नेपाल में लगातार बारिश से बढ़ा बाढ़ का खतरा, दरभंगा के कुशेश्वरस्थान पूर्वी में कई गांवों का सड़क संपर्क टूटा

नेपाल में लगातार बारिश से बढ़ा बाढ़ का खतरा, दरभंगा के कुशेश्वरस्थान पूर्वी में कई गांवों का सड़क संपर्क टूटा

नेपाल के तराई और जलग्रहण क्षेत्रों में पिछले एक सप्ताह से जारी मूसलाधार बारिश का असर अब बिहार के सीमावर्ती और निचले इलाकों में साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। नेपाल से आने वाले पानी के बढ़ते दबाव को देखते हुए वीरपुर बैराज के कई फाटक खोले जाने के बाद कोसी और कमला बलान नदियों के जलस्तर में तेजी से वृद्धि दर्ज की गई है। इसके चलते दरभंगा जिले के कुशेश्वरस्थान पूर्वी प्रखंड के कई गांवों में बाढ़ जैसे हालात बनने लगे हैं और ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

कमला बलान नदी का जलस्तर बढ़ने से पश्चिमी तटबंध के पूर्वी हिस्से में बसे गांव सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। इटहर पंचायत के चौकिया, लक्ष्मीनियां और बलथरवा गांव के साथ-साथ भिण्डुआ पंचायत के गोबराही गांव का सड़क संपर्क प्रखंड मुख्यालय से पूरी तरह टूट गया है। सड़कों पर पानी भर जाने से लोगों के सामने आवागमन का संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों को रोजमर्रा की जरूरतों, इलाज, शिक्षा और व्यापारिक गतिविधियों के लिए निजी नावों का सहारा लेना पड़ रहा है।

नाव ही बनी जीवनरेखा, जोखिम उठाकर सफर करने को मजबूर ग्रामीण

सड़क संपर्क टूटने के बाद निजी नावें ही लोगों के लिए एकमात्र साधन बन गई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि नावों की सीमित उपलब्धता और बढ़ती मांग के कारण यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। कई बार नावों में क्षमता से अधिक लोगों को बैठाया जा रहा है, जिससे दुर्घटना की आशंका भी बढ़ गई है।

इटहर पंचायत के एक शिक्षक ने बताया कि विद्यालय पहुंचने के लिए उन्हें प्रतिदिन नाव का सहारा लेना पड़ता है। नाव समय पर नहीं मिलने के कारण स्कूल पहुंचने में देरी होती है और बरसात के बीच सफर करना हमेशा खतरे से भरा रहता है। यही स्थिति छात्रों और अन्य कर्मचारियों की भी है।

कोसी नदी के किनारे बसे गांवों पर मंडराया कटाव का खतरा

दूसरी ओर, कोसी नदी के बढ़ते जलस्तर ने नदी किनारे बसे कई गांवों की चिंता बढ़ा दी है। छोटकी कोनिया, बड़की कोनिया, कुंज भवन, सेवका और ब्रह्मोत्तर गांव के समीप नदी की धारा तेज होने से कटाव का खतरा गहराने लगा है। हालांकि अभी तक किसी बड़े कटाव की आधिकारिक सूचना नहीं मिली है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि यदि जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो स्थिति गंभीर हो सकती है।

नदी के किनारे बसे परिवार अपने घरों और खेती की जमीन को लेकर चिंतित हैं। कई स्थानों पर नदी का पानी खेतों तक पहुंच चुका है, जिससे किसानों को भारी नुकसान की आशंका सताने लगी है।

फसलों पर संकट, पशुपालकों की बढ़ी चिंता

बाढ़ का असर कृषि क्षेत्र पर भी पड़ने लगा है। निचले इलाकों में धान की नर्सरी और अन्य मौसमी फसलें पानी में डूबने लगी हैं। लगातार जलभराव रहने की स्थिति में किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। वहीं, पशुपालकों के सामने भी चारे की समस्या खड़ी होने लगी है, क्योंकि कई चारागाह और खेत पानी से भर गए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में बारिश और जलस्तर में वृद्धि जारी रही तो कृषि और पशुपालन दोनों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

प्रशासन अलर्ट मोड में, संवेदनशील इलाकों की निगरानी तेज

बढ़ते जलस्तर और बाढ़ की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है। अंचल प्रशासन की ओर से प्रभावित और संवेदनशील क्षेत्रों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। अधिकारियों को स्थिति पर नजर बनाए रखने और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

प्रभारी अंचल अधिकारी राकेश सिंह यादव ने बताया कि कोसी और कमला बलान नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, लेकिन फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है और राहत एवं बचाव कार्यों की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। जरूरत पड़ने पर सरकारी नावों का संचालन शुरू किया जाएगा ताकि लोगों को आवागमन में परेशानी न हो।

अगले कुछ दिन अहम

मौसम विभाग और जल संसाधन विभाग की रिपोर्टों पर नजर रखी जा रही है। नेपाल में लगातार हो रही बारिश और नदियों में बढ़ते जलप्रवाह को देखते हुए आने वाले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। यदि बारिश का सिलसिला जारी रहा तो दरभंगा समेत मिथिलांचल के अन्य निचले इलाकों में बाढ़ का दायरा और बढ़ सकता है।

फिलहाल प्रशासन लोगों से सतर्क रहने, नदी किनारे अनावश्यक आवाजाही से बचने और किसी भी आपात स्थिति की जानकारी तुरंत स्थानीय प्रशासन को देने की अपील कर रहा है।