फरीदाबाद के रेनीवेल पानी की जांच में बढ़े आर्सेनिक और मैंगनीज के संकेत, जल गुणवत्ता पर उठे सवाल; विशेषज्ञों ने दी सतर्क रहने की सलाह

फरीदाबाद के रेनीवेल पानी की जांच में बढ़े आर्सेनिक और मैंगनीज के संकेत, जल गुणवत्ता पर उठे सवाल; विशेषज्ञों ने दी सतर्क रहने की सलाह

हरियाणा के फरीदाबाद में पेयजल की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ गई है। फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण (FMDA) और केंद्रीय भूजल बोर्ड द्वारा कराए गए एक वैज्ञानिक सर्वे में शहर के कुछ रेनीवेल (Ranney Wells) से लिए गए पानी के नमूनों में आर्सेनिक, मैंगनीज और आयरन जैसे तत्व निर्धारित मानकों से अधिक पाए जाने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के बाद संबंधित विभागों ने प्रभावित जल स्रोतों की निगरानी बढ़ाने और जल शोधन व्यवस्था को और मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी है।

हालांकि अधिकारियों का कहना है कि घरों तक पहुंचने से पहले विभिन्न रेनीवेल का पानी मिश्रित हो जाता है, जिससे इन तत्वों का स्तर काफी हद तक सामान्य हो जाता है। इसके बावजूद विशेषज्ञों ने भूजल की गुणवत्ता को लेकर दीर्घकालिक समाधान अपनाने की जरूरत पर जोर दिया है।

पहली बार हुआ विस्तृत वैज्ञानिक सर्वे

जानकारी के अनुसार, लगभग 40 किलोमीटर क्षेत्र में व्यापक वैज्ञानिक सर्वे किया गया। इस दौरान केवल पानी ही नहीं, बल्कि मिट्टी के नमूनों की भी जांच की गई ताकि भूजल प्रदूषण के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके।

सर्वे रिपोर्ट में सामने आया कि—

रेनीवेल नंबर-5 में आर्सेनिक का स्तर अपेक्षाकृत अधिक मिला।
रेनीवेल नंबर-20 में मैंगनीज और आयरन की मात्रा सामान्य सीमा से ऊपर दर्ज की गई।
रेनीवेल नंबर-22 में भी आर्सेनिक की अधिकता पाई गई।

रिपोर्ट के बाद एफएमडीए और भूजल बोर्ड ने प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी बढ़ाने तथा आधुनिक जल शोधन तकनीक अपनाने की योजना पर काम शुरू कर दिया है।

28 लाख आबादी की प्यास बुझाने की चुनौती

फरीदाबाद की आबादी अब 28 लाख से अधिक हो चुकी है। शहर की जलापूर्ति मुख्य रूप से 22 रेनीवेल और लगभग 1700 ट्यूबवेल पर निर्भर है।

आंकड़ों के अनुसार—

शहर को प्रतिदिन लगभग 340 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) पानी की आवश्यकता है।
वर्तमान में लगभग 280 एमएलडी पानी की आपूर्ति हो रही है।
गर्मियों के मौसम में मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर और अधिक बढ़ जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती आबादी और लगातार भूजल दोहन भविष्य में जल संकट को और गंभीर बना सकता है।

विशेषज्ञों ने बताया स्वास्थ्य पर संभावित प्रभाव

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, यदि लंबे समय तक अत्यधिक मात्रा में आर्सेनिक या अन्य भारी धातुओं वाला पानी पीया जाए तो इससे कई स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

संभावित प्रभावों में शामिल हैं—

त्वचा संबंधी रोग
लीवर पर प्रतिकूल प्रभाव
हड्डियों की कमजोरी
पाचन संबंधी समस्याएं
लंबे समय तक अत्यधिक संपर्क रहने पर कुछ गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ना

हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले अंतिम पेयजल गुणवत्ता, नियमित परीक्षण और निर्धारित मानकों के आधार पर वैज्ञानिक मूल्यांकन आवश्यक होता है।

क्यों बिगड़ रही है भूजल की गुणवत्ता?

भूजल विशेषज्ञों के अनुसार फरीदाबाद में भूजल गुणवत्ता प्रभावित होने के पीछे कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं—

लगातार बढ़ता भूजल दोहन
हजारों निजी और सरकारी बोरवेल से अत्यधिक जल निकासी
जलस्तर का लगातार नीचे जाना
गहराई से निकले पानी में प्राकृतिक खनिजों की अधिक मौजूदगी
यमुना नदी में औद्योगिक प्रदूषण का संभावित प्रभाव
रासायनिक अपशिष्ट के भूजल तक पहुंचने की आशंका

इन सभी कारणों की विस्तृत वैज्ञानिक जांच जारी है।

अधिकारियों ने क्या कहा?

एफएमडीए के मुख्य अभियंता विशाल बंसल के अनुसार, कुछ रेनीवेल में सीमित मात्रा में कुछ तत्व अपेक्षाकृत अधिक मिले थे, लेकिन विभिन्न स्रोतों का पानी पाइपलाइन नेटवर्क में मिल जाने के बाद इनकी सांद्रता काफी कम हो जाती है। उन्होंने बताया कि भविष्य में जल गुणवत्ता को और बेहतर बनाने के लिए आधुनिक जल शोधन संयंत्र (Water Treatment System) स्थापित किए जा रहे हैं।

वहीं स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि जल गुणवत्ता की नियमित निगरानी जारी रखी जाए और यदि किसी क्षेत्र में मानकों से अधिक प्रदूषण की पुष्टि होती है तो वहां तत्काल उपचारात्मक कदम उठाए जाएं।

आगे क्या होगा?

रिपोर्ट सामने आने के बाद संबंधित विभाग अब—

प्रभावित रेनीवेल की नियमित मॉनिटरिंग करेंगे।
जल गुणवत्ता की दोबारा जांच कराएंगे।
आधुनिक जल शोधन संयंत्र स्थापित करेंगे।
भूजल संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण पर विशेष योजना तैयार करेंगे।

फिलहाल प्रशासन का कहना है कि नागरिकों को घबराने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन भूजल की गुणवत्ता में सुधार के लिए दीर्घकालिक उपायों पर तेजी से काम किया जाएगा।