भोजपुर में बारिश के बीच वज्रपात का कहर: वार्ड सदस्य समेत चार लोगों की दर्दनाक मौत, चार गंभीर झुलसे; खेतों में धान रोप रहे किसानों पर टूटी बिजली, पूरे जिले में मातम

भोजपुर में बारिश के बीच वज्रपात का कहर: वार्ड सदस्य समेत चार लोगों की दर्दनाक मौत, चार गंभीर झुलसे; खेतों में धान रोप रहे किसानों पर टूटी बिजली, पूरे जिले में मातम

बिहार के भोजपुर जिले में सोमवार को मानसूनी बारिश के बीच आकाशीय बिजली (वज्रपात) ने भीषण तबाही मचा दी। जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में कुछ ही घंटों के भीतर ठनका (बिजली) गिरने की चार अलग-अलग घटनाओं में एक निर्वाचित वार्ड सदस्य समेत चार लोगों की मौत हो गई, जबकि चार अन्य लोग गंभीर रूप से झुलस गए। घायलों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है।

सभी घटनाएं उस समय हुईं जब किसान और ग्रामीण खेतों में धान की रोपाई कर रहे थे। लगातार बारिश के बीच अचानक तेज गर्जना और बिजली गिरने से किसी को संभलने का मौका नहीं मिला। कुछ लोग मौके पर ही बेहोश होकर गिर पड़े, जबकि कई गंभीर रूप से झुलस गए। हादसों के बाद गांवों में चीख-पुकार मच गई और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

प्रशासन ने घटनाओं की पुष्टि करते हुए लोगों से खराब मौसम के दौरान खेतों, खुले मैदानों और पेड़ों के नीचे जाने से बचने की अपील की है।

मानसून के बीच बढ़ा वज्रपात का खतरा

इन दिनों बिहार में दक्षिण-पश्चिम मानसून पूरी तरह सक्रिय है। कई जिलों में लगातार बारिश हो रही है, जिसके साथ गरज-चमक और वज्रपात की घटनाएं भी तेजी से बढ़ी हैं।

भोजपुर जिले में सोमवार सुबह मौसम अचानक बदला। तेज बारिश के साथ बादलों की लगातार गर्जना शुरू हुई और कुछ ही समय बाद जिले के अलग-अलग इलाकों में आकाशीय बिजली गिरने की चार बड़ी घटनाएं सामने आईं।

विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के दौरान खेतों में काम कर रहे किसानों पर वज्रपात का खतरा सबसे अधिक रहता है क्योंकि धान की रोपाई के दौरान किसान खुले और पानी से भरे खेतों में लंबे समय तक काम करते हैं।

पहली घटना: वार्ड सदस्य की मौके पर मौत, दंपती गंभीर रूप से झुलसे

सबसे दर्दनाक घटना आयर थाना क्षेत्र के असुधन मठिया गांव में हुई।

गांव के किसान और मजदूर खेत में धान की रोपाई कर रहे थे। इसी दौरान अचानक तेज आवाज के साथ आकाशीय बिजली गिरी।

इस हादसे में बरनांव पंचायत के वार्ड संख्या-11 के निर्वाचित वार्ड सदस्य 45 वर्षीय भिखारी सिंह की घटनास्थल पर ही मौत हो गई।

भिखारी सिंह गांव में एक सक्रिय जनप्रतिनिधि के रूप में जाने जाते थे। उनकी अचानक मौत से पूरे गांव में शोक की लहर फैल गई।

इसी घटना में खेत में मौजूद 50 वर्षीय ललन सिंह और उनकी 40 वर्षीय पत्नी शिवकुमारी देवी गंभीर रूप से झुलस गए।

स्थानीय ग्रामीणों ने दोनों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका इलाज जारी है।

दूसरी घटना: खेत में रोपाई कर रही युवती की मौत

दूसरी घटना गड़हनी थाना क्षेत्र के मदुरी गांव में हुई।

यहां 18 वर्षीय नंदनी कुमारी अपनी छोटी बहन और अन्य महिलाओं के साथ धान की रोपाई कर रही थी।

अचानक तेज बिजली गिरने से नंदनी उसकी चपेट में आ गई और उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

इस हादसे में उसकी 15 वर्षीय छोटी बहन चांदनी कुमारी तथा गांव की एक अन्य किशोरी भी गंभीर रूप से घायल हो गईं।

दोनों का अस्पताल में उपचार चल रहा है।

परिवार के लोगों ने बताया कि कुछ ही क्षण पहले सभी सामान्य रूप से खेत में काम कर रहे थे, लेकिन अचानक हुए वज्रपात ने पूरे परिवार की खुशियां छीन लीं।

तीसरी घटना: चरपोखरी में किसान की मौत

तीसरी घटना चरपोखरी थाना क्षेत्र के खराटी गांव में हुई।

यहां 33 वर्षीय किसान गोविंद कुमार खेत में धान की रोपाई कर रहे थे।

अचानक बिजली गिरने से वे गंभीर रूप से झुलस गए और मौके पर ही उनकी मौत हो गई।

ग्रामीण उन्हें अस्पताल ले जाने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन तब तक उनकी सांसें थम चुकी थीं।

चौथी घटना: हसन बाजार में किसान ने गंवाई जान

चौथी घटना हसन बाजार थाना क्षेत्र के बसमनपुर गांव में हुई।

यहां 57 वर्षीय किसान जमींदार सिंह खेत में कृषि कार्य कर रहे थे।

अचानक हुए वज्रपात में वे भी चपेट में आ गए और घटनास्थल पर ही उनकी मौत हो गई।

कुछ ही घंटों के भीतर जिले के चार अलग-अलग हिस्सों में चार लोगों की मौत से पूरे भोजपुर जिले में शोक का माहौल बन गया।

हादसों के बाद गांवों में पसरा मातम

चारों घटनाओं के बाद प्रभावित गांवों में मातम छा गया।

जहां कुछ परिवारों ने अपने घर के मुखिया को खो दिया, वहीं कुछ परिवारों की युवा बेटियां असमय मौत का शिकार हो गईं।

मृतकों के घरों में परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

ग्रामीणों ने बताया कि बारिश के मौसम में खेती का काम रोकना संभव नहीं होता, इसलिए किसान मौसम खराब होने के बावजूद खेतों में काम करने को मजबूर रहते हैं।

घायलों का इलाज जारी

चारों घटनाओं में झुलसे लोगों को तत्काल स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों में भर्ती कराया गया।

डॉक्टरों के अनुसार कुछ घायलों की हालत गंभीर बनी हुई है।

चिकित्सक लगातार उनकी निगरानी कर रहे हैं।

प्रशासन मौके पर पहुंचा

हादसों की सूचना मिलते ही संबंधित थाना पुलिस, अंचल प्रशासन और जिला प्रशासन के अधिकारी घटनास्थलों पर पहुंचे।

अधिकारियों ने मृतकों के परिजनों से मुलाकात की तथा राहत और सहायता का भरोसा दिलाया।

शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है।

क्यों बढ़ जाती हैं वज्रपात की घटनाएं?

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार मानसून के दौरान बादलों में अत्यधिक विद्युत आवेश बनने पर आकाशीय बिजली गिरती है।

खुले खेत, जलभराव वाले क्षेत्र, ऊंचे पेड़, बिजली के खंभे और खुले मैदान ऐसे स्थान हैं जहां वज्रपात का खतरा अधिक रहता है।

धान की खेती के दौरान किसान लंबे समय तक पानी से भरे खेतों में रहते हैं, जिससे जोखिम और बढ़ जाता है।

बिहार में हर साल जाती हैं सैकड़ों जानें

बिहार देश के उन राज्यों में शामिल है जहां हर वर्ष आकाशीय बिजली से बड़ी संख्या में लोगों की मौत होती है।

राज्य आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार अधिकांश मौतें खेतों में काम कर रहे किसानों, मजदूरों और खुले स्थानों पर मौजूद लोगों की होती हैं।

सरकार समय-समय पर लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाती है और मौसम विभाग मोबाइल अलर्ट भी जारी करता है, लेकिन इसके बावजूद ग्रामीण इलाकों में ऐसी घटनाएं लगातार सामने आती रहती हैं।

मौसम विभाग ने जारी की चेतावनी

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने बिहार के कई जिलों में अगले कुछ दिनों तक—

गरज-चमक,
मध्यम से भारी बारिश,
तथा आकाशीय बिजली गिरने

की संभावना जताई है।

लोगों से अपील की गई है कि खराब मौसम के दौरान अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें।

आकाशीय बिजली से बचाव के लिए जरूरी सावधानियां

आपदा प्रबंधन विभाग और मौसम विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार—

गरज-चमक शुरू होते ही खेतों से तुरंत बाहर निकलें।
किसी पेड़, बिजली के खंभे या टावर के नीचे खड़े न हों।
खुले मैदान में मोबाइल फोन का सामान्य उपयोग स्वयं में जोखिम नहीं माना जाता, लेकिन ऊंचे धातु ढांचों से दूरी रखें।
यदि सुरक्षित भवन उपलब्ध हो तो तुरंत उसके भीतर चले जाएं।
मौसम विभाग के अलर्ट और 'दामिनी' जैसे आधिकारिक बिजली चेतावनी ऐप का उपयोग करें।
बारिश के दौरान पानी से भरे खेतों में काम करने से बचें।
बिजली चमकने और गर्जना सुनाई देने के बीच समय कम हो तो इसे निकट वज्रपात का संकेत मानें और तुरंत सुरक्षित स्थान पर जाएं।
प्रशासन की अपील

जिला प्रशासन ने किसानों और ग्रामीणों से कहा है कि मौसम खराब होने पर खेती का काम कुछ समय के लिए रोक दें और किसी भी स्थिति में खुले खेतों, नदी किनारे या पेड़ों के नीचे शरण न लें।

प्रशासन ने यह भी कहा कि मौसम विभाग की आधिकारिक चेतावनियों का पालन करना ही ऐसी घटनाओं से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।

फिलहाल स्थिति

भोजपुर में हुई इन चार दर्दनाक घटनाओं ने एक बार फिर मानसून के दौरान आकाशीय बिजली के बढ़ते खतरे की गंभीरता को उजागर कर दिया है। एक ही दिन में चार परिवारों ने अपने प्रियजनों को खो दिया, जबकि कई लोग अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। प्रशासन राहत कार्यों में जुटा है और प्रभावित परिवारों को नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।