भारत को बड़ी अंतरराष्ट्रीय सफलता, बिमल एन. पटेल बने ITLOS के जज; 2026-2035 तक संभालेंगे जिम्मेदारी

भारत को बड़ी अंतरराष्ट्रीय सफलता, बिमल एन. पटेल बने ITLOS के जज; 2026-2035 तक संभालेंगे जिम्मेदारी

भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक बड़ी कूटनीतिक और कानूनी उपलब्धि हासिल की है। भारत के उम्मीदवार प्रोफेसर डॉ. बिमल एन. पटेल को अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून न्यायाधिकरण (ITLOS) का न्यायाधीश चुना गया है। यह नियुक्ति भारत के लिए वैश्विक समुद्री कानून व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

2026 से 2035 तक रहेंगे जज

चुनाव के अनुसार, डॉ. बिमल एन. पटेल 2026 से 2035 तक ITLOS जज के रूप में कार्य करेंगे। उन्हें संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UNCLOS) के सदस्य देशों का व्यापक समर्थन प्राप्त हुआ है।

इस चयन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की बढ़ती कूटनीतिक और कानूनी उपस्थिति के रूप में देखा जा रहा है।

सदस्य देशों का मिला व्यापक समर्थन

इस चुनाव प्रक्रिया में भारत को कई देशों का समर्थन मिला। भारत सरकार ने सभी सदस्य देशों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह परिणाम वैश्विक समुदाय के भारत पर विश्वास को दर्शाता है।

विदेश मंत्रालय ने भी इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त की है और इसे भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका का संकेत बताया है।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दी बधाई

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर डॉ. बिमल एन. पटेल को बधाई दी। उन्होंने UNCLOS सदस्य देशों को समर्थन के लिए धन्यवाद भी दिया।

उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि भारत के लिए गर्व का विषय है और अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून में भारत की मजबूत स्थिति को दर्शाती है।

क्या है ITLOS और UNCLOS

ITLOS (International Tribunal for the Law of the Sea) एक अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण है जो समुद्री सीमाओं, संसाधनों और समुद्री विवादों से जुड़े मामलों का निपटारा करता है।

UNCLOS (United Nations Convention on the Law of the Sea) एक अंतरराष्ट्रीय संधि है, जो समुद्री क्षेत्रों, संसाधनों और पर्यावरण के उपयोग के नियम तय करती है। इसमें लगभग 168 देश शामिल हैं। भारत ने इस संधि पर 1982 में हस्ताक्षर किए थे और 1995 में इसे मंजूरी दी थी।

भारत की वैश्विक स्थिति को मिला नया बल

विशेषज्ञों के अनुसार, इस नियुक्ति से अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून और कूटनीति के क्षेत्र में भारत की भूमिका और मजबूत होगी। यह फैसला वैश्विक मंच पर भारत के बढ़ते प्रभाव और भरोसे को भी दर्शाता है।