नीट पेपर लीक विवाद: सीजेपी ने प्रधानमंत्री को लिखा खुला पत्र, आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों के लिए 1 करोड़ रुपये मुआवजे की मांग

नीट पेपर लीक विवाद: सीजेपी ने प्रधानमंत्री को लिखा खुला पत्र, आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों के लिए 1 करोड़ रुपये मुआवजे की मांग

नीट-यूजी पेपर लीक विवाद के बीच अब छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और कथित आत्महत्या के मामलों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक खुला पत्र लिखकर उन नीट अभ्यर्थियों के परिवारों को एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग की है, जिन्होंने कथित तौर पर परीक्षा विवाद और उससे उत्पन्न मानसिक तनाव के बीच आत्महत्या की।

अपने पत्र में अभिजीत दीपके ने दावा किया है कि पिछले एक सप्ताह में 11 नीट अभ्यर्थियों की आत्महत्या हुई है, जिनमें से 5 मामलों की सूचना पिछले 48 घंटों के भीतर सामने आई। उन्होंने कहा कि परीक्षा में कथित अनियमितताओं और दोबारा परीक्षा की अनिश्चितता ने लाखों छात्रों पर मानसिक दबाव बढ़ाया है। हालांकि इन सभी आत्महत्याओं का प्रत्यक्ष संबंध नीट पेपर लीक विवाद से होने की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।

पत्र में सीजेपी ने केंद्र सरकार से मांग की है कि प्रभावित परिवारों को तत्काल आर्थिक सहायता प्रदान की जाए, क्योंकि कई परिवारों ने अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए बड़े शैक्षणिक ऋण लिए थे और अब वे आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। पार्टी का कहना है कि यह केवल आर्थिक सहायता का नहीं बल्कि सरकारी जवाबदेही का भी प्रश्न है।

अभिजीत दीपके ने अपने पत्र में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की जवाबदेही तय करने की भी मांग की है। उनका कहना है कि लगातार सामने आ रही परीक्षा संबंधी अनियमितताओं से देश की परीक्षा प्रणाली पर भरोसा कमजोर हुआ है और छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है।

गौरतलब है कि नीट-यूजी 2026 परीक्षा को लेकर पेपर लीक के आरोपों के बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए हैं। परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता, डिजिटल माध्यमों पर कथित लीक सामग्री और छात्रों के भविष्य को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। इस पूरे विवाद के बीच छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और परामर्श व्यवस्था को मजबूत करने की मांग भी तेज हुई है।

फिलहाल केंद्र सरकार की ओर से सीजेपी की मुआवजे संबंधी मांग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है। वहीं विभिन्न छात्र संगठनों और सामाजिक समूहों ने भी परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार, पारदर्शिता और मानसिक स्वास्थ्य सहायता तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।