भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, CBI जांच की मांग तेज; न्यायिक जांच के आदेश के बीच बढ़ा विवाद
बिहार के भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में 17 जून को हुए चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले ने अब राष्ट्रीय स्तर पर तूल पकड़ लिया है। मामला देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच गया है, जहां एक जनहित याचिका दायर कर सुप्रीम कोर्ट से स्वतः संज्ञान लेने और पूरे प्रकरण की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई है।
याचिका में दावा किया गया है कि कथित मुठभेड़ की परिस्थितियां संदेह के घेरे में हैं और इसकी निष्पक्ष जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) या विशेष जांच दल (SIT) से कराई जानी चाहिए। साथ ही संबंधित पुलिस अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की मांग की गई है।
सुप्रीम कोर्ट में उठे संवैधानिक सवाल
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति की मौत तक सीमित नहीं है, बल्कि कानून के शासन, मानवाधिकारों और संवैधानिक सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि यदि मुठभेड़ की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो जनता का कानून व्यवस्था और न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा कमजोर हो सकता है।
मुख्यमंत्री ने दिए न्यायिक जांच के आदेश
मामले को लेकर बढ़ते राजनीतिक और सामाजिक दबाव के बीच बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पूरे प्रकरण की न्यायिक जांच कराने का निर्णय लिया है। सरकार ने संकेत दिया है कि हाईकोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में मामले की जांच कराई जाएगी ताकि तथ्यों को निष्पक्ष रूप से सामने लाया जा सके।
पुलिस मुख्यालय ने मांगे सभी दस्तावेज
एनकाउंटर के बाद बिहार पुलिस मुख्यालय भी सक्रिय हो गया है। सूत्रों के अनुसार, पुलिस मुख्यालय ने इस कार्रवाई से जुड़ी तीनों प्राथमिकी की प्रतियां और मृतक भरत तिवारी की मां आशा देवी द्वारा दिए गए आवेदन की कॉपी तलब की है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की विभागीय समीक्षा और जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। जांच एजेंसियां घटना के हर पहलू की पड़ताल कर रही हैं।
परिवार की CBI जांच की मांग
भरत तिवारी के परिजनों ने शुरुआत से ही पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। परिवार का आरोप है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच केवल किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा ही संभव है। मृतक की मां आशा देवी ने सार्वजनिक रूप से CBI जांच की मांग करते हुए कहा है कि उन्हें न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा है और सच्चाई सामने आनी चाहिए।
राजनीतिक गलियारों में भी गूंज
एनकाउंटर को लेकर बिहार की राजनीति भी गरमा गई है। जहां कुछ नेता पुलिस कार्रवाई को उचित बता रहे हैं, वहीं विपक्ष और कई सामाजिक संगठनों ने घटना की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। इस मुद्दे पर लगातार बयानबाजी हो रही है और मामला राज्य की कानून-व्यवस्था तथा पुलिस जवाबदेही से जुड़ी बड़ी बहस का रूप ले चुका है।
अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट पर
सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल होने के बाद अब सभी की निगाहें शीर्ष अदालत की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि अदालत मामले में हस्तक्षेप करती है तो जांच की दिशा और दायरा दोनों बदल सकते हैं। फिलहाल न्यायिक जांच, पुलिस समीक्षा और CBI जांच की मांग के बीच भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामला बिहार के सबसे चर्चित मामलों में शामिल हो गया है।
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