NEET UG Re-Exam 2026: 2 मिनट की देरी पड़ी भारी, विदिशा में तीन छात्राएं परीक्षा से वंचित; बेटी को अंदर भेजने की गुहार लगाते पिता ने गेट पर पटका सिर

NEET UG Re-Exam 2026: 2 मिनट की देरी पड़ी भारी, विदिशा में तीन छात्राएं परीक्षा से वंचित; बेटी को अंदर भेजने की गुहार लगाते पिता ने गेट पर पटका सिर

मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में आयोजित NEET UG Re-Exam 2026 के दौरान एक बेहद भावुक और दर्दनाक घटना सामने आई। सरकारी गर्ल्स कॉलेज परीक्षा केंद्र पर तीन छात्राएं परीक्षा में शामिल नहीं हो सकीं। इनमें दो छात्राएं निर्धारित समय से केवल दो मिनट देरी से पहुंचीं, जबकि एक अन्य छात्रा गलत दस्तावेज लेकर परीक्षा केंद्र पहुंच गई। परीक्षा में प्रवेश नहीं मिलने से केंद्र के बाहर हंगामे जैसे हालात बन गए और एक छात्रा के पिता ने अधिकारियों से गुहार लगाते हुए परीक्षा केंद्र के गेट पर अपना सिर पटक लिया, जिससे वह घायल हो गए। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

1:30 बजे बंद हो गया प्रवेश, 1:32 बजे पहुंचीं छात्राएं

जानकारी के अनुसार, विदिशा की स्नेहा दुबे और कुरवाई की रागिनी विश्वकर्मा रविवार को सरकारी गर्ल्स कॉलेज परीक्षा केंद्र पर दोपहर 1:32 बजे पहुंचीं। NTA की आधिकारिक गाइडलाइन के अनुसार परीक्षा केंद्रों में प्रवेश की अंतिम समय सीमा दोपहर 1:30 बजे निर्धारित थी। इसके बाद किसी भी अभ्यर्थी को प्रवेश की अनुमति नहीं थी।

सुरक्षा कर्मियों ने निर्धारित समय समाप्त होने का हवाला देते हुए दोनों छात्राओं को केंद्र में प्रवेश देने से मना कर दिया। इसके बाद छात्राओं और उनके परिजनों ने अधिकारियों से हाथ जोड़कर अनुरोध किया कि उन्हें परीक्षा में बैठने दिया जाए, क्योंकि यह री-एग्जाम उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण था।

"एक साल बर्बाद हो जाएगा", रोती रहीं छात्राएं

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार छात्राएं लगातार अधिकारियों से कहती रहीं कि उनकी परीक्षा पहले ही एक बार रद्द हो चुकी है और अब दोबारा मौका छूटने पर उनका पूरा शैक्षणिक वर्ष प्रभावित हो सकता है। वीडियो में छात्राएं रोते हुए और परिवार के सदस्य अधिकारियों के सामने गुहार लगाते दिखाई देते हैं।

परिजनों ने बताया कि रास्ते में बारिश और यात्रा संबंधी बाधाओं के कारण उन्हें देरी हुई। रागिनी विश्वकर्मा के परिवार का कहना है कि वे लगभग 70 किलोमीटर दूर गांव से परीक्षा देने विदिशा पहुंचे थे। खराब मौसम के कारण समय पर केंद्र तक पहुंचना संभव नहीं हो सका।

बेटी के लिए गिड़गिड़ाते रहे पिता, फिर गेट पर पटक लिया सिर

स्थिति उस समय और अधिक भावुक हो गई जब रागिनी के पिता ने अधिकारियों से बार-बार अनुरोध करने के बावजूद सकारात्मक जवाब नहीं मिलने पर निराशा में परीक्षा केंद्र के गेट पर अपना सिर पटक लिया। सिर में चोट लगने के बाद उनके माथे से खून निकलने लगा और वह जमीन पर गिर पड़े।

घटना का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने छात्राओं और उनके परिवार के प्रति सहानुभूति जताई है। वहीं परीक्षा नियमों की कठोरता पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

अधिकारियों ने अंदर बुलाया, फिर भी नहीं दे सके परीक्षा

घटना की सूचना मिलने के बाद परीक्षा के नोडल अधिकारी और केंद्रीय विद्यालय की प्राचार्य गीता भदौरिया मौके पर पहुंचीं। उन्होंने स्थिति को देखते हुए दोनों छात्राओं को परीक्षा केंद्र के अंदर बुलवाया ताकि तकनीकी प्रक्रिया की जांच की जा सके।

हालांकि बाद में दोनों छात्राओं का बायोमेट्रिक सत्यापन (Thumb Verification) पूरा नहीं हो सका और उनकी उपस्थिति परीक्षा प्रणाली में दर्ज नहीं हो पाई। इसके चलते उन्हें परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं मिली।

तीसरी छात्रा भी रह गई परीक्षा से वंचित

इसी केंद्र पर एक तीसरी छात्रा भी परीक्षा नहीं दे सकी। अधिकारियों के अनुसार वह परीक्षा केंद्र पर पुराना एडमिट कार्ड लेकर पहुंची थी। दस्तावेजों में त्रुटि होने के कारण उसका सत्यापन नहीं हो सका और उसे भी परीक्षा से वंचित रहना पड़ा।

NTA ने लागू किए थे सख्त सुरक्षा नियम

NEET UG Re-Exam 2026 देशभर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच आयोजित किया गया। NTA ने परीक्षा केंद्रों पर AI आधारित निगरानी, CCTV मॉनिटरिंग, बायोमेट्रिक सत्यापन और सख्त प्रवेश नियम लागू किए थे ताकि परीक्षा की पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके। परीक्षा में देशभर के लगभग 22.7 लाख अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया।

NTA ने परीक्षा से पहले जारी एडवाइजरी में स्पष्ट किया था कि अभ्यर्थियों को समय से पहले केंद्र पहुंचना होगा और 1:30 बजे के बाद प्रवेश नहीं दिया जाएगा।

बायोमेट्रिक नियमों को लेकर उठे सवाल

इस घटना के बाद बायोमेट्रिक सत्यापन प्रक्रिया को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। NTA की पूर्व सलाह और परीक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों में कहा गया था कि यदि तकनीकी कारणों, खराब फिंगरप्रिंट गुणवत्ता या सर्वर समस्या के कारण बायोमेट्रिक सत्यापन विफल होता है तो निर्धारित प्रक्रिया और लिखित घोषणा के माध्यम से अभ्यर्थियों को परीक्षा देने की अनुमति दी जा सकती है।

हालांकि विदिशा केंद्र पर दोनों छात्राओं के मामले में क्या तकनीकी स्थिति रही और उन्हें अंतिम रूप से परीक्षा में शामिल क्यों नहीं किया जा सका, इसे लेकर प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण का इंतजार है।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

घटना का वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी बहस शुरू हो गई है। एक वर्ग का मानना है कि राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में नियमों का समान रूप से पालन आवश्यक है, जबकि दूसरे वर्ग का कहना है कि केवल दो मिनट की देरी पर छात्रों का भविष्य दांव पर लगाना मानवीय दृष्टिकोण से उचित नहीं है।

फिलहाल विदिशा की यह घटना लाखों अभ्यर्थियों के लिए एक बड़ी सीख बन गई है कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में समय, दस्तावेज और सत्यापन प्रक्रिया से जुड़ी छोटी सी चूक भी बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है।