गुरुग्राम में मानसून से पहले तैयारियां अधूरी, 155 जलभराव हॉटस्पॉट में 85 पर अब भी काम जारी; बारिश में फिर डूब सकती हैं सड़कें

गुरुग्राम में मानसून से पहले तैयारियां अधूरी, 155 जलभराव हॉटस्पॉट में 85 पर अब भी काम जारी; बारिश में फिर डूब सकती हैं सड़कें

देश की प्रमुख कॉरपोरेट और आईटी हब मानी जाने वाली गुरुग्राम सिटी एक बार फिर मानसून से पहले अधूरी तैयारियों को लेकर सवालों के घेरे में है। मौसम विभाग द्वारा अगले दिनों में मानसून के उत्तर भारत में सक्रिय होने की संभावना जताई जा रही है, लेकिन शहर के कई प्रमुख नालों, ड्रेनेज चैनलों और जलनिकासी मार्गों की सफाई का काम अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि पिछले वर्षों की तरह इस बार भी भारी बारिश के दौरान शहर की कई सड़कें जलमग्न हो सकती हैं और लोगों को ट्रैफिक जाम, जलभराव तथा आवागमन की गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

प्रशासन ने शहर में जलभराव की दृष्टि से 155 हॉटस्पॉट चिह्नित किए हैं। इनमें से 70 स्थानों पर सुधार कार्य पूरा होने का दावा किया गया है, जबकि 85 स्थानों पर अभी भी काम जारी है। नगर निगम और गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) का कहना है कि 30 जून तक सभी कार्य पूरे कर लिए जाएंगे, लेकिन जमीनी स्थिति इन दावों से अलग दिखाई दे रही है।

नालों में भरी गाद और कचरा, निकासी व्यवस्था पर सवाल

शहर के कई प्रमुख नालों और ड्रेनेज सिस्टम में अभी भी गाद, प्लास्टिक कचरा और मलबा जमा है। सेक्टर-10ए स्थित हीरो होंडा चौक से उमंग भारद्वाज चौक तक जाने वाली मुख्य सड़क के किनारे बनी ड्रेन गंदगी से अटी पड़ी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश शुरू होते ही पानी की निकासी रुक जाती है और सड़कें तालाब में तब्दील हो जाती हैं।

दिल्ली-जयपुर हाईवे, राजीव चौक, ओल्ड दिल्ली रोड, पटौदी रोड, बसई रोड, नरसिंहपुर, लक्ष्मण विहार, सुशांत लोक और नए गुरुग्राम के कई सेक्टर हर साल जलभराव की समस्या से जूझते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मानसून पूर्व सफाई और ड्रेनेज सुधार समय पर पूरा नहीं हुआ तो स्थिति फिर से गंभीर हो सकती है।

2016 का महाजाम अब भी लोगों के जेहन में

गुरुग्राम के लोगों को आज भी 29 जुलाई 2016 की वह बारिश याद है, जब कुछ घंटों की वर्षा ने पूरे शहर को ठप कर दिया था। हीरो होंडा चौक और दिल्ली-जयपुर हाईवे पर ऐसा महाजाम लगा था कि हजारों लोग पूरी रात वाहनों में फंसे रहे। कई लोग बिना भोजन और पानी के घंटों ट्रैफिक में अटके रहे थे।

इसके बाद हर वर्ष प्रशासन मानसून से पहले व्यापक तैयारियों का दावा करता है, लेकिन जलभराव की समस्या लगातार बनी हुई है।

हर साल बढ़ते जा रहे हैं जलभराव वाले क्षेत्र

नगर निगम के आंकड़े बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में जलभराव के संवेदनशील स्थानों की संख्या लगातार बढ़ी है।

वर्ष    जलभराव संवेदनशील स्थान
2020    79
2021    39
2022    34
2023    31
2024    112
2025    159

आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि शहरी विस्तार के साथ ड्रेनेज इंफ्रास्ट्रक्चर पर दबाव बढ़ा है और समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है।

155 हॉटस्पॉट में 41 अति संवेदनशील

प्रशासन द्वारा चिह्नित 155 हॉटस्पॉट में:

41 अति संवेदनशील
49 मध्यम श्रेणी
65 छोटे हॉटस्पॉट

शामिल हैं।

नगर निगम के मुख्य अभियंता विजय ढाका के अनुसार अधिकांश स्थानों पर ड्रेनेज सुधार, डी-सिल्टिंग और जलनिकासी क्षमता बढ़ाने का कार्य चल रहा है तथा एक सप्ताह के भीतर सभी कार्य पूरे करने का लक्ष्य रखा गया है।

पटौदी रोड और उमंग भारद्वाज चौक सबसे बड़ी चिंता

उमंग भारद्वाज चौक से पटौदी रोड तक का क्षेत्र वर्षों से जलभराव की समस्या झेल रहा है। यहां बरसाती नाले का पर्याप्त नेटवर्क नहीं होने के कारण बारिश का पानी सड़क पर जमा हो जाता है।

स्थानीय लोगों के अनुसार तेज बारिश के दौरान कई बार स्थिति ऐसी हो जाती है कि कारों के टायर तक पानी में डूब जाते हैं। गाड़ौली गांव तक लंबा ट्रैफिक जाम लग जाता है और हजारों वाहन चालक घंटों फंसे रहते हैं।

अधूरे नाले और टूटी कनेक्टिविटी बढ़ा रही समस्या

शहर के कई हिस्सों में छोटे नालों को बड़ी ड्रेनों से जोड़ा ही नहीं गया है। परिणामस्वरूप बारिश का पानी निकासी मार्ग तक पहुंचने से पहले ही सड़कों पर जमा हो जाता है।

सेक्टर-10 में एक नाले का निर्माण कार्य लगभग डेढ़ वर्ष से अधूरा पड़ा हुआ है। कई क्षेत्रों में स्टॉर्म वाटर ड्रेन बने हैं लेकिन उनका नेटवर्क पूरी तरह कार्यशील नहीं हो पाया है।

जलभराव के पीछे ये हैं प्रमुख कारण

विशेषज्ञों और अधिकारियों के अनुसार शहर में जलभराव के कई कारण हैं:

नालों में अवैध सीवर कनेक्शन जोड़ दिए गए हैं।
लगभग 950 डेयरियों का अपशिष्ट नालों में डाला जा रहा है।
लेग-1 और लेग-2 ड्रेन का कुछ हिस्सा नजफगढ़ नाले से पूरी तरह नहीं जुड़ा है।
नालों और ड्रेनेज चैनलों पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण।
अवैध कॉलोनियों के पास नालों पर कब्जा।
समय पर डी-सिल्टिंग नहीं होना।
शहरीकरण के कारण प्राकृतिक जलनिकासी मार्गों का बाधित होना।
निगम के दोनों जोन में चल रहा काम
जोन-1
कुल 13 हॉटस्पॉट
4 छोटे, 5 मध्यम और 4 अति संवेदनशील
6 स्थानों पर कार्य पूरा
7 स्थानों पर काम जारी
जोन-2
कुल 23 हॉटस्पॉट
4 छोटे, 13 मध्यम और 6 अति संवेदनशील
10 स्थानों पर कार्य पूरा
13 स्थानों पर कार्य जारी

इन क्षेत्रों में ड्रेनेज सुधार, स्टॉर्म वाटर ड्रेन निर्माण और डी-सिल्टिंग का कार्य किया जा रहा है।

विशाल ड्रेनेज नेटवर्क के बावजूद चुनौती बरकरार

गुरुग्राम में:

150 किलोमीटर लंबे मुख्य बरसाती नाले
550 किलोमीटर लंबी सरफेस ड्रेन
लगभग 2600 किलोमीटर आंतरिक बरसाती नालों का नेटवर्क
55.22 किलोमीटर लंबी लेग-1, लेग-2 और लेग-3 ड्रेन

मौजूद हैं। इसके बावजूद कई इलाकों में हर वर्ष जलभराव होना यह दर्शाता है कि केवल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना पर्याप्त नहीं, बल्कि उसके नियमित रखरखाव और प्रभावी संचालन की भी आवश्यकता है।

मानसून के लिए कंट्रोल रूम और मशीनरी की तैयारी

जीएमडीए ने मानसून के दौरान जलभराव से निपटने के लिए विशेष कंट्रोल रूम स्थापित करने की योजना बनाई है। अधिकारियों के अनुसार 1 जुलाई से 15 सितंबर तक:

ट्रैक्टर माउंटेड पंप
हाई कैपेसिटी मोटर पंप
अर्थमूवर मशीनें
हाइड्रा क्रेन
अतिरिक्त मैनपावर

तैनात की जाएगी ताकि किसी भी जलभराव वाले क्षेत्र में तुरंत राहत कार्य शुरू किया जा सके।

कौन-कौन से विभाग हैं जिम्मेदार?

गुरुग्राम में जलनिकासी व्यवस्था और बरसाती नालों की जिम्मेदारी कई विभागों में विभाजित है, जिनमें शामिल हैं:

नगर निगम गुरुग्राम (MCG)
नगर निगम मानेसर
गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (GMDA)
हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP)
हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम (HSIIDC)
लोक निर्माण विभाग (PWD)

विशेषज्ञों का कहना है कि विभागों के बीच समन्वय की कमी भी जलभराव की बड़ी वजह बनती है।

बारिश से पहले प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती

मानसून के आगमन में अब बहुत कम समय बचा है। ऐसे में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती अधूरे ड्रेनेज कार्यों को समय पर पूरा करने और जलभराव वाले संवेदनशील क्षेत्रों को सुरक्षित बनाने की है। यदि अगले कुछ दिनों में सफाई और सुधार कार्यों में तेजी नहीं लाई गई, तो साइबर सिटी गुरुग्राम एक बार फिर बारिश के दौरान ट्रैफिक जाम, जलभराव और अव्यवस्थित शहरी प्रबंधन की तस्वीर पेश कर सकता है।