वैभव सूर्यवंशी का ऐतिहासिक डेब्यू: 15 साल की उम्र में भारत के सबसे युवा क्रिकेटर बने, डेब्यू कैप मिलते ही छलके आंसू; इंग्लैंड ने 191 रन का लक्ष्य हासिल कर रचा नया रिकॉर्ड
भारत और इंग्लैंड के बीच मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड में खेले गए दूसरे टी-20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में भारतीय क्रिकेट को एक नया सितारा मिला। महज 15 वर्ष 99 दिन की उम्र में वैभव सूर्यवंशी ने भारतीय टीम के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण कर इतिहास रच दिया। डेब्यू कैप पहनते ही भावुक होकर उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। यह पल भारतीय क्रिकेट के सबसे यादगार डेब्यू क्षणों में शामिल हो गया।
हालांकि यह ऐतिहासिक उपलब्धि भारत की जीत में नहीं बदल सकी। पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत ने निर्धारित 20 ओवर में 190 रन बनाए और इंग्लैंड के सामने 191 रन का लक्ष्य रखा। जवाब में इंग्लैंड ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए चार विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया, जो टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत के खिलाफ इंग्लैंड का अब तक का सबसे बड़ा सफल रन चेज बन गया।
मैच में कई रिकॉर्ड बने, भावुक पल देखने को मिले और कुछ ऐसे घटनाक्रम भी सामने आए जिन्होंने मुकाबले को लंबे समय तक यादगार बना दिया।
वैभव सूर्यवंशी ने रचा इतिहास
भारतीय क्रिकेट में लंबे समय बाद किसी युवा खिलाड़ी के डेब्यू को लेकर इतनी चर्चा देखने को मिली। बिहार से आने वाले युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने केवल 15 साल 99 दिन की उम्र में भारत की सीनियर टीम के लिए पहला अंतरराष्ट्रीय मैच खेला।
इसके साथ ही उन्होंने दो बड़े रिकॉर्ड अपने नाम कर लिए।
भारत के लिए सबसे कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने वाले खिलाड़ी बने।
सचिन तेंदुलकर और शेफाली वर्मा का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया।
इससे पहले—
सचिन तेंदुलकर ने 16 वर्ष 205 दिन की उम्र में भारत के लिए डेब्यू किया था।
शेफाली वर्मा ने 15 वर्ष 239 दिन की उम्र में अंतरराष्ट्रीय पदार्पण किया था।
वैभव ने दोनों का रिकॉर्ड तोड़ते हुए नया भारतीय रिकॉर्ड स्थापित कर दिया।
दुनिया के चौथे सबसे युवा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर
सिर्फ भारत ही नहीं, विश्व क्रिकेट में भी वैभव सूर्यवंशी का नाम अब सबसे कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने वाले खिलाड़ियों की सूची में शामिल हो गया है।
उपलब्ध अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड के अनुसार—
जर्सी की निया चार्लोट ग्रेग सबसे कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने वाली खिलाड़ी हैं। उन्होंने 2019 में 11 वर्ष 40 दिन की उम्र में टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेला था और उनके नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड भी दर्ज है।
पुरुष क्रिकेटरों में रोमानिया के मारियन गेरासिम ने 14 वर्ष 16 दिन की उम्र में अंतरराष्ट्रीय टी-20 डेब्यू किया था।
वैभव सूर्यवंशी अब इस सूची में दुनिया के सबसे युवा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों में शामिल हो गए हैं।
डेब्यू कैप मिलते ही छलक पड़े आंसू
मैच से पहले भारतीय टीम के ड्रेसिंग रूम में बेहद भावुक दृश्य देखने को मिला।
भारतीय टीम के उपकप्तान तिलक वर्मा ने वैभव सूर्यवंशी को डेब्यू कैप सौंपी। जैसे ही उन्होंने भारतीय टीम की कैप पहनी, पूरा ड्रेसिंग रूम तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
अभिषेक शर्मा, ईशान किशन, अर्शदीप सिंह सहित पूरी टीम ने उन्हें बधाई दी। वर्षों के संघर्ष और सपनों के सच होने का वह पल वैभव के लिए बेहद भावुक था। कैप पहनने के बाद उनकी आंखें नम हो गईं और वे अपने आंसू नहीं रोक सके।
यह दृश्य सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हुआ।
पहली ही पारी में दिखाई निडर बल्लेबाजी
वैभव सूर्यवंशी ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत आत्मविश्वास के साथ की।
उन्होंने केवल 10 गेंदों में 14 रन बनाए और अपनी पारी के दौरान दो शानदार छक्के लगाए।
सबसे खास बात यह रही कि उन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की तीसरी गेंद पर ही छक्का जड़ दिया।
यह छक्का उन्होंने दुनिया के सबसे तेज गेंदबाजों में शामिल जोफ्रा आर्चर की गेंद पर लगाया। घुटना टेककर खेला गया यह शॉट दर्शकों के लिए यादगार बन गया और इसने युवा बल्लेबाज के आत्मविश्वास की झलक दिखाई।
डेब्यू मैच में बना अनचाहा रिकॉर्ड
हालांकि वैभव की पारी ज्यादा लंबी नहीं चल सकी।
वे विल जैक्स की गेंद पर विकेटकीपर जोस बटलर द्वारा स्टंप आउट कर दिए गए।
इसके साथ ही वे टी-20 अंतरराष्ट्रीय डेब्यू मैच में स्टंप आउट होने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज बन गए।
यह एक अनचाहा रिकॉर्ड जरूर रहा, लेकिन उनकी निडर बल्लेबाजी ने क्रिकेट विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींचा।
हैरी ब्रूक की खेल भावना ने जीता दिल
मैच की शुरुआत में एक बेहद खूबसूरत खेल भावना भी देखने को मिली।
भारतीय पारी के दौरान वैभव सूर्यवंशी के जूते का फीता खुल गया। इंग्लैंड के कप्तान हैरी ब्रूक स्वयं उनके पास पहुंचे और झुककर उनके जूते का फीता बांध दिया।
यह दृश्य कैमरे में कैद हुआ और सोशल मीडिया पर खूब सराहा गया। क्रिकेट प्रेमियों ने इसे खेल भावना और आपसी सम्मान का शानदार उदाहरण बताया।
भारत ने रखा 191 रन का लक्ष्य
भारत ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया।
मध्यक्रम के बल्लेबाजों की उपयोगी पारियों की बदौलत भारतीय टीम ने निर्धारित 20 ओवर में 190 रन बनाए और इंग्लैंड के सामने 191 रन का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रखा।
हालांकि भारतीय गेंदबाज इस स्कोर का बचाव नहीं कर सके।
इंग्लैंड ने बनाया नया इतिहास
लक्ष्य का पीछा करते हुए इंग्लैंड ने आक्रामक बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया और चार विकेट खोकर मुकाबला जीत लिया।
इसके साथ ही इंग्लैंड ने भारत के खिलाफ टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपना सबसे बड़ा सफल रन चेज दर्ज किया।
इससे पहले भारत के खिलाफ इंग्लैंड का सबसे बड़ा सफल लक्ष्य 178 रन था, जिसे उसने वर्ष 2012 में मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में हासिल किया था।
अब 191 रन का लक्ष्य हासिल कर इंग्लैंड ने अपना ही रिकॉर्ड तोड़ दिया।
अर्शदीप सिंह ने पहली गेंद पर दिलाई सफलता
भारतीय टीम ने मैच की शानदार शुरुआत की।
तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह ने इंग्लैंड की पारी की पहली ही गेंद पर सलामी बल्लेबाज फिल सॉल्ट को आउट कर दिया।
सॉल्ट बिना खाता खोले विकेटकीपर ईशान किशन के हाथों कैच आउट हुए।
यह भारत के लिए आदर्श शुरुआत थी, लेकिन बाद में इंग्लैंड के बल्लेबाजों ने मैच का रुख बदल दिया।
रवि बिश्नोई का महंगा स्पेल
भारतीय स्पिनर रवि बिश्नोई का यह मुकाबला बेहद महंगा साबित हुआ।
उन्होंने अपने एक ओवर में 29 रन खर्च कर दिए।
इस ओवर में—
दो साइड-लाइन नो-बॉल फेंकीं।
दोनों फ्री-हिट गेंदों पर बल्लेबाज ने छक्के लगाए।
इंग्लैंड के बल्लेबाज जैकब बेथेल ने तीन छक्के जड़ दिए।
29 रन का यह ओवर भारतीय टी-20 इतिहास के सबसे महंगे ओवरों में शामिल हो गया।
भारत के लिए इससे अधिक महंगा ओवर केवल शिवम दुबे ने फेंका था, जिन्होंने 2020 में न्यूजीलैंड के खिलाफ एक ओवर में 34 रन दिए थे।
मैच के अन्य यादगार पल
मुकाबले के दौरान कई रोचक घटनाएं भी देखने को मिलीं—
टॉस के दौरान तेज हवा में कप्तान श्रेयस अय्यर की कैप उड़ गई।
जोफ्रा आर्चर ने तिलक वर्मा का कैच पकड़ने की कोशिश की, लेकिन रिप्ले में गेंद पहले जमीन छूती दिखाई दी और बल्लेबाज को जीवनदान मिला।
इंग्लैंड के बल्लेबाजों ने मध्य ओवरों में तेजी से रन बनाकर मुकाबले का रुख अपने पक्ष में कर लिया।
भारतीय क्रिकेट को मिला भविष्य का सितारा
भले ही भारत यह मुकाबला हार गया, लेकिन वैभव सूर्यवंशी का डेब्यू भारतीय क्रिकेट के लिए सबसे सकारात्मक पहलू रहा।
15 वर्ष की उम्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव झेलते हुए निडर बल्लेबाजी करना और दुनिया के सर्वश्रेष्ठ तेज गेंदबाजों में शामिल जोफ्रा आर्चर के खिलाफ छक्का लगाना उनके आत्मविश्वास और प्रतिभा का प्रमाण माना जा रहा है।
क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैभव निरंतर प्रदर्शन करते हैं और अपने खेल में परिपक्वता लाते हैं, तो वे आने वाले वर्षों में भारतीय क्रिकेट के प्रमुख बल्लेबाजों में शामिल हो सकते हैं।
news desk MPcg