अमेरिका-ईरान शांति समझौते का 'आर्टिकल-5' क्यों बना नए विवाद की वजह? होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण को लेकर फिर बढ़ा तनाव
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच हुआ शांति समझौता एक बार फिर विवादों में आ गया है। दोनों देशों के बीच हुए 14 सूत्रीय अंतरिम समझौते का सबसे चर्चित प्रावधान 'आर्टिकल-5' अब नए टकराव का केंद्र बन गया है। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर इस प्रावधान के उल्लंघन का आरोप लगा रहे हैं, जबकि होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में हाल के दिनों में सैन्य गतिविधियां और हमलों की खबरों ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
हालांकि, इस कथित 14-बिंदु समझौते और उसके 'आर्टिकल-5' की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में इसका उल्लेख किया गया है, लेकिन अमेरिका और ईरान की ओर से पूरे दस्तावेज को सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसलिए इससे जुड़े दावों को उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर ही देखा जाना चाहिए।
क्या है पूरा मामला?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच 17 जून को एक अंतरिम शांति समझौता हुआ था, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव कम करना और आगामी 60 दिनों के भीतर स्थायी समझौते का रास्ता तैयार करना था।
बताया गया कि इस समझौते के तहत अमेरिका आर्थिक प्रतिबंधों में राहत देने पर विचार करेगा, जबकि ईरान अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षित नौवहन सुनिश्चित करेगा।
लेकिन समझौते के कुछ ही दिनों बाद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर समझौते के उल्लंघन के आरोप लगाए, जिससे क्षेत्र में तनाव दोबारा बढ़ गया।
क्या है 'आर्टिकल-5'?
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, विवाद की सबसे बड़ी वजह समझौते का आर्टिकल-5 है, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े संचालन और सुरक्षा के लिए कई प्रमुख प्रावधान शामिल बताए गए हैं।
1. व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही
आर्टिकल-5 के तहत ईरान अगले 60 दिनों तक अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराएगा। इस दौरान जहाजों से किसी प्रकार का टोल टैक्स या अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा।
2. समुद्री बारूदी सुरंगें हटाने का प्रावधान
रिपोर्टों के अनुसार, ईरान को 30 दिनों के भीतर समुद्री मार्ग में मौजूद बारूदी सुरंगों और अन्य सैन्य बाधाओं को हटाने की जिम्मेदारी दी गई है, ताकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित न हो।
3. ओमान के साथ समन्वय
समझौते में यह भी बताया गया है कि ईरान, ओमान के साथ मिलकर होर्मुज स्ट्रेट की समुद्री सुरक्षा और संचालन व्यवस्था पर समन्वय करेगा।
4. अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का पालन
आर्टिकल-5 में कथित तौर पर यह भी उल्लेख है कि समुद्री मार्ग का संचालन अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों तथा क्षेत्रीय देशों के संप्रभु अधिकारों के अनुरूप किया जाएगा।
विवाद की असली वजह क्या है?
तनाव का सबसे बड़ा कारण होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण और प्रशासनिक अधिकार माना जा रहा है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान का कहना है कि यह समुद्री मार्ग उसकी सुरक्षा व्यवस्था के तहत रहेगा और उसके प्रबंधन में किसी बाहरी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं किया जाएगा। कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि ईरान जहाजों से शुल्क या नियंत्रण संबंधी अधिकार बनाए रखना चाहता है।
दूसरी ओर, अमेरिका और कई खाड़ी देश इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर किसी एक देश के विशेष नियंत्रण या अतिरिक्त शुल्क के विरोध में हैं। उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित की जानी चाहिए।
होर्मुज स्ट्रेट क्यों है दुनिया के लिए इतना महत्वपूर्ण?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है। फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ने वाला यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की दृष्टि से बेहद अहम माना जाता है।
दुनिया के तेल और प्राकृतिक गैस निर्यात का बड़ा हिस्सा इसी जलमार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित कर सकता है।
कैसे बढ़ा नया तनाव?
हालिया मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि संघर्षविराम के बावजूद होर्मुज क्षेत्र में फिर सैन्य गतिविधियां बढ़ीं। रिपोर्टों के अनुसार, एक व्यापारिक जहाज पर मिसाइल हमला हुआ, जिसके बाद अमेरिका ने समुद्री सुरक्षा का हवाला देते हुए जवाबी सैन्य कार्रवाई की।
इसके बाद क्षेत्र में सैन्य तनाव और बढ़ गया तथा दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर समझौते के उल्लंघन के आरोप लगाए।
हालांकि इन सैन्य घटनाओं के संबंध में दोनों देशों की ओर से सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
लेबनान और हिज्बुल्लाह का एंगल
क्षेत्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका-ईरान तनाव केवल होर्मुज तक सीमित नहीं है।
लेबनान में ईरान समर्थित संगठन हिज्बुल्लाह और इजरायल के बीच जारी तनाव भी इस पूरे समीकरण को प्रभावित कर रहा है। ईरान लंबे समय से हिज्बुल्लाह का समर्थन करता रहा है, जबकि अमेरिका इजरायल का प्रमुख सहयोगी है।
इसी कारण पश्चिम एशिया में किसी भी नई सैन्य घटना का असर व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है।
फिलहाल क्या है स्थिति?
हालिया रिपोर्टों के अनुसार, दोनों देशों के बीच प्रत्यक्ष सैन्य कार्रवाई फिलहाल सीमित हुई है और कूटनीतिक संपर्क बनाए रखने की कोशिशें जारी हैं।
हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच किसी नए व्यापक या स्थायी समझौते की आधिकारिक घोषणा अभी तक नहीं हुई है। दोनों देशों के बीच अविश्वास बरकरार है और होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा तथा नियंत्रण का मुद्दा अभी भी प्रमुख विवाद बना हुआ है।
मुख्य बातें
अमेरिका और ईरान के बीच कथित 14-बिंदु शांति समझौते का 'आर्टिकल-5' विवाद का केंद्र बना।
विवाद का मुख्य मुद्दा होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा, नियंत्रण और व्यापारिक जहाजों की आवाजाही है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दोनों देश एक-दूसरे पर समझौते के उल्लंघन का आरोप लगा रहे हैं।
होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल है।
महत्वपूर्ण: कथित 14-बिंदु समझौते और उसके आर्टिकल-5 का आधिकारिक पूर्ण दस्तावेज सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। इसलिए इससे जुड़े कई दावे स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किए जा सके हैं और उन्हें मीडिया रिपोर्टों के आधार पर ही देखा जाना चाहिए।
news desk MPcg