प्रतापगढ़ में जल हादसों पर लगाम की तैयारी: नदियों, तालाबों और झीलों पर लगेंगे चेतावनी बोर्ड, चार दिन बाद शुरू होगा अभियान
उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में लगातार सामने आ रही डूबने की घटनाओं के बाद जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाने का फैसला किया है। अब जिले की प्रमुख नदियों, तालाबों और झीलों के किनारे चेतावनी बोर्ड लगाए जाएंगे, जिन पर संबंधित जलाशय की गहराई, लंबाई और संभावित खतरे की जानकारी दर्ज होगी। प्रशासन का मानना है कि इससे लोगों में जागरूकता बढ़ेगी और जल दुर्घटनाओं में कमी आएगी।
जिले में 1,148 ग्राम पंचायतें हैं और यहां पांच हजार से अधिक सरकारी तालाब मौजूद हैं। इनमें कई तालाबों की गहराई 10 से 15 फीट तक है, जबकि कुछ जलाशय इससे भी अधिक गहरे हैं। इसके अलावा जिले से होकर बहने वाली गंगा, सई, बकुलाही, सकरनी, परैया, चमरौरा और लोनी जैसी नदियां भी कई स्थानों पर काफी गहरी हैं, जहां हर वर्ष हादसों की घटनाएं सामने आती रहती हैं।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, दुर्घटना संभावित स्थलों की पहचान कर वहां चेतावनी बोर्ड, बैरिकेडिंग और सुरक्षा घेराबंदी की व्यवस्था की जाएगी। इस अभियान का काम अगले चार दिनों में शुरू होने की संभावना है। बोर्डों पर जलाशय की गहराई, सावधानियां और खतरे से संबंधित जानकारी दी जाएगी ताकि लोग बिना जानकारी के गहरे पानी में न उतरें।
जिले की प्रमुख झीलों—दमदम झील, बेंती, अजगरा, दाऊदपुर, रंगोली, चौरंग, नेवाड़ी और बकोल—को भी इस योजना में शामिल किया गया है। प्रशासन का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर लोग नहाने, पशुओं को पानी पिलाने या अन्य कार्यों के लिए जलाशयों के पास जाते हैं, ऐसे में चेतावनी संकेत उनकी सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण साबित होंगे।
हाल की घटनाओं ने बढ़ाई चिंता
प्रतापगढ़ में हाल के महीनों में कई दर्दनाक जल दुर्घटनाएं हुई हैं। अप्रैल में कंजास क्षेत्र में तालाब में डूबने से तीन सगे भाई-बहनों की मौत हो गई थी। बताया गया कि गर्मी के दौरान नहाने गए बच्चे पैर फिसलने के कारण गहरे हिस्से में चले गए थे।
इसके अलावा 18 जून को बढ़नी गांव के निवासी सुरजीत की तालाब में डूबने से मौत हो गई थी। गंगा नदी में भी स्नान के दौरान कई लोगों की जान जा चुकी है। रानीगंज क्षेत्र के जरियारी समेत कई गांवों में भी इस तरह की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इन हादसों ने प्रशासन को सुरक्षा उपायों को लेकर सक्रिय होने के लिए मजबूर किया है।
देवकली तालाब सबसे गहरे जलाशयों में शामिल
नगर पालिका परिषद बेल्हा के अंतर्गत स्थित देवकली तालाब जिले के सबसे गहरे तालाबों में गिना जाता है। इसकी गहराई करीब 15 फीट बताई जाती है और इसमें पूरे वर्ष पानी भरा रहता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, छह वर्ष पहले यहां एक युवक नहाते समय डूबने लगा था, जिसे आसपास मौजूद लोगों ने समय रहते बचा लिया था। इसके बाद से कई लोग इस तालाब में जाने से बचते हैं।
प्रशासन का क्या कहना है?
प्रभारी जिला विकास अधिकारी देव कुमार ने बताया कि जिले के प्रमुख जल क्षेत्रों में चेतावनी बोर्ड लगाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। उनका कहना है कि लोगों को जलाशयों की वास्तविक स्थिति और खतरे की जानकारी मिलने से दुर्घटनाओं को रोकने में मदद मिलेगी।
जिले की प्रमुख नदियों का दायरा
गंगा नदी का दायरा: लगभग 50 किलोमीटर
बकुलाही नदी की लंबाई: लगभग 177 किलोमीटर
गोमती नदी का जिला क्षेत्र में दायरा: लगभग 6 किलोमीटर
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल चेतावनी बोर्ड ही नहीं, बल्कि नियमित निगरानी, बैरिकेडिंग और जन-जागरूकता अभियान भी जरूरी हैं। यदि इन उपायों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो प्रतापगढ़ में हर साल होने वाली कई जल दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है।
news desk MPcg