यूपी में आंगनबाड़ी से ही शुरू होगी बच्चों की स्कूल तैयारी, 'को-लोकेशन' और साइंटिफिक मैपिंग अभियान मिशन मोड में
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत प्रारंभिक शिक्षा को मजबूत करने की नई पहल
उत्तर प्रदेश सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के तहत प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा को अधिक प्रभावी बनाने के लिए राज्यभर में बड़ा अभियान शुरू किया है। इस पहल के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों और कक्षा-1 संचालित परिषदीय विद्यालयों को आपस में जोड़ने के लिए 'को-लोकेशन' और 'साइंटिफिक मैपिंग' अभियान मिशन मोड में चलाया जा रहा है।
सरकार का उद्देश्य बच्चों को आंगनबाड़ी स्तर से ही स्कूली शिक्षा के लिए तैयार करना है, ताकि प्राथमिक विद्यालय में प्रवेश के समय उनका शैक्षणिक, मानसिक और सामाजिक विकास बेहतर हो सके।
शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं का होगा एकीकरण
यह अभियान भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के संयुक्त दिशा-निर्देशों के अनुरूप संचालित किया जा रहा है।
इस पहल के माध्यम से बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा के साथ-साथ पोषण, स्वास्थ्य सेवाएं और प्री-स्कूल गतिविधियां एकीकृत रूप से उपलब्ध कराई जाएंगी। सरकार का मानना है कि इससे बच्चों का समग्र विकास सुनिश्चित होगा और स्कूल छोड़ने की संभावना भी कम होगी।
30 जून तक पूरी होगी राज्यव्यापी मैपिंग
अभियान को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए 30 जून तक की समयसीमा निर्धारित की गई है।
महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी और निदेशक बाल विकास सेवा हर्षिता माथुर द्वारा जारी संयुक्त निर्देशों के अनुसार सभी जिलों में आंगनबाड़ी केंद्रों और प्राथमिक विद्यालयों की मैपिंग की जाएगी। इसके बाद संबंधित विद्यालयों का U-DISE कोड दर्ज करते हुए U-DISE और 'हॉट कुक्ड मील' पोर्टल पर आवश्यक डेटा अपडेट किया जाएगा।
इस प्रक्रिया से बेसिक शिक्षा विभाग और बाल विकास विभाग के आंकड़ों में एकरूपता सुनिश्चित की जाएगी।
क्या है 'को-लोकेशन' और साइंटिफिक मैपिंग?
नई व्यवस्था के तहत जो आंगनबाड़ी केंद्र पहले से ही विद्यालय परिसर में संचालित हो रहे हैं, उन्हें 'को-लोकेटेड आंगनबाड़ी सेंटर' के रूप में चिन्हित किया जाएगा।
जो केंद्र विद्यालय परिसर से बाहर हैं, उन्हें निर्धारित दूरी के आधार पर निकटतम प्राथमिक विद्यालय से जोड़ा जाएगा।
विद्यालय से 200 मीटर के दायरे में स्थित आंगनबाड़ी केंद्रों को उसी स्कूल से मैप किया जाएगा।
यदि विद्यालय परिसर में पर्याप्त स्थान उपलब्ध नहीं है, तो शहरी क्षेत्रों में 500 मीटर और ग्रामीण क्षेत्रों में 1 किलोमीटर के भीतर स्थित विद्यालयों को प्राथमिकता दी जाएगी।
इस व्यवस्था से बच्चों को समय पर गर्म पका हुआ भोजन (हॉट कुक्ड मील) और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराना आसान होगा।
'बालवाटिका' और 'निपुण भारत मिशन' को मिलेगा बल
सरकार का मानना है कि यह पहल प्रदेश में संचालित 'बालवाटिका' और 'निपुण भारत मिशन' को और अधिक प्रभावी बनाएगी।
प्रारंभिक शिक्षा के दौरान बच्चों की भाषा, गणित, संज्ञानात्मक क्षमता और सामाजिक कौशल को विकसित करने में इस मॉडल की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। साथ ही पहली कक्षा में प्रवेश के दौरान बच्चों का सीखने का स्तर भी बेहतर होने की उम्मीद है।
जिलों में होगा संयुक्त सत्यापन
अभियान में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक जिले में जिला कार्यक्रम अधिकारी (DPO) और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) संयुक्त रूप से भौतिक सत्यापन करेंगे।
इसके बाद पोर्टल पर दर्ज सभी आंकड़ों का मिलान किया जाएगा, जिससे विभागीय रिकॉर्ड पूरी तरह सटीक और अद्यतन रह सके।
शिक्षा व्यवस्था में दीर्घकालिक सुधार की दिशा में कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि आंगनबाड़ी और प्राथमिक विद्यालयों के बीच बेहतर समन्वय बच्चों के प्रारंभिक सीखने की गुणवत्ता में सुधार करेगा। इससे स्कूल रेडीनेस बढ़ेगी, पोषण संबंधी सेवाओं की पहुंच मजबूत होगी और शिक्षा प्रणाली में बेहतर समन्वय स्थापित करने में मदद मिलेगी।
उत्तर प्रदेश सरकार की यह पहल प्रारंभिक बाल शिक्षा को अधिक संगठित, समावेशी और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
news desk MPcg