
कुछ यात्रियों और निरीक्षण करने वालों ने सड़क पर उछाल महसूस होने की बात कही। विशेषज्ञों के अनुसार, एक्सप्रेसवे जैसी हाई-स्पीड सड़क पर सतह का पूरी तरह समतल होना बेहद जरूरी होता है।
PNC इंफ्राटेक को मिला था निर्माण का ठेका
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का निर्माण PNC इंफ्राटेक लिमिटेड ने किया है। कंपनी को वर्ष 2022 में इस परियोजना का ठेका मिला था।
कंपनी को लेकर पहले भी विवाद सामने आ चुके हैं। वर्ष 2024 में कंपनी और उसकी कुछ सहयोगी कंपनियों पर NHAI के नए टेंडरों में भाग लेने पर रोक लगाई गई थी। यह कार्रवाई CBI से जुड़े एक मामले के बाद हुई थी। हालांकि बाद में यह रोक हटा दी गई थी।
4700 करोड़ रुपये में तैयार हुआ एक्सप्रेसवे
63 किलोमीटर लंबे लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की कुल लागत करीब 4700 करोड़ रुपये बताई गई है।
इस हिसाब से एक किलोमीटर सड़क निर्माण की लागत लगभग 75 करोड़ रुपये आती है। यह उत्तर प्रदेश के प्रमुख एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट्स में शामिल है।
लखनऊ-कानपुर के बीच यात्रा समय कम करने के उद्देश्य से तैयार किए गए इस एक्सप्रेसवे को आधुनिक सुविधाओं के साथ विकसित किया गया है।
टोल दरों को लेकर भी चर्चा
एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद इसकी टोल दरों को लेकर भी चर्चा हुई। रिपोर्ट के अनुसार, लखनऊ-कानपुर के बीच एक्सप्रेसवे पर एक तरफ का टोल करीब 275 रुपये है, जबकि दोनों तरफ की यात्रा के लिए करीब 415 रुपये टोल निर्धारित किया गया है।
NHAI की कार्रवाई और आगे की जांच
सड़क में आई समस्याओं के बाद NHAI ने निर्माण कंपनी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसे नॉन-परफॉर्मर घोषित किया है। इसके साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई की गई है।
अब IIT खड़गपुर की विशेषज्ञ टीम एक्सप्रेसवे की तकनीकी जांच करेगी। जांच में सड़क निर्माण की गुणवत्ता, सामग्री, मिट्टी की परत, जल निकासी व्यवस्था और अन्य तकनीकी पहलुओं की समीक्षा की जाएगी।
जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सड़क धंसने के पीछे वास्तविक कारण क्या रहे और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे को उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में गिना जाता है। ऐसे में इसके शुरुआती दिनों में सामने आई तकनीकी समस्याओं ने निर्माण गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजरें IIT खड़गपुर की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।
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