खीर भवानी मेले में पहुंचे एलजी मनोज सिन्हा, माता राग्न्या देवी से मांगा शांति और समृद्धि का आशीर्वाद; बोले- 'कश्मीरियत की जीवंत पहचान है यह मेला'

खीर भवानी मेले में पहुंचे एलजी मनोज सिन्हा, माता राग्न्या देवी से मांगा शांति और समृद्धि का आशीर्वाद; बोले- 'कश्मीरियत की जीवंत पहचान है यह मेला'

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सोमवार को गांदरबल जिले के तुलमुल्ला स्थित विश्व प्रसिद्ध माता खीर भवानी (राग्न्या देवी) मंदिर में पूजा-अर्चना कर जम्मू-कश्मीर में स्थायी शांति, भाईचारे, समृद्धि और विकास की कामना की। ज्येष्ठ अष्टमी के अवसर पर आयोजित वार्षिक खीर भवानी मेले में हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी के बीच एलजी ने कहा कि यह आयोजन केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि कश्मीर की साझा संस्कृति, सामाजिक सौहार्द और 'कश्मीरियत' की भावना का जीवंत प्रतीक है।

पूजा-अर्चना के बाद पत्रकारों से बातचीत में मनोज सिन्हा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर की पहचान सदियों पुरानी आध्यात्मिक परंपराओं, सूफी-संतों की शिक्षाओं और विभिन्न समुदायों के बीच भाईचारे से रही है। उन्होंने कहा कि माता खीर भवानी का आशीर्वाद प्रदेश में शांति और विकास के वातावरण को और मजबूत करेगा। उन्होंने सभी नागरिकों के सुख, सुरक्षा और खुशहाली की कामना की।

कश्मीरी पंडितों की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र

तुलमुल्ला स्थित माता खीर भवानी मंदिर कश्मीरी पंडित समुदाय के सबसे पवित्र धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। यह मंदिर श्रीनगर से लगभग 25 किलोमीटर दूर गांदरबल जिले में स्थित है और माता राग्न्या देवी को समर्पित है। मंदिर परिसर एक पवित्र झरने के चारों ओर बना हुआ है, जिसके जल के रंग परिवर्तन को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। मंदिर का उल्लेख प्राचीन ग्रंथ राजतरंगिणी में भी मिलता है, जो इसकी ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता को दर्शाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता को खीर का भोग अर्पित किया जाता है, जिसके कारण इस मंदिर को "खीर भवानी" के नाम से जाना जाता है। कश्मीरी हिंदू समुदाय माता राग्न्या देवी को अपनी कुलदेवी के रूप में भी पूजता है।

हजारों श्रद्धालुओं ने लिया मेले में हिस्सा

इस वर्ष के मेले में शामिल होने के लिए जम्मू से बड़ी संख्या में श्रद्धालु घाटी पहुंचे। रिपोर्टों के अनुसार, मेले में भाग लेने के लिए 8,500 से अधिक श्रद्धालु 214 बसों के काफिले के साथ जम्मू से रवाना हुए थे। श्रद्धालु केवल तुलमुल्ला ही नहीं बल्कि कश्मीर के अन्य राग्न्या भगवती मंदिरों में भी दर्शन के लिए पहुंचे।

मंदिर परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। भक्तों ने हवन, पूजा और विशेष धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया तथा माता से परिवार और समाज की खुशहाली की कामना की।

व्यवस्थाओं की एलजी ने की सराहना

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने मेले के सफल आयोजन के लिए जिला प्रशासन, जम्मू-कश्मीर पुलिस, केंद्रीय सुरक्षा बलों, मंदिर प्रबंधन समिति और स्वयंसेवी संगठनों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सुरक्षा, स्वच्छता, बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाओं और यातायात प्रबंधन की उत्कृष्ट व्यवस्था की गई है।

एलजी ने कहा कि प्रशासन का प्रयास रहा कि देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। इसके लिए व्यापक स्तर पर समन्वय स्थापित किया गया।

सुरक्षा के रहे अभूतपूर्व इंतजाम

खीर भवानी मेले को देखते हुए प्रशासन ने बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की थी। मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में पुलिस, सीआरपीएफ और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की अतिरिक्त तैनाती की गई। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी निगरानी, मेडिकल कैंप, एम्बुलेंस सेवाएं और हेल्प डेस्क भी स्थापित किए गए।

हाल के वर्षों में घाटी में सुरक्षा व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं में हुए सुधारों के कारण मेले में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ी है। इससे धार्मिक पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिल रहा है।

कश्मीरियत और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक

अपने संबोधन में एलजी मनोज सिन्हा ने विशेष रूप से 'कश्मीरियत' की भावना का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि खीर भवानी मेला उस सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है, जहां विभिन्न समुदाय एक-दूसरे के धार्मिक आयोजनों में सहयोग करते हैं। यह आयोजन प्रदेश की गंगा-जमुनी तहजीब, सामाजिक समरसता और पारंपरिक भाईचारे को मजबूत करने का माध्यम बनता है।

उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर की असली पहचान उसकी विविधता, सहिष्णुता और साझा सांस्कृतिक विरासत में निहित है तथा खीर भवानी मेला उसी भावना को आगे बढ़ाता है।

ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व भी है विशेष

इतिहासकारों के अनुसार, खीर भवानी मंदिर का वर्तमान स्वरूप डोगरा शासकों महाराजा प्रताप सिंह और महाराजा हरि सिंह के संरक्षण में विकसित हुआ था। मंदिर परिसर में स्थित प्राचीन चिनार वृक्ष और पवित्र कुंड इसकी सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा हैं। वर्षों से यह स्थल कश्मीरी पंडित समुदाय के धार्मिक पुनर्मिलन और सांस्कृतिक जुड़ाव का केंद्र बना हुआ है।

शांति और विकास की कामना के साथ संपन्न हुआ आयोजन

एलजी मनोज सिन्हा ने अंत में कहा कि माता खीर भवानी के आशीर्वाद से जम्मू-कश्मीर निरंतर विकास और प्रगति के पथ पर आगे बढ़ेगा। उन्होंने प्रदेशवासियों से सामाजिक सौहार्द बनाए रखने और साझा सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने की अपील की।

खीर भवानी मेला एक बार फिर यह संदेश देने में सफल रहा कि धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता मिलकर जम्मू-कश्मीर की पहचान को मजबूत बनाते हैं।