पहली बार एक ही ट्रैक पर आमने-सामने आईं भोपाल मेट्रो की दो ट्रेनें, सीएमआरएस ने परखा सिग्नलिंग सिस्टम; जल्द बढ़ेगी रफ्तार और फ्रीक्वेंसी

पहली बार एक ही ट्रैक पर आमने-सामने आईं भोपाल मेट्रो की दो ट्रेनें, सीएमआरएस ने परखा सिग्नलिंग सिस्टम; जल्द बढ़ेगी रफ्तार और फ्रीक्वेंसी

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मेट्रो परियोजना ने एक और महत्वपूर्ण पड़ाव पार कर लिया है। भोपाल मेट्रो के अत्याधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम के परीक्षण के तहत गुरुवार को पहली बार दो मेट्रो ट्रेनें एक ही ट्रैक पर आमने-सामने लाई गईं। यह परीक्षण कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेल सेफ्टी (सीएमआरएस) की टीम की निगरानी में किया गया, जो मेट्रो संचालन की सुरक्षा और तकनीकी क्षमता का मूल्यांकन कर रही है।

यह परीक्षण रानी कमलापति स्टेशन और एमपी नगर स्टेशन के बीच किया गया, जहां दोनों मेट्रो ट्रेनों को नियंत्रित परिस्थितियों में आमने-सामने लाकर सिग्नलिंग सिस्टम, ब्रेकिंग क्षमता, गति नियंत्रण और सुरक्षा प्रोटोकॉल की जांच की गई। अधिकारियों के अनुसार, यह प्रक्रिया मेट्रो के पूर्ण क्षमता से संचालन शुरू करने की दिशा में बेहद अहम मानी जा रही है।

सीएमआरएस की टीम ने किया विस्तृत निरीक्षण

मेट्रो अधिकारियों के मुताबिक, सीएमआरएस की दो अलग-अलग टीमें दो ट्रेनों में सवार होकर ट्रैक और सिग्नलिंग सिस्टम का परीक्षण कर रही हैं। निरीक्षण के दौरान यह देखा गया कि यदि दो ट्रेनें एक ही ट्रैक पर आमने-सामने आ जाएं तो स्वचालित सुरक्षा प्रणाली किस तरह प्रतिक्रिया देती है और दुर्घटना की संभावना को कैसे रोकती है।

परीक्षण में ट्रेन की गति, स्वचालित ब्रेकिंग, सिग्नल रिस्पॉन्स, ट्रैक कम्युनिकेशन और इमरजेंसी कंट्रोल सिस्टम जैसे कई तकनीकी पहलुओं का मूल्यांकन किया गया। अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा मानकों पर खरा उतरने के बाद ही सिग्नलिंग सिस्टम को अंतिम मंजूरी मिलेगी।

26 जून से सामान्य समय पर चलेगी मेट्रो

मेट्रो प्रबंधन ने बताया कि निरीक्षण और तकनीकी परीक्षण पूरा होने के बाद 26 जून से भोपाल मेट्रो फिर अपने निर्धारित समय के अनुसार संचालित होगी। सीएमआरएस की रिपोर्ट मिलने के बाद सिग्नलिंग सिस्टम को औपचारिक रूप से शुरू किया जाएगा, जिससे मेट्रो सेवाओं में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।

अधिकारियों के अनुसार जुलाई महीने से नया परिचालन शेड्यूल लागू किया जा सकता है, जिसमें ट्रेनों की संख्या और फ्रीक्वेंसी दोनों बढ़ाई जाएंगी।

7 किलोमीटर के प्रायोरिटी कॉरिडोर पर पूरा हुआ काम

भोपाल मेट्रो के सुभाष नगर से एम्स तक लगभग 7 किलोमीटर लंबे प्रायोरिटी कॉरिडोर पर सिग्नलिंग सिस्टम का काम पूरा हो चुका है। वर्तमान में इसी कॉरिडोर पर मेट्रो का संचालन किया जा रहा है।

हालांकि, सिग्नलिंग सिस्टम पूरी तरह सक्रिय न होने के कारण अब तक मेट्रो केवल एक ट्रैक पर ही संचालित हो रही थी, जिससे यात्रियों को लंबे अंतराल तक इंतजार करना पड़ता था।

800 करोड़ रुपये की परियोजना का पहला चरण

भोपाल और इंदौर मेट्रो परियोजनाओं के लिए लगभग 800 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक सिग्नलिंग और ट्रेन कंट्रोल सिस्टम विकसित किया जा रहा है। वर्तमान परीक्षण इसी बड़े तकनीकी उन्नयन का पहला चरण माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि सिग्नलिंग सिस्टम किसी भी मेट्रो नेटवर्क की रीढ़ होता है। यही प्रणाली ट्रेनों के बीच सुरक्षित दूरी बनाए रखने, गति नियंत्रित करने, आपातकालीन स्थिति में प्रतिक्रिया देने और स्वचालित संचालन सुनिश्चित करने का काम करती है।

अभी एक ही ट्रैक पर चल रही है मेट्रो

फिलहाल भोपाल मेट्रो में ट्रेनें केवल डाउन ट्रैक पर चलाई जा रही हैं। यही ट्रेन एक दिशा में जाने के बाद उसी ट्रैक से वापस लौटती है। जबकि दूसरा ट्रैक अभी नियमित परिचालन के लिए उपयोग में नहीं लिया जा रहा है।

इसी वजह से यात्रियों को लगभग 75 मिनट के अंतराल पर मेट्रो उपलब्ध हो रही है, जो किसी भी आधुनिक मेट्रो प्रणाली के लिए काफी अधिक माना जाता है।

नए सिस्टम से क्या होगा फायदा?

सिग्नलिंग सिस्टम शुरू होने के बाद भोपाल मेट्रो की परिचालन क्षमता में बड़ा सुधार होगा। इसके तहत:

दोनों ट्रैक पर एक साथ मेट्रो का संचालन संभव होगा।
ट्रेनों के बीच का अंतराल काफी कम हो जाएगा।
यात्रियों को कम समय में मेट्रो उपलब्ध होगी।
पीक आवर्स में अतिरिक्त ट्रेनें चलाई जा सकेंगी।
यात्रा समय में कमी आएगी।
सुरक्षा और संचालन क्षमता दोनों बेहतर होंगी।
दिल्ली मेट्रो जैसी तकनीक से होगा संचालन

भोपाल मेट्रो में वही अत्याधुनिक सिग्नलिंग तकनीक लागू की जा रही है, जिसका उपयोग देश की सबसे व्यस्त मेट्रो सेवाओं में शामिल दिल्ली मेट्रो में किया जाता है। यह तकनीक ट्रेनों की वास्तविक समय में निगरानी, स्वचालित नियंत्रण और बेहतर यातायात प्रबंधन सुनिश्चित करती है।

मेट्रो अधिकारियों का मानना है कि सिग्नलिंग सिस्टम के पूरी तरह लागू होने के बाद भोपाल मेट्रो की सेवाएं अधिक तेज, सुरक्षित और यात्रियों के लिए सुविधाजनक बन जाएंगी। इससे राजधानी में सार्वजनिक परिवहन को नई मजबूती मिलेगी और हजारों दैनिक यात्रियों को राहत मिलेगी।