महाराष्ट्र की सियासत में बड़ा सियासी भूचाल: ‘ऑपरेशन टाइगर’ के बीच उद्धव ठाकरे ने बुलाई आपात बैठक, शिवसेना (UBT) में टूट की आशंका तेज
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी संकट गहराता दिख रहा है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट के भीतर संभावित टूट और बड़े पैमाने पर सांसदों के पाला बदलने की अटकलों के बीच पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने सोमवार को अपने सांसदों और वरिष्ठ नेताओं की अहम बैठक बुलाई। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब ‘ऑपरेशन टाइगर’ के तहत शिवसेना (UBT) के कई सांसदों के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले खेमे में शामिल होने की चर्चा तेज है।
छह सांसदों के पाला बदलने की चर्चा
सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शिवसेना (UBT) के छह लोकसभा सांसदों के शिंदे गुट में जाने की संभावना जताई जा रही है। बताया जा रहा है कि ये सांसद पहले ही दिल्ली में लोकसभा स्पीकर से मुलाकात कर चुके हैं, जिसके बाद राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है।
शिंदे गुट के नेताओं का दावा है कि यह ‘ऑपरेशन टाइगर’ का हिस्सा है, जिसके तहत लगातार विपक्षी खेमे के सांसदों को अपने साथ जोड़ा जा रहा है। इस घटनाक्रम को शिवसेना के 2022 के विभाजन के बाद दूसरी बड़ी टूट के रूप में देखा जा रहा है।
उद्धव ठाकरे का कड़ा रुख
पार्टी में बढ़ते असंतोष के बीच उद्धव ठाकरे ने अपने सभी सांसदों और विधायकों को स्पष्ट संदेश देने के लिए बैठक बुलाई है। पार्टी नेतृत्व का कहना है कि संगठन को एकजुट रखना प्राथमिकता है और किसी भी तरह की टूट को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।
पार्टी ने पहले ही व्हिप जारी कर सभी सांसदों को बैठक में उपस्थित रहने का निर्देश दिया था, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कौन नेता पार्टी के साथ खड़ा है और कौन नहीं।
आदित्य ठाकरे का तीखा बयान
इस राजनीतिक हलचल के बीच शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे ने बागी सांसदों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि कुछ नेता अपनी “निष्ठा और राजनीतिक पहचान” को निजी लाभ के लिए दांव पर लगा रहे हैं।
आदित्य ठाकरे के इस बयान को पार्टी की ओर से सख्त संदेश के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें यह संकेत है कि आने वाले दिनों में संगठन विरोधी गतिविधियों पर कार्रवाई संभव है।
कांग्रेस का भाजपा पर निशाना
इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस ने भी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया है कि यह पूरा घटनाक्रम विपक्षी दलों को कमजोर करने की रणनीति का हिस्सा है।
कांग्रेस का कहना है कि ऐसे राजनीतिक ऑपरेशन लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हैं और इससे विपक्षी एकता को नुकसान पहुंचता है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और बढ़ता तनाव
विशेषज्ञों के अनुसार, यह पूरा घटनाक्रम 2022 में शिवसेना के विभाजन की याद दिलाता है, जब एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में बड़ी संख्या में विधायक पार्टी छोड़कर अलग गुट में चले गए थे। उसी के बाद महाराष्ट्र में सत्ता परिवर्तन हुआ था।
अब लोकसभा स्तर पर इसी तरह की संभावित टूट ने उद्धव ठाकरे खेमे की चिंता बढ़ा दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर यह सांसदों का पलायन वास्तविक रूप लेता है, तो शिवसेना (UBT) की राष्ट्रीय राजनीति में स्थिति कमजोर हो सकती है।
आगे क्या?
फिलहाल सभी की नजर उद्धव ठाकरे की बैठक और शिंदे गुट की अगली रणनीति पर टिकी है। आने वाले दिनों में यह साफ हो सकता है कि यह केवल राजनीतिक अटकलें हैं या महाराष्ट्र की राजनीति में एक और बड़ा बदलाव होने जा रहा है।
महाराष्ट्र की सियासत एक बार फिर उस मोड़ पर खड़ी है, जहां हर फैसला सत्ता समीकरणों को बदल सकता है।
news desk MPcg