'मटन टैक्स' को लेकर पंजाब और जम्मू-कश्मीर के बीच बढ़ा विवाद, उमर अब्दुल्ला ने पंजाब CM को लिखा पत्र; समाधान नहीं हुआ तो केंद्र से हस्तक्षेप की मांग
जम्मू-कश्मीर और पंजाब के बीच कथित 'मटन टैक्स' को लेकर विवाद एक बार फिर गहरा गया है। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पंजाब सरकार द्वारा मटन कारोबारियों से कथित रूप से वसूले जा रहे शुल्क को "पूरी तरह अनुचित" बताते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि राज्य स्तर पर इस मुद्दे का समाधान नहीं हुआ तो मामला उत्तर क्षेत्रीय राज्य परिषद (North Zonal Council) और केंद्र सरकार के समक्ष उठाया जाएगा।
श्रीनगर स्थित एसकेआईसीसी (Sher-i-Kashmir International Convention Centre) में पत्रकारों से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि यह मुद्दा केवल व्यापार से जुड़ा नहीं है, बल्कि अंतरराज्यीय आवाजाही और व्यापारिक अधिकारों से भी संबंधित है।
क्या है पूरा मामला?
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के अनुसार, जम्मू-कश्मीर के मटन व्यापारी राजस्थान और अन्य राज्यों से पशुधन खरीदकर उसे सड़क मार्ग के जरिए जम्मू-कश्मीर लाते हैं। इस दौरान उन्हें पंजाब से होकर गुजरना पड़ता है।
मुख्यमंत्री का कहना है कि ये व्यापारी पंजाब में न तो पशुओं की खरीद करते हैं और न ही वहां बिक्री करते हैं। उनका दावा है कि केवल राज्य के राजमार्गों का उपयोग करने के बावजूद उनसे शुल्क या कर वसूला जा रहा है, जिसे उन्होंने "अवैध" और "अनुचित" करार दिया।
पंजाब सरकार को दोबारा लिखा पत्र
उमर अब्दुल्ला ने बताया कि उन्होंने यह मुद्दा पहली बार नहीं उठाया है। उनके अनुसार, कई महीने पहले भी उन्होंने व्यक्तिगत रूप से पंजाब के मुख्यमंत्री के साथ इस विषय पर चर्चा की थी।
अब एक बार फिर उन्होंने औपचारिक पत्र लिखकर आग्रह किया है कि इस व्यवस्था की समीक्षा की जाए और जम्मू-कश्मीर के व्यापारियों को राहत दी जाए।
उन्होंने कहा कि अंतरराज्यीय व्यापार को अनावश्यक प्रशासनिक या वित्तीय बाधाओं का सामना नहीं करना चाहिए।
'सिर्फ हाईवे इस्तेमाल करने पर टैक्स क्यों?'
मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि यदि व्यापारी केवल पंजाब के राजमार्गों से गुजर रहे हैं और राज्य के भीतर कोई व्यावसायिक लेन-देन नहीं कर रहे, तो उनसे किसी प्रकार का शुल्क वसूलने का औचित्य क्या है।
उन्होंने कहा कि इस तरह का अतिरिक्त आर्थिक बोझ अंततः मटन व्यापारियों और उपभोक्ताओं दोनों को प्रभावित करता है।
समाधान नहीं हुआ तो केंद्र सरकार से करेंगे हस्तक्षेप की मांग
उमर अब्दुल्ला ने स्पष्ट किया कि यदि पंजाब सरकार इस विषय पर उचित निर्णय नहीं लेती है, तो जम्मू-कश्मीर सरकार इसे उत्तर क्षेत्रीय राज्य परिषद की बैठक में उठाएगी।
इसके साथ ही केंद्र सरकार से भी हस्तक्षेप कर अंतरराज्यीय व्यापार से जुड़े इस विवाद का समाधान कराने का अनुरोध किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्यों के बीच व्यापारिक गतिविधियां संविधान की भावना और समान अवसर के सिद्धांतों के अनुरूप संचालित होनी चाहिए।
व्यापारियों पर आर्थिक असर का दावा
जम्मू-कश्मीर के पशुधन एवं मटन कारोबार से जुड़े व्यापारी लंबे समय से दावा करते रहे हैं कि पंजाब से गुजरने के दौरान विभिन्न प्रकार के शुल्कों के कारण उनकी परिवहन लागत बढ़ जाती है।
व्यापारियों का कहना है कि अतिरिक्त खर्च का असर अंततः जम्मू-कश्मीर में मटन की खुदरा कीमतों पर भी पड़ सकता है। हालांकि, इस संबंध में सरकार की ओर से कोई आधिकारिक आर्थिक आकलन सार्वजनिक नहीं किया गया है।
कानूनी और प्रशासनिक पहलू
यह विवाद अंतरराज्यीय परिवहन, पशुधन की आवाजाही और स्थानीय शुल्कों की वैधता जैसे मुद्दों से जुड़ा माना जा रहा है।
यदि मामला उत्तर क्षेत्रीय राज्य परिषद या केंद्र सरकार तक पहुंचता है, तो संबंधित विभाग यह स्पष्ट कर सकते हैं कि कथित शुल्क किस कानूनी प्रावधान के तहत लगाया जा रहा है और क्या वह अंतरराज्यीय व्यापार के मौजूदा नियमों के अनुरूप है।
पंजाब सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार
समाचार लिखे जाने तक पंजाब सरकार की ओर से मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के ताजा बयान या पत्र पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं की गई थी।
अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि दोनों राज्य आपसी बातचीत के माध्यम से इस विवाद का समाधान निकालते हैं या मामला केंद्र सरकार और अंतरराज्यीय परिषद के स्तर तक पहुंचता है।
महत्वपूर्ण: मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने जिस शुल्क को "मटन टैक्स" या "अवैध कर" बताया है, वह उनका आरोप और राजनीतिक/प्रशासनिक पक्ष है। संबंधित शुल्क की वैधता और प्रकृति पर अंतिम स्थिति संबंधित सरकारी विभागों या सक्षम प्राधिकरण के आधिकारिक स्पष्टीकरण के बाद ही स्पष्ट होगी।
news desk MPcg