पेपर लीक रोकने के लिए कानून और सख्त करने की तैयारी, कैबिनेट में संशोधन प्रस्ताव पर हो सकती है चर्चा; सजा बढ़ाने का प्रस्ताव

पेपर लीक रोकने के लिए कानून और सख्त करने की तैयारी, कैबिनेट में संशोधन प्रस्ताव पर हो सकती है चर्चा; सजा बढ़ाने का प्रस्ताव

प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल जैसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार कानून को और सख्त बनाने की तैयारी में है। नीट पेपर लीक विवाद के बीच सरकार पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 में संशोधन करने की योजना पर काम कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, शुक्रवार को होने वाली केंद्रीय कैबिनेट बैठक में इस संशोधन प्रस्ताव पर चर्चा हो सकती है।

प्रस्तावित बदलावों के तहत पेपर लीक में शामिल आरोपियों के लिए जेल की सजा और आर्थिक जुर्माने को बढ़ाने का प्रावधान किया जा सकता है। सरकार का उद्देश्य पेपर लीक करने वाले गिरोहों और परीक्षा प्रणाली में सेंध लगाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

पेपर लीक मामलों में बढ़ सकती है सजा

सूत्रों के अनुसार, नए संशोधन में पेपर लीक जैसे अपराधों में दोषियों के लिए न्यूनतम सजा बढ़ाने का प्रस्ताव है। इसमें दोषियों को कम से कम 10 साल तक की जेल और 1 करोड़ रुपये या उससे अधिक के जुर्माने का प्रावधान किए जाने की संभावना जताई जा रही है।

हालांकि, संशोधन के अंतिम प्रावधान कैबिनेट की मंजूरी और संसद में विधेयक पेश होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।

मौजूदा कानून में क्या है सजा का प्रावधान?

केंद्र सरकार ने सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों के इस्तेमाल को रोकने के लिए साल 2024 में पब्लिक एग्जामिनेशन एक्ट, 2024 लागू किया था।

मौजूदा कानून के अनुसार:

पेपर लीक या परीक्षा में अनुचित साधनों के इस्तेमाल के दोषी पाए जाने पर 3 से 5 साल तक की जेल और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
यदि पेपर लीक किसी संगठित गिरोह या नेटवर्क के जरिए किया जाता है, तो दोषियों को 5 से 10 साल तक की जेल और कम से कम 1 करोड़ रुपये के जुर्माने का प्रावधान है।
परीक्षा आयोजित कराने वाली संस्थाओं या सेवा प्रदाताओं द्वारा गड़बड़ी की जानकारी समय पर नहीं देने पर भी आर्थिक दंड का प्रावधान है।
फास्ट ट्रैक अदालतों का प्रस्ताव

सरकार पेपर लीक और परीक्षा संबंधी अपराधों के मामलों की सुनवाई तेज करने के लिए फास्ट ट्रैक अदालतों की व्यवस्था पर भी विचार कर रही है। इसका उद्देश्य ऐसे मामलों का जल्द निपटारा करना और दोषियों को समय पर सजा दिलाना है।

सूत्रों के मुताबिक, नए संशोधनों में जांच और न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के लिए कई प्रावधान जोड़े जा सकते हैं।

नीट पेपर लीक विवाद के बीच सरकार का कदम

पेपर लीक के खिलाफ सरकार का यह कदम ऐसे समय में सामने आ रहा है, जब नीट समेत कई प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों और विपक्षी दलों की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं।

नीट पेपर लीक मामले को लेकर देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन हुए हैं। प्रदर्शनकारी छात्र परीक्षा व्यवस्था में सुधार, दोषियों पर कार्रवाई और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।

संसद में पेश हो सकता है संशोधन विधेयक

सूत्रों के अनुसार, यदि कैबिनेट संशोधन प्रस्ताव को मंजूरी देती है तो सरकार इसे संसद के आगामी सत्र में पेश कर सकती है। विधेयक के पारित होने के बाद सार्वजनिक परीक्षाओं में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और सख्त हो सकती है।

सरकार का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में भरोसा बहाल करना

केंद्र सरकार का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाएं लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी होती हैं। पेपर लीक जैसी घटनाएं मेहनत करने वाले छात्रों को नुकसान पहुंचाती हैं और परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता को प्रभावित करती हैं।

प्रस्तावित संशोधन के जरिए सरकार का लक्ष्य पेपर लीक करने वाले अपराधियों, संगठित गिरोहों और परीक्षा प्रक्रिया में शामिल दोषी संस्थानों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

पेपर लीक कानून संशोधन: मुख्य बातें
कानून: पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024
संभावित बदलाव: सजा और जुर्माने में बढ़ोतरी
प्रस्तावित सजा: कम से कम 10 साल जेल और भारी जुर्माना
अन्य प्रस्ताव: फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए जल्द सुनवाई
अगला कदम: कैबिनेट मंजूरी के बाद संसद में विधेयक पेश किया जा सकता है