गुजरात में AAP को बड़ा झटका: विधायक चैतर वसावा को 7 साल की सजा, जानिए पूरा मामला और कोर्ट के फैसले की बड़ी बातें
गुजरात की राजनीति में बड़ा भूचाल आ गया है। नर्मदा जिले की राजपीपला सेशंस कोर्ट ने आम आदमी पार्टी (AAP) के डेडियापाड़ा विधायक चैतर वसावा, उनकी पत्नी शकुंतला वसावा और अन्य सात आरोपियों को वन विभाग के अधिकारियों पर हमले, धमकी, उगाही और सरकारी कार्य में बाधा डालने के मामले में दोषी करार देते हुए 7-7 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। फैसला अतिरिक्त सेशंस न्यायाधीश ए.वी. हीरपरा ने सुनाया।
यह मामला सिर्फ एक आपराधिक मुकदमा नहीं बल्कि गुजरात की आदिवासी राजनीति और AAP के संगठनात्मक भविष्य से भी जुड़ा माना जा रहा है, क्योंकि चैतर वसावा राज्य में पार्टी के सबसे प्रमुख आदिवासी चेहरों में गिने जाते हैं।
क्या था पूरा मामला?
घटना की शुरुआत अक्टूबर 2023 में हुई थी। वन विभाग ने डेडियापाड़ा क्षेत्र में सरकारी वन भूमि पर कथित अवैध खेती और अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई करते हुए फसल हटाई थी। इसी कार्रवाई के बाद विवाद खड़ा हो गया। वन विभाग के अधिकारियों ने सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे का मामला दर्ज किया था।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 30 अक्टूबर 2023 की रात वन विभाग के कुछ अधिकारियों को चर्चा के लिए चैतर वसावा के निवास पर बुलाया गया। वहां पहुंचने पर अधिकारियों के साथ कथित रूप से अभद्र व्यवहार किया गया, एक वनकर्मी को थप्पड़ मारा गया, धमकियां दी गईं और माहौल में डर पैदा करने के लिए हवाई फायरिंग भी की गई।
जांच में यह भी आरोप सामने आया कि अगले दिन अधिकारियों पर दबाव बनाकर उनसे 60 हजार रुपये की राशि वसूल की गई। इसी आधार पर उगाही और धमकी की धाराएं भी जोड़ी गईं।
FIR से लेकर सजा तक: घटनाक्रम
30 अक्टूबर 2023: वन विभाग और स्थानीय लोगों के बीच विवाद।
2 नवंबर 2023: डेडियापाड़ा पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज।
नवंबर 2023: चैतर वसावा की पत्नी और कुछ अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी।
दिसंबर 2023: करीब एक महीने तक फरार रहने के बाद चैतर वसावा ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया।
30 जनवरी 2024: पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की।
7 अगस्त 2025: कोर्ट ने आरोप तय किए।
जून 2026: ट्रायल पूरा होने के बाद सभी आरोपियों को दोषी ठहराकर 7 साल की सजा सुनाई गई।
कोर्ट में किन सबूतों के आधार पर हुई सजा?
विशेष लोक अभियोजक ने अदालत में गवाहों के बयान, दस्तावेजी साक्ष्य, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), बैंकिंग रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी साक्ष्य पेश किए। ट्रायल के दौरान 17 अभियोजन गवाहों के बयान दर्ज किए गए। अभियोजन का दावा था कि इन साक्ष्यों ने आरोपियों की भूमिका को स्पष्ट रूप से स्थापित किया। अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार करते हुए दोष सिद्ध माना।
हथियार और फायरिंग का विवाद
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने यह भी दावा किया था कि घटना में इस्तेमाल हथियार की बरामदगी महत्वपूर्ण थी। पुलिस को संदेह था कि हथियार को छिपाया या नष्ट किया गया हो सकता है। इसी संबंध में अदालत ने जेल में रहते हुए भी पुलिस को चैतर वसावा से पूछताछ की अनुमति दी थी।
किन धाराओं में हुई कार्रवाई?
आरोपियों पर दंगा, सरकारी कर्मचारी पर हमला, सरकारी कार्य में बाधा, उगाही, आपराधिक धमकी और आर्म्स एक्ट से जुड़ी विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। अदालत ने इन गंभीर आरोपों को प्रमाणित मानते हुए सजा सुनाई।
विधायक पद पर मंडरा रहा संकट
भारतीय जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के अनुसार यदि किसी विधायक को दो वर्ष या उससे अधिक की सजा होती है तो उसकी सदस्यता समाप्त हो सकती है। चूंकि चैतर वसावा को सात वर्ष की सजा सुनाई गई है, इसलिए उनकी विधानसभा सदस्यता पर भी संकट खड़ा हो गया है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि हाईकोर्ट में राहत मिलने तक उनकी राजनीतिक स्थिति अनिश्चित बनी रह सकती है।
AAP के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
चैतर वसावा गुजरात में AAP के सबसे प्रभावशाली आदिवासी नेताओं में माने जाते हैं। 2022 विधानसभा चुनाव में उन्होंने डेडियापाड़ा सीट पर जीत दर्ज कर पार्टी को आदिवासी बेल्ट में मजबूत पहचान दिलाई थी। पार्टी ने उन्हें गुजरात विधानसभा में अपना नेता भी बनाया था। ऐसे में उनकी सजा को गुजरात में AAP के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
अब आगे क्या?
फैसले के बाद चैतर वसावा के समर्थकों और AAP नेताओं ने इसे कानूनी लड़ाई का अगला चरण बताया है। वसावा के वकीलों ने संकेत दिए हैं कि वे जल्द ही गुजरात हाईकोर्ट में अपील दायर करेंगे। यदि उच्च न्यायालय से राहत नहीं मिलती है तो यह फैसला उनके राजनीतिक करियर पर गहरा असर डाल सकता है।
गुजरात की राजनीति में यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह मामला सिर्फ एक आपराधिक मुकदमे तक सीमित नहीं है, बल्कि आदिवासी नेतृत्व, वन भूमि विवाद और विपक्षी राजनीति के कई बड़े सवालों को भी केंद्र में ले आया है।
news desk MPcg