पीएम मोदी से जुड़े कथित आपत्तिजनक वीडियो पोस्ट मामले में तेलंगाना निवासी पर चलेगा मुकदमा, 26 जून से चंडीगढ़ अदालत में सुनवाई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े कथित आपत्तिजनक और भ्रामक सोशल मीडिया पोस्ट मामले में तेलंगाना निवासी हसन मोहिउद्दीन सिद्दीकी के खिलाफ अब चंडीगढ़ की जिला अदालत में मुकदमा चलेगा। चंडीगढ़ पुलिस ने मामले की जांच पूरी कर आरोपपत्र (चार्जशीट) अदालत में दाखिल कर दिया है। अदालत ने मामले पर संज्ञान लेते हुए 26 जून से सुनवाई की तारीख निर्धारित की है।
पुलिस के अनुसार 42 वर्षीय हसन मोहिउद्दीन सिद्दीकी को 25 अप्रैल 2026 को गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद से वह न्यायिक हिरासत में है। इस दौरान उसकी जमानत याचिका दो बार जिला अदालत में खारिज हो चुकी है।
सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर दर्ज हुआ था मामला
मामले की शुरुआत 19 अप्रैल 2026 को हुई थी, जब चंडीगढ़ के पूर्व भाजपा पार्षद और अधिवक्ता सतिंदर सिंह ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ा एक वीडियो भ्रामक कैप्शन के साथ प्रसारित किया जा रहा है।
शिकायतकर्ता का दावा था कि वीडियो को इस प्रकार प्रस्तुत किया गया जिससे प्रधानमंत्री की छवि को नुकसान पहुंचाने और लोगों को भ्रमित करने का प्रयास किया गया। शिकायत में कई सोशल मीडिया अकाउंट्स का उल्लेख किया गया था, जिनमें हसन मोहिउद्दीन सिद्दीकी और चर्चित लेखिका मधु किश्वर का नाम भी शामिल था।
पुलिस ने कई धाराओं में दर्ज की एफआईआर
शिकायत मिलने के बाद सेक्टर-26 थाना पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।
जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने हसन के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 196, 318, 336(1), 336(3), 336(4), 340, 353 और 356 के तहत चार्जशीट दाखिल की है। इन धाराओं में समाज में वैमनस्य फैलाने, भ्रामक सूचना प्रसारित करने, सार्वजनिक शांति प्रभावित करने और अन्य संबंधित अपराधों से जुड़े आरोप शामिल हैं।
पुलिस के रडार पर छह सोशल मीडिया अकाउंट
पुलिस सूत्रों के अनुसार शिकायत में कुल छह सोशल मीडिया हैंडल्स का उल्लेख किया गया था। आरोप है कि इन अकाउंट्स ने वीडियो को साझा किया या उसके प्रसार में भूमिका निभाई।
जांच के दौरान पुलिस ने डिजिटल साक्ष्य, सोशल मीडिया पोस्ट, संबंधित अकाउंट्स की गतिविधियों और अन्य तकनीकी जानकारियों का विश्लेषण किया। इसके आधार पर हसन मोहिउद्दीन सिद्दीकी के खिलाफ कार्रवाई आगे बढ़ाई गई।
मधु किश्वर का नाम भी आया सामने
मामले में वरिष्ठ लेखिका और सामाजिक टिप्पणीकार मधु किश्वर का नाम भी सामने आया था। हालांकि पुलिस अब तक उन्हें गिरफ्तार नहीं कर सकी है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े अन्य आरोपितों की भूमिका की भी जांच जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
क्या है हसन मोहिउद्दीन सिद्दीकी का पक्ष?
हसन मोहिउद्दीन सिद्दीकी ने अपने बचाव में दावा किया है कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कोई आपत्तिजनक टिप्पणी नहीं की थी।
उनका कहना है कि उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर वायरल हो रहे वीडियो को पोस्ट कर केवल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस चैटबॉट "ग्रोक" से यह पूछा था कि वीडियो वास्तविक है या नहीं। उनके अनुसार उन्होंने वीडियो की सत्यता पर सवाल उठाया था, न कि उसे सत्य बताकर प्रसारित किया था।
हसन का दावा है कि इसी पोस्ट को आधार बनाकर उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया और बाद में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
डिजिटल सामग्री और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बहस
यह मामला सोशल मीडिया पर साझा की जाने वाली सामग्री, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जिम्मेदारी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर भी चर्चा का विषय बन गया है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत में यह महत्वपूर्ण प्रश्न भी उठ सकता है कि किसी वीडियो की सत्यता जानने के उद्देश्य से की गई पोस्ट और भ्रामक सूचना फैलाने के इरादे से की गई पोस्ट के बीच कानूनी अंतर क्या है।
26 जून से शुरू होगी सुनवाई
चंडीगढ़ जिला अदालत में 26 जून से मामले की सुनवाई शुरू होगी। अदालत में पुलिस द्वारा प्रस्तुत डिजिटल साक्ष्य, सोशल मीडिया रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की जांच की जाएगी।
मामले पर राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर नजर बनी हुई है, क्योंकि यह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा की जाने वाली सामग्री और उससे जुड़ी जवाबदेही का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।
फिलहाल हसन मोहिउद्दीन सिद्दीकी न्यायिक हिरासत में हैं और अदालत में सुनवाई के बाद ही मामले की आगे की दिशा स्पष्ट होगी।
news desk MPcg