MSCI EM इंडेक्स से बाहर हुआ India Inc का दबदबा, HDFC बैंक और रिलायंस खिसके नीचे

MSCI EM इंडेक्स से बाहर हुआ India Inc का दबदबा, HDFC बैंक और रिलायंस खिसके नीचे

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेक्टर में आई जबरदस्त वैश्विक तेजी ने निवेश की दुनिया का पूरा समीकरण बदल दिया है। इसी बदलाव का बड़ा असर भारतीय कंपनियों पर भी देखने को मिला है। दुनिया के सबसे प्रमुख निवेश सूचकांकों में शामिल MSCI इमर्जिंग मार्केट्स (EM) इंडेक्स के टॉप-10 शेयरों की सूची से सभी भारतीय कंपनियां बाहर हो गई हैं। करीब 26 वर्षों में पहली बार ऐसा हुआ है कि भारत की कोई भी कंपनी इस प्रतिष्ठित सूची में जगह नहीं बना सकी।

यह घटनाक्रम भारतीय शेयर बाजार और कॉर्पोरेट जगत के लिए एक बड़ा संकेत माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक निवेशकों का रुझान तेजी से AI और हाई-टेक कंपनियों की ओर बढ़ रहा है, जिससे पारंपरिक दिग्गज कंपनियों की रैंकिंग प्रभावित हुई है।

HDFC बैंक और रिलायंस को बड़ा झटका

कुछ महीने पहले तक भारत की दो सबसे बड़ी कंपनियां HDFC बैंक और रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) MSCI EM इंडेक्स के टॉप-10 में शामिल थीं। मार्च 2026 में HDFC बैंक सातवें और रिलायंस इंडस्ट्रीज आठवें स्थान पर थी, लेकिन अब दोनों कंपनियां क्रमशः 11वें और 12वें स्थान पर पहुंच गई हैं।

इस बदलाव ने भारतीय बाजार में निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया है, क्योंकि लंबे समय बाद भारतीय कंपनियां इस प्रतिष्ठित सूची से बाहर हुई हैं।

AI सेक्टर ने बदला वैश्विक निवेश का रुख

विशेषज्ञों के अनुसार, दुनिया भर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में आई रिकॉर्ड तेजी ने निवेशकों की प्राथमिकताओं को बदल दिया है। AI आधारित तकनीकों में बढ़ते निवेश और भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए वैश्विक फंड मैनेजर तेजी से टेक कंपनियों की ओर रुख कर रहे हैं।

इसी कारण कई पारंपरिक कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी और इंडेक्स में रैंकिंग पर असर पड़ा है। AI सेक्टर की तेजी ने वैश्विक पूंजी प्रवाह का नया केंद्र तैयार कर दिया है।

MSCI EM इंडेक्स क्यों है इतना महत्वपूर्ण

MSCI इमर्जिंग मार्केट्स इंडेक्स दुनिया के सबसे ज्यादा ट्रैक किए जाने वाले निवेश सूचकांकों में से एक है। यह इंडेक्स 700 अरब डॉलर से अधिक की पैसिव फंड संपत्तियों के लिए बेंचमार्क का काम करता है। दुनिया भर के बड़े निवेशक और फंड हाउस इसी इंडेक्स के आधार पर उभरते बाजारों में निवेश का फैसला लेते हैं। ऐसे में किसी कंपनी का इस इंडेक्स के शीर्ष स्थानों पर होना उसकी वैश्विक निवेश आकर्षण क्षमता का महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है।

क्या भारत के लिए चिंता की बात

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव भारतीय अर्थव्यवस्था की कमजोरी नहीं, बल्कि वैश्विक निवेश रुझानों में आए बदलाव का परिणाम है। AI सेक्टर की असाधारण तेजी ने दुनिया भर के बाजारों का संतुलन बदल दिया है। हालांकि भारत की अर्थव्यवस्था और कॉर्पोरेट सेक्टर की दीर्घकालिक संभावनाएं अभी भी मजबूत मानी जा रही हैं।

फिलहाल निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि भारतीय कंपनियां आने वाले समय में टेक्नोलॉजी, डिजिटल इनोवेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में किस तरह अपनी प्रतिस्पर्धा बढ़ाती हैं और क्या वे दोबारा वैश्विक शीर्ष सूची में जगह बना पाती हैं।