मेरठ में रिश्वत लेते दारोगा रंगेहाथ गिरफ्तार: केस से नाम हटाने के बदले मांगे थे ₹2 लाख, एंटी करप्शन टीम ने ₹30 हजार लेते ही दबोचा

मेरठ में रिश्वत लेते दारोगा रंगेहाथ गिरफ्तार: केस से नाम हटाने के बदले मांगे थे ₹2 लाख, एंटी करप्शन टीम ने ₹30 हजार लेते ही दबोचा

उत्तर प्रदेश के मेरठ में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एंटी करप्शन संगठन (Anti Corruption Organisation) ने गंगानगर थाने में तैनात एक उपनिरीक्षक (दारोगा) को रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया है। आरोपी दारोगा पर एक आपराधिक मुकदमे की विवेचना से नाम हटाने के बदले दो लाख रुपये रिश्वत मांगने का आरोप है। शिकायत मिलने के बाद एंटी करप्शन टीम ने पूरे मामले का सत्यापन किया और योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप बिछाकर आरोपी को 30 हजार रुपये की रिश्वत लेते समय पकड़ लिया।

गिरफ्तारी के बाद आरोपी को पूछताछ के लिए सिविल लाइन थाने ले जाया गया, जहां उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और यह भी पता लगाया जा रहा है कि आरोपी किसी अन्य मामले में भी अवैध वसूली या रिश्वतखोरी में शामिल था या नहीं।

शिकायत के बाद बिछाया गया ट्रैप

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार उपनिरीक्षक प्रकाश चंद, वर्ष 1993 बैच के अधिकारी हैं और वर्तमान में मेरठ के गंगानगर थाने में तैनात थे। आरोप है कि उन्होंने एक व्यक्ति से उसके खिलाफ दर्ज मुकदमे की विवेचना में राहत दिलाने और नाम हटाने के बदले दो लाख रुपये की रिश्वत की मांग की थी।

पीड़ित ने इसकी शिकायत एंटी करप्शन संगठन से की। शिकायत मिलने के बाद टीम ने पहले आरोपों का सत्यापन किया और पर्याप्त आधार मिलने पर ट्रैप ऑपरेशन की योजना बनाई।

पुलिस लाइन गेट नंबर-3 पर हुई गिरफ्तारी

एंटी करप्शन टीम ने शिकायतकर्ता को निर्देश दिया कि वह तय रकम की पहली किश्त लेकर आरोपी से मिले। इसके लिए दारोगा ने कथित तौर पर पुलिस लाइन के गेट नंबर-3 को स्थान तय किया।

निर्धारित समय पर शिकायतकर्ता 30 हजार रुपये लेकर वहां पहुंचा। एंटी करप्शन टीम पहले से ही सादी वर्दी में आसपास मौजूद थी। जैसे ही आरोपी दारोगा ने रिश्वत की राशि स्वीकार की, टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उसे मौके पर ही रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तारी के दौरान रिश्वत की राशि जब्त की गई और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए आरोपी को हिरासत में ले लिया गया।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज

गिरफ्तारी के बाद आरोपी उपनिरीक्षक के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की गई। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि रिश्वत की मांग किस परिस्थिति में की गई थी और क्या आरोपी ने पहले भी इसी तरह अन्य मामलों में लोगों से धन उगाही की थी।

अधिकारियों के अनुसार, शिकायतकर्ता के बयान, बरामद रिश्वत की रकम, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और अन्य दस्तावेजों को जांच का हिस्सा बनाया गया है।

विभागीय जांच भी होगी

कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ पुलिस विभाग भी आरोपी दारोगा के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करेगा। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो निलंबन, सेवा संबंधी अनुशासनात्मक कार्रवाई तथा अन्य विभागीय दंडात्मक कदम उठाए जा सकते हैं।

वायरल हुआ गिरफ्तारी का वीडियो

कार्रवाई के बाद आरोपी की गिरफ्तारी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसमें एंटी करप्शन टीम आरोपी को हिरासत में लेकर जाती दिखाई दे रही है। हालांकि वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन आरोपी की गिरफ्तारी की पुष्टि संबंधित अधिकारियों द्वारा की गई है।

भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती का संदेश

एंटी करप्शन संगठन का कहना है कि राज्य सरकार की भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कार्रवाई लगातार जारी है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी किसी कार्य के बदले रिश्वत की मांग करता है, तो इसकी सूचना तुरंत एंटी करप्शन हेल्पलाइन या संबंधित एजेंसी को दें ताकि दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सके।

जांच के प्रमुख बिंदु
गंगानगर थाने में तैनात दारोगा पर दो लाख रुपये रिश्वत मांगने का आरोप।
मुकदमे की विवेचना से नाम हटाने के बदले मांगी गई थी रिश्वत।
एंटी करप्शन टीम ने शिकायत का सत्यापन कर ट्रैप ऑपरेशन चलाया।
पुलिस लाइन गेट नंबर-3 पर 30 हजार रुपये लेते समय आरोपी गिरफ्तार।
रिश्वत की रकम जब्त, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू।
आरोपी से पूछताछ जारी, अन्य मामलों में संभावित संलिप्तता की भी जांच।
विभागीय कार्रवाई और सेवा संबंधी अनुशासनात्मक जांच भी प्रस्तावित।

नोट: यह समाचार उपलब्ध पुलिस एवं एंटी करप्शन संगठन की प्रारंभिक जानकारी पर आधारित है। मामले की जांच जारी है। अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया और विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट होंगे।