बिहार के नए सरकारी डिग्री कॉलेजों में पढ़ाएंगे NET, JRF और PhD योग्य शिक्षक, शिक्षा विभाग ने जारी किए निर्देश

बिहार के नए सरकारी डिग्री कॉलेजों में पढ़ाएंगे NET, JRF और PhD योग्य शिक्षक, शिक्षा विभाग ने जारी किए निर्देश

उच्च शिक्षा को मजबूती देने की दिशा में बड़ा कदम

बिहार सरकार ने राज्य में उच्च शिक्षा के विस्तार और नए सरकारी डिग्री कॉलेजों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए महत्वपूर्ण पहल की है। नियमित एवं अतिथि सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति होने तक अब कक्षा 9 से 12 तक पढ़ाने वाले ऐसे सरकारी शिक्षकों को नवस्थापित डिग्री कॉलेजों में प्रतिनियुक्त किया जाएगा, जिन्होंने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के मानकों के अनुसार NET, JRF या PhD की योग्यता प्राप्त की है।

इस संबंध में उच्च शिक्षा विभाग के निर्देश पर जिला स्तर पर योग्य शिक्षकों की पहचान और सूची तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

समस्तीपुर से शुरू हुई प्रक्रिया

शिक्षा विभाग के निर्देशों के तहत समस्तीपुर जिले में नवस्थापित सरकारी डिग्री कॉलेजों के लिए योग्य शिक्षकों का डाटा जुटाया जा रहा है। जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) कामेश्वर प्रसाद गुप्ता ने जिले के सभी प्रधानाध्यापकों, प्रभारी प्रधानाध्यापकों और प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों (BEO) को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं।

सभी विद्यालयों से ऐसे शिक्षकों की अद्यतन जानकारी मांगी गई है, जो वर्तमान में माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत हैं तथा NET, JRF अथवा PhD जैसी शैक्षणिक अर्हता रखते हैं।

नियमित नियुक्ति तक प्रतिनियुक्ति पर पढ़ाएंगे शिक्षक

विभागीय निर्देशों के अनुसार, नए डिग्री कॉलेजों में नियमित या अतिथि सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति होने तक योग्य विद्यालय शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति की जाएगी। इन शिक्षकों के माध्यम से स्नातक (UG) स्तर की पढ़ाई संचालित कराई जाएगी, जिससे नए कॉलेजों में शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित न हों।

इस व्यवस्था का उद्देश्य ग्रामीण और प्रखंड स्तर पर स्थापित नए कॉलेजों में समय पर कक्षाएं शुरू कराना और विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षण सुविधा उपलब्ध कराना है।

सात निश्चय-3 योजना के तहत लागू होगी व्यवस्था

उच्च शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह पहल बिहार सरकार के 'सात निश्चय-3 (2025-30)' के चौथे निश्चय 'उन्नत शिक्षा-उज्ज्वल भविष्य' के तहत की जा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए दूसरे शहरों की ओर पलायन न करना पड़े और उन्हें अपने ही जिले या प्रखंड में गुणवत्तापूर्ण स्नातक शिक्षा उपलब्ध हो सके।

इन योग्यताओं वाले शिक्षक होंगे शामिल

शिक्षा विभाग ने निर्देश दिया है कि केवल उन्हीं शिक्षकों को प्रतिनियुक्ति के लिए चिह्नित किया जाएगा, जिन्होंने UGC के निर्धारित मानकों के अनुसार निम्न में से कोई एक शैक्षणिक योग्यता प्राप्त की हो—

राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (NET)
जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF)
डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (PhD)

इन योग्यताओं के आधार पर शिक्षकों का विषयवार डाटा तैयार किया जा रहा है।

इन विषयों के शिक्षकों की मांगी गई जानकारी

जिला शिक्षा कार्यालय ने विद्यालयों से जिन विषयों के योग्य शिक्षकों का विवरण मांगा है, उनमें प्रमुख रूप से—

हिन्दी
अंग्रेजी
राजनीति विज्ञान
अर्थशास्त्र
इतिहास
समाजशास्त्र

शामिल हैं। निर्धारित प्रारूप में शिक्षकों की अद्यतन जानकारी तय समय सीमा के भीतर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

छात्रों को मिलेगा सीधा लाभ

विशेषज्ञों का मानना है कि इस व्यवस्था से नए सरकारी डिग्री कॉलेजों में शिक्षण कार्य बिना विलंब शुरू किया जा सकेगा। योग्य और शोध-अनुभव रखने वाले शिक्षकों की उपलब्धता से स्नातक स्तर की पढ़ाई की गुणवत्ता बेहतर होने की उम्मीद है। साथ ही विद्यार्थियों को अपने ही क्षेत्र में उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा, जिससे उच्च शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने के सरकार के लक्ष्य को भी बल मिलेगा।

विभागीय स्तर पर जारी है तैयारी

फिलहाल जिला शिक्षा कार्यालयों द्वारा योग्य शिक्षकों की पहचान और सूची तैयार करने का कार्य किया जा रहा है। सूची तैयार होने के बाद आवश्यकता के अनुसार संबंधित शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति नवस्थापित सरकारी डिग्री कॉलेजों में की जाएगी। नियमित नियुक्तियां होने तक यही व्यवस्था लागू रहेगी।