फसल बीमा राशि से नाराज मंदसौर के किसान, सड़कों पर उतरे अन्नदाता; उचित मुआवजे की मांग को लेकर प्रदर्शन

फसल बीमा राशि से नाराज मंदसौर के किसान, सड़कों पर उतरे अन्नदाता; उचित मुआवजे की मांग को लेकर प्रदर्शन

खरीफ 2025 के क्लेम में कम राशि मिलने का आरोप, मल्हारगढ़ और भानपुरा क्षेत्र में किसानों का विरोध; चार दिन तक चला चक्काजाम

मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत मिली क्लेम राशि को लेकर किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। खरीफ सीजन 2025 की फसल बीमा राशि जारी होने के बाद जिले के कई इलाकों में किसानों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। किसानों का आरोप है कि प्राकृतिक आपदा, अवर्षा और फसलों में बीमारी के कारण भारी नुकसान हुआ, लेकिन बीमा कंपनी से मिलने वाली राशि नुकसान के मुकाबले काफी कम है।

मंदसौर जिले के मल्हारगढ़, भानपुरा सहित कई क्षेत्रों में किसानों ने फसल बीमा राशि को लेकर आवाज उठाई। किसानों का कहना है कि उन्होंने समय पर बीमा प्रीमियम जमा किया, लेकिन जब फसल नुकसान की भरपाई का समय आया तो उन्हें उम्मीद के मुताबिक मुआवजा नहीं मिला।

भानपुरा क्षेत्र में किसानों ने अपनी मांगों को लेकर लगातार प्रदर्शन किया। यहां किसानों ने कई दिनों तक आंदोलन करते हुए चक्काजाम भी किया। प्रदर्शनकारी किसानों की मांग है कि फसल नुकसान का सही आकलन कर उन्हें उचित बीमा राशि दी जाए।

किसानों का कहना है कि खरीफ सीजन में मौसम की मार और बीमारी के कारण सोयाबीन सहित कई फसलों को नुकसान पहुंचा था। खेतों में मेहनत और लागत लगाने के बावजूद कम बीमा राशि मिलने से किसानों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है।

विरोध प्रदर्शन के दौरान किसानों ने प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है। किसानों को उम्मीद है कि कलेक्टर के माध्यम से उनकी समस्या शासन तक पहुंचेगी और फसल नुकसान के अनुसार उन्हें उचित मुआवजा मिल सकेगा।

प्रशासन की ओर से किसानों की समस्याओं को सुनकर समाधान का भरोसा दिया गया है। वहीं, किसान अब बीमा राशि की दोबारा समीक्षा और नुकसान के आधार पर भुगतान की मांग कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत सरकार समय-समय पर किसानों के क्लेम भुगतान की प्रक्रिया को आगे बढ़ाती है। सरकार के अनुसार योजना का उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को आर्थिक सुरक्षा देना है।

मंदसौर में फसल बीमा राशि को लेकर किसानों का यह आंदोलन अब जिले में बड़ा मुद्दा बन गया है। किसानों का कहना है कि जब तक उन्हें नुकसान के हिसाब से मुआवजा नहीं मिलेगा, तब तक उनकी मांग जारी रहेगी।