वैभव सूर्यवंशी के पिता का भावुक बयान: हम 50 सोचते थे वो 100 बना देता था रिकॉर्ड नहीं, देश की जीत सबसे बड़ी
भारतीय क्रिकेट टीम में युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी के चयन ने पूरे बिहार में खुशी की लहर दौड़ा दी है। इस उपलब्धि पर उनके पिता संजीव सूर्यवंशी भावुक नजर आए और उन्होंने बेटे के संघर्ष, मेहनत और बचपन की यादों को साझा करते हुए कहा कि रिकॉर्ड से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण देश की जीत होती है। उन्होंने विश्वास जताया कि उनका बेटा भारत के लिए शानदार प्रदर्शन करेगा और देश का नाम रोशन करेगा।
संजीव सूर्यवंशी ने बताया कि उन्हें हमेशा विश्वास था कि वैभव एक दिन भारत के लिए जरूर खेलेगा, लेकिन इतनी कम उम्र में राष्ट्रीय टीम में जगह बना लेगा, इसकी उन्होंने भी कल्पना नहीं की थी। जैसे ही चयन की खबर मिली, पूरे परिवार में खुशी का माहौल बन गया और वैभव की मां भगवान का धन्यवाद करने पूजा में बैठ गईं।
उन्होंने बताया कि वैभव बचपन से ही क्रिकेट के प्रति बेहद समर्पित था। जब वह केवल पांच साल का था, तभी उसके हाथ में बल्ला थमा दिया गया था। नौ साल की उम्र में उसने स्थानीय टूर्नामेंट खेलना शुरू कर दिया और शुरुआत से ही लाल गेंद के क्रिकेट में अपनी प्रतिभा दिखाने लगा। परिवार ने उसकी प्रतिभा को पहचानते हुए हर संभव सहयोग किया और उसके सपनों को पूरा करने के लिए कई त्याग भी किए।
संजीव सूर्यवंशी ने मुस्कुराते हुए कहा कि जब परिवार 50 रन की उम्मीद करता था, तब वैभव 100 रन बना देता था। एक सीजन में उसने 40 से 50 शतक लगाए और 50 ओवर के एक मुकाबले में 332 रन बनाकर सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। बचपन से ही उसमें खुद को अलग साबित करने की ललक दिखाई देती थी।
उन्होंने यह भी बताया कि इंडियन प्रीमियर लीग खत्म होने के बाद उन्होंने बेटे से पूछा था कि वह दुनिया के दिग्गज गेंदबाजों का इतनी सहजता से सामना कैसे कर लेता है। इस पर वैभव ने आत्मविश्वास से जवाब दिया कि उसके लिए यह कोई मुश्किल काम नहीं है। पिता का कहना है कि बेटे का यही आत्मविश्वास और मेहनत उसे आगे बढ़ा रही है।
अपने पहले अंतरराष्ट्रीय मैच को लेकर संजीव सूर्यवंशी ने कहा कि वह अपने बेटे को भारत की जर्सी में खेलते देखने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनके लिए व्यक्तिगत रिकॉर्ड या शतक मायने नहीं रखते, सबसे बड़ी खुशी तब होगी जब वैभव अपने प्रदर्शन से टीम इंडिया को जीत दिलाएगा।
उन्होंने अन्य युवा खिलाड़ियों और अभिभावकों को भी संदेश देते हुए कहा कि हर बच्चे की अपनी अलग पहचान होती है। किसी की नकल करने के बजाय अपनी क्षमता पर विश्वास रखना चाहिए और लगातार मेहनत करनी चाहिए। उनका मानना है कि ईमानदार प्रयास और परिवार का सहयोग किसी भी खिलाड़ी को सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है।
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