मेरठ में बारिश बनी बड़ी चुनौती: दिल्ली रोड पर बाढ़ जैसे हालात का खतरा, नाले को लेकर नगर निगम और NCRTC आमने-सामने
मानसून की दस्तक से पहले ही मेरठ की दिल्ली रोड पर जलभराव का खतरा गहराने लगा है। नगर निगम ने आशंका जताई है कि यदि इस बार भारी बारिश हुई और दिल्ली रोड का मुख्य नाला उफन गया, तो कुछ ही मिनटों में सड़कें जलमग्न हो सकती हैं और आसपास की कॉलोनियों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो सकते हैं। सबसे बड़ी चिंता यह है कि करीब दो लाख लोगों की जल निकासी व्यवस्था इसी नाले पर निर्भर है।
दिल्ली रोड से जुड़े कई इलाकों में पहले से जल निकासी की गंभीर समस्या बनी हुई है। फुटबॉल चौराहे से लेकर रामलीला ग्राउंड तक नाला अतिक्रमण के कारण काफी संकरा हो चुका है, जबकि रामलीला ग्राउंड से ट्रांसपोर्ट नगर और माधवपुरम मोड़ तक का हिस्सा चौड़ा होने के बावजूद कच्चा है। कई स्थानों पर भूमिगत नाले जाम पड़े हैं, जिससे बरसाती पानी की निकासी प्रभावित हो रही है।
शताब्दीनगर स्टेशन के पास सबसे बड़ी समस्या
नगर निगम के अनुसार, नमो भारत (रैपिड रेल) परियोजना के तहत शताब्दीनगर स्टेशन के पास लगभग 300 मीटर लंबा भूमिगत नाला बनाया गया था। आरोप है कि निर्माण के दौरान नाले का मार्ग बदल दिया गया और सफाई के लिए पर्याप्त मैनहोल भी नहीं छोड़े गए। इससे पानी का प्रवाह बाधित हो रहा है और स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, मोहकमपुर तथा आसपास के क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति बन रही है।
नगर आयुक्त डॉ. सौरभ गंगवार ने इसे "इंजीनियरिंग फेल्योर" बताते हुए कहा कि वर्तमान व्यवस्था बरसात के दौरान गंभीर संकट पैदा कर सकती है। उन्होंने बताया कि समस्या के स्थायी समाधान के लिए लगभग 30 करोड़ रुपये की लागत से नए नाले का निर्माण प्रस्तावित है।
NCRTC ने नगर निगम पर डाली जिम्मेदारी
वहीं, NCRTC ने नगर निगम के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि नाले के निर्माण से पहले सभी आवश्यक ड्राइंग और तकनीकी स्वीकृतियां नगर निगम के साथ साझा की गई थीं। NCRTC के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पुनीत वत्स के अनुसार, नाले के रखरखाव और सफाई की जिम्मेदारी नगर निगम की है और मौजूदा समस्या का समाधान भी उसी के स्तर पर किया जाना चाहिए।
दो लाख आबादी पर असर की आशंका
दिल्ली रोड और उससे जुड़े इलाकों की लगभग दो लाख आबादी की जल निकासी व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। देवपुरी, आनंदपुरी, जैननगर, ईदगाह, बागड़ियान, ब्रह्मपुरी, शारदा रोड, गुरुनानक नगर, कमला नगर, दशमेश नगर, पंजाबीपुरा, बेरीपुरा, रिठानी, मोहकमपुर, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, साईंपुरम, शिवपुरम, देवलोक कॉलोनी और मधुबन कॉलोनी जैसे क्षेत्रों में अभी भी व्यापक सीवर नेटवर्क नहीं है।
इन इलाकों का घरेलू सीवेज सीधे खुले नालों में बहाया जाता है, जिससे नाले की क्षमता और अधिक प्रभावित होती है। जहां सीवर लाइन मौजूद है, वहां भी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) की कमी या खराब संचालन के कारण समस्या बनी हुई है।
हर साल दोहराई जाती है परेशानी
स्थानीय लोगों के अनुसार, शॉपरिक्स मॉल चौराहे से ट्रांसपोर्ट नगर और माधवपुरम मोड़ तक हर वर्ष बारिश के दौरान हालात बेहद खराब हो जाते हैं। विश्व एंक्लेव, मोहकमपुर, शिवपुरम, माधवपुरम और आसपास की कई कॉलोनियां टापू जैसी स्थिति में पहुंच जाती हैं। कई बार घरों में गंदा पानी घुस जाता है और औद्योगिक क्षेत्रों की फैक्ट्रियों में पानी भरने से करोड़ों रुपये का नुकसान होता है।
फुटबॉल चौराहे से बागपत रोड, जैननगर-ईदगाह रोड, रेलवे चौराहे से घंटाघर और सोतीगंज जैसे क्षेत्रों में भी जलभराव आम समस्या बन चुकी है।
आखिर क्यों बढ़ रहा है खतरा?
विशेषज्ञों के अनुसार, समस्या की दो प्रमुख वजहें हैं। पहली, शहर की आबादी कई गुना बढ़ चुकी है लेकिन जल निकासी के लिए आज भी पुराने और सीमित क्षमता वाले नालों पर निर्भरता बनी हुई है। दूसरी, बड़ी संख्या में कॉलोनियों में सीवर व्यवस्था अधूरी है, जिसके कारण घरेलू सीवेज सीधे नालों में छोड़ा जा रहा है। इससे बरसाती पानी और सीवेज का दबाव एक साथ बढ़ जाता है।
अगले मानसून तक नहीं मिलेगा स्थायी समाधान
नगर निगम का मानना है कि इस वर्ष केवल अस्थायी और वैकल्पिक इंतजाम ही किए जा सकेंगे। स्थायी समाधान के लिए नए नाले और बेहतर जल निकासी व्यवस्था का काम अगले मानसून से पहले पूरा होने की उम्मीद है। ऐसे में इस बार की बारिश दिल्ली रोड और आसपास के इलाकों के लिए बड़ी परीक्षा साबित हो सकती है।
यदि समय रहते नाले की सफाई, जल निकासी सुधार और आपातकालीन प्रबंधन की व्यवस्था नहीं की गई, तो मेरठ की दिल्ली रोड पर कुछ ही घंटों की बारिश भी बाढ़ जैसे हालात पैदा कर सकती है।
news desk MPcg