बिहार के कथित 'रिशुश्री महाघोटाले' पर तेजस्वी यादव के 20 सवाल: NDA सरकार से मांगा जवाब, न्यायिक जांच की उठाई मांग

बिहार के कथित 'रिशुश्री महाघोटाले' पर तेजस्वी यादव के 20 सवाल: NDA सरकार से मांगा जवाब, न्यायिक जांच की उठाई मांग

बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के वरिष्ठ नेता तेजस्वी यादव ने कथित 'रिशुश्री महाघोटाला' मामले को लेकर एक बार फिर राज्य की एनडीए सरकार पर तीखा हमला बोला है। सोमवार को सोशल मीडिया पर साझा की गई विस्तृत पोस्ट में उन्होंने सरकार से 20 सवाल पूछते हुए आरोप लगाया कि मामले में हजारों करोड़ रुपये की अनियमितताओं की आशंका है और इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

तेजस्वी यादव ने कहा कि बिहार में पिछले 21 वर्षों से एनडीए सरकार सत्ता में है, इसलिए प्रशासनिक और वित्तीय जवाबदेही भी उसी की बनती है। उन्होंने सरकार से मांग की कि मामले से जुड़े प्रत्येक आरोप पर सार्वजनिक रूप से जवाब दिया जाए और दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि जांच एजेंसियों की कार्रवाई फिलहाल केवल निचले स्तर के अधिकारियों और कर्मचारियों तक सीमित दिखाई दे रही है, जबकि कथित तौर पर बड़े अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि यदि जांच एजेंसियों के पास पर्याप्त साक्ष्य हैं, तो कार्रवाई केवल छोटे कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

टेंडर प्रक्रिया और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल

तेजस्वी यादव ने पूछा कि यदि एक सामान्य ठेकेदार बताए जा रहे व्यक्ति के पास विभिन्न सरकारी विभागों के टेंडर प्रभावित करने की क्षमता थी, तो राज्य का निगरानी तंत्र इतने वर्षों तक निष्क्रिय क्यों रहा।

उन्होंने सवाल उठाया कि क्या संबंधित विभागों के अधिकारियों ने अपनी जिम्मेदारियों का पालन नहीं किया या फिर निजी लाभ के लिए कथित अनियमितताओं को नजरअंदाज किया।

तेजस्वी ने यह भी दावा किया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में सामने आए कथित चैट्स से कई वरिष्ठ अधिकारियों के साथ संपर्क के संकेत मिले हैं। उन्होंने सरकार से पूछा कि यदि ऐसा है तो संबंधित अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच क्यों नहीं की जा रही।

निलंबित अधिकारियों और चार्जशीट को लेकर उठाए सवाल

राजद नेता ने विशेष निगरानी इकाई (SVU) की चार्जशीट पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि जिन दो आईएएस अधिकारियों को निलंबित किया गया है, उनका नाम चार्जशीट में शामिल क्यों नहीं किया गया और उनकी गिरफ्तारी अब तक क्यों नहीं हुई।

उन्होंने आरोप लगाया कि यदि जांच निष्पक्ष होती तो सभी जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ समान रूप से कार्रवाई होती।

कमीशन और सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप

तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि जांच में बिल पास कराने और सरकारी टेंडर दिलाने के बदले दो से साढ़े तीन प्रतिशत तक कमीशन लिए जाने की बात सामने आई है। उन्होंने कहा कि यदि यह आरोप सही हैं, तो राज्य सरकार की घोषित 'जीरो टॉलरेंस ऑन करप्शन' नीति पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

उन्होंने सरकार से यह भी पूछा कि जिन विभागों के अधिकारियों की गिरफ्तारी हुई है, उनके कार्यकाल में कितनी सरकारी राशि खर्च हुई और उसमें कितनी अनियमितताओं की जांच की जा रही है।

न्यायिक जांच की मांग

तेजस्वी यादव ने पूरे मामले की स्वतंत्र न्यायिक जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि कथित तौर पर रिशुश्री और उससे जुड़ी कंपनियों को मिले सभी सरकारी ठेकों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सके।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जिन कंपनियों को सरकारी ठेके मिले, उनकी चयन प्रक्रिया की स्वतंत्र समीक्षा कराई जानी चाहिए।

99 संपत्तियों और कथित विदेशी यात्राओं का उल्लेख

तेजस्वी यादव ने अपनी पोस्ट में दावा किया कि जांच के दौरान 99 संपत्तियों के दस्तावेज, नकदी और आभूषण बरामद होने की जानकारी सामने आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों और उनके परिजनों की कथित विदेशी यात्राओं, हवाई टिकटों और महंगे उपहारों का खर्च भी उठाया गया।

उन्होंने सरकार से पूछा कि यदि ऐसे वित्तीय लेन-देन हुए, तो आर्थिक अपराध इकाई (EOU), गृह विभाग, निगरानी विभाग और अन्य एजेंसियां समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं कर सकीं।

ई-टेंडरिंग व्यवस्था पर भी सवाल

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि बिहार में अधिकांश सरकारी टेंडर ई-टेंडरिंग प्रणाली के माध्यम से जारी किए जाते हैं। ऐसे में यदि कथित टेंडर सिंडिकेट सक्रिय था, तो डिजिटल प्रणाली और निगरानी तंत्र उसे रोकने में विफल क्यों रहे।

उन्होंने आंतरिक ऑडिट प्रणाली, विजिलेंस व्यवस्था और विभागीय निगरानी तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए।

विभागीय मंत्रियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग

तेजस्वी यादव ने कहा कि जिन विभागों में कथित अनियमितताओं की जांच चल रही है, उनके विभागीय मंत्रियों को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए जवाब देना चाहिए। उन्होंने यह भी पूछा कि यदि केंद्रीय एजेंसियों को पहले से संकेत मिल चुके थे, तो राज्य स्तर पर एफआईआर दर्ज करने और कार्रवाई शुरू करने में कथित देरी क्यों हुई।

सामाजिक प्रतिनिधित्व को लेकर भी उठाया मुद्दा

अपने 20वें सवाल में तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि बड़े भ्रष्टाचार मामलों में अक्सर कार्रवाई का दायरा दलित, पिछड़े और मुस्लिम समुदाय के अधिकारियों तक सीमित रह जाता है, जबकि शीर्ष स्तर पर बैठे प्रभावशाली लोगों तक जांच नहीं पहुंचती। उन्होंने सरकार से इस आरोप पर भी स्पष्टीकरण मांगा।

सरकार की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार

समाचार लिखे जाने तक बिहार सरकार या एनडीए के प्रमुख घटक दलों की ओर से तेजस्वी यादव द्वारा पूछे गए 20 सवालों पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।

गौरतलब है कि तेजस्वी यादव ने अपने सभी आरोप सोशल मीडिया पोस्ट और उपलब्ध जांच संबंधी रिपोर्टों के आधार पर लगाए हैं। इन आरोपों की न्यायिक या अंतिम जांच रिपोर्ट से पुष्टि होना अभी शेष है। मामले की जांच विभिन्न एजेंसियों के स्तर पर जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने तथा संबंधित न्यायिक प्रक्रियाओं के बाद ही सामने आएंगे।