मुजफ्फरनगर की दोना-पत्तल फैक्ट्री से 13 मजदूर मुक्त: 11 महीने तक बंधक बनाकर रखने, मारपीट और यातना देने के आरोप
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में बंधुआ मजदूरी और कथित अमानवीय प्रताड़ना का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। तितावी थाना क्षेत्र के माड़ी गांव स्थित 'किसान सरकार हाउस' नामक दोना-पत्तल फैक्ट्री पर पुलिस, श्रम विभाग और प्रशासन की संयुक्त छापेमारी में 13 मजदूरों को मुक्त कराया गया। मजदूरों ने आरोप लगाया है कि उन्हें नौकरी और अच्छे वेतन का लालच देकर यहां लाया गया था, लेकिन बाद में महीनों तक बंधक बनाकर रखा गया, जबरन काम कराया गया और विरोध करने पर बेरहमी से प्रताड़ित किया जाता था।
मामले की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कई मजदूरों के शरीर पर चोटों और पुराने घावों के निशान मिले हैं। श्रमिकों का आरोप है कि उन्हें बेल्ट, हंटर, डंडे, सरिया और लोहे की रॉड से पीटा जाता था। कुछ मजदूरों ने यह भी दावा किया कि उन्हें गर्म भाले जैसी नुकीली वस्तुओं से दागा गया और भागने की कोशिश करने वालों को पिटबुल कुत्तों से डराया जाता था।
22 जून की शाम पुलिस ने मारा छापा
एसएसपी संजय कुमार वर्मा को सूचना मिली थी कि माड़ी गांव में संचालित फैक्ट्री में मजदूरों को बंधक बनाकर रखा गया है। इसके बाद सोमवार शाम करीब 6 बजे विशेष टीम ने फैक्ट्री पर छापेमारी की।
कार्रवाई में एसपी देहात अक्षय संजय महाडिक, सीओ फुगाना विश्वजीत सिंह, सहायक श्रम आयुक्त देवेश सिंह, तहसीलदार राधेश्याम गौड़ और तितावी थाना प्रभारी प्रमोद कुमार सहित कई अधिकारी शामिल रहे।
छापेमारी के दौरान 13 मजदूरों को मुक्त कराया गया। पुलिस ने मौके से फैक्ट्री मालिक अंकित बालियान के पिता प्रमोद (या प्रदीप) बालियान और सुपरवाइजर शिवा त्यागी को गिरफ्तार कर लिया। मुख्य आरोपी अंकित बालियान फरार है और उसकी तलाश के लिए पुलिस की विशेष टीमें दबिश दे रही हैं।
सीतापुर के जगदीश बोले- बेल्ट से मारकर कान खराब कर दिया
मुक्त कराए गए मजदूर जगदीश, जो सीतापुर के रहने वाले हैं, ने बताया कि वह करीब 11 महीने से फैक्ट्री में फंसे हुए थे।
जगदीश के अनुसार, उन्हें 12 हजार रुपये मासिक वेतन देने का वादा किया गया था, लेकिन एक भी महीना वेतन नहीं मिला। जब उन्होंने घर जाने की बात कही तो उनकी बेल्ट से पिटाई की गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार मारपीट के कारण उनका एक कान खराब हो गया। जगदीश ने कहा कि दिन-रात काम कराया जाता था और ठीक से सोने तक नहीं दिया जाता था।
औरैया के शिवम जाटव का आरोप- हाथ तोड़ दिया
औरैया निवासी शिवम जाटव ने बताया कि वह करीब छह महीने से फैक्ट्री में बंधक थे।
शिवम ने आरोप लगाया कि विरोध करने पर उनकी पिटाई की गई और उनका हाथ पीछे की ओर मोड़कर घायल कर दिया गया। उन्होंने पुलिस और प्रशासन का आभार जताते हुए कहा कि समय पर कार्रवाई नहीं होती तो शायद वह कभी बाहर नहीं निकल पाते।
नैनीताल के रामू बोले- चोकर की रोटी मिलती थी
उत्तराखंड के नैनीताल निवासी रामू ने बताया कि उन्हें करीब ढाई महीने पहले काम के लिए लाया गया था।
रामू के अनुसार, उन्हें पर्याप्त भोजन नहीं दिया जाता था। कई बार केवल चोकर की सूखी रोटी खाकर गुजारा करना पड़ता था। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें सब्जी तक नसीब नहीं होती थी।
रामू का दावा है कि उनका मोबाइल फोन छीन लिया गया था और आधार कार्ड भी नष्ट कर दिया गया था। इसके कारण वह अपने परिवार से संपर्क नहीं कर पा रहे थे।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि फैक्ट्री मालिक अपने पास पिस्तौल रखता था और मजदूरों को धमकाता था कि यदि किसी को कुछ बताया या भागने की कोशिश की तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
बिहार के उज्ज्वल ने सुनाई आपबीती
बिहार निवासी उज्ज्वल ने बताया कि वह लगभग 10 महीने से फैक्ट्री में काम कर रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें बेल्ट, डंडे, सरिया और लोहे की वस्तुओं से पीटा जाता था।
उज्ज्वल के अनुसार, मजदूरों को लगातार डर और दबाव में रखा जाता था ताकि वे फैक्ट्री छोड़ने की कोशिश न करें।
कई राज्यों और नेपाल से लाए गए थे मजदूर
पुलिस जांच में सामने आया है कि फैक्ट्री में काम करने वाले मजदूर उत्तर प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, हरियाणा, राजस्थान और नेपाल से लाए गए थे।
श्रमिकों को 10 से 12 हजार रुपये मासिक वेतन का लालच देकर बुलाया गया था, लेकिन बाद में कथित तौर पर उन्हें बंधक बना लिया गया। मजदूरों का कहना है कि उन्हें न तो वेतन दिया गया और न ही घर लौटने दिया गया।
भागने की कोशिश पर छोड़े जाते थे पिटबुल
पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि मजदूरों को फैक्ट्री परिसर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं थी। श्रमिकों का आरोप है कि जो व्यक्ति भागने की कोशिश करता था, उसे पकड़ने या डराने के लिए पिटबुल कुत्ते छोड़े जाते थे।
इस आरोप की भी जांच की जा रही है।
फैक्ट्री से बरामद हुए हंटर, भाला और लोहे की रॉड
छापेमारी के दौरान पुलिस ने फैक्ट्री परिसर से हंटर, सरिया, लोहे की रॉड और अन्य सामान बरामद किया। इन वस्तुओं को जांच के लिए कब्जे में लिया गया है।
पुलिस का कहना है कि बरामद सामग्री और मजदूरों के बयान मामले की जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हो सकते हैं।
दो मजदूरों का अब तक नहीं चला पता, एक की मिल चुकी है लाश
जांच के दौरान एक और गंभीर तथ्य सामने आया है। मजदूरों ने दावा किया कि उनके साथ काम करने वाले तीन श्रमिक लंबे समय से गायब हैं।
जानकारी के अनुसार नेपाल निवासी अर्जुन की लाश नवंबर 2025 में बोरे में मिली थी और उसका पोस्टमार्टम भी कराया गया था। वहीं दो अन्य मजदूरों के बारे में अब तक कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी है।
पुलिस का कहना है कि इन दावों की गहन जांच की जा रही है और मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद मामले में और अहम जानकारी सामने आ सकती है।
एसएसपी ने मजदूरों का किया सम्मान
मुक्त कराए गए मजदूरों को मंगलवार दोपहर मुजफ्फरनगर पुलिस लाइन लाया गया। यहां एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने मजदूरों से मुलाकात की, उनका हालचाल जाना और उन्हें नए जीवन की शुभकामनाएं दीं।
पुलिस ने मजदूरों को भोजन उपलब्ध कराया और उनके कुछ मोबाइल फोन भी बरामद किए। एसएसपी ने सफल कार्रवाई करने वाली पुलिस टीम को 25 हजार रुपये के पुरस्कार की घोषणा भी की।
कई गंभीर धाराओं में आगे बढ़ सकती है जांच
पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले में बंधुआ मजदूरी, अवैध रूप से बंधक बनाकर रखने, मारपीट, श्रमिक शोषण, मानव तस्करी और अन्य संबंधित धाराओं के तहत जांच की जा रही है। मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद कई और महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
फिलहाल 13 मजदूर सुरक्षित हैं, जबकि पुलिस पूरे मामले की तह तक पहुंचने और सभी आरोपियों को गिरफ्तार करने के प्रयास में जुटी हुई है।
news desk MPcg